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बारिश के बाद भी शहर की हवा खराब
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फरीदाबाद। दशहरा के बाद शहर में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। हवा की खराब गुणवत्ता के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। आंखों में जलन का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को बारिश होने के बावजूद हवा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ। फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 312 दर्ज किया गया। जो शनिवार की तुलना में 48 अंक ज्यादा है।
पिछले कुछ दिनों से शहर की हवा में लगातार जहर घुल रहा है। आसमान में हर समय हवा का गुबार छाया रहता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से रविवार को फरीदाबाद में एक्यूआई का स्तर 312 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किया गया। जोकि शनिवार के मुकाबले 48 अंक अधिक है। यह बहुत खराब हवा की श्रेणी में आता में है। अलग-अलग क्षेत्रों की अगर बात करें तो सेक्टर 30 क्षेत्र की हवा सबसे अधिक खराब रही। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 343 दर्ज किया गया। वहीं, सेक्टर 16 का 303 रहा। एनआईटी क्षेत्र की हवा इनकी तुलना में कुछ साफ रही। एनआईटी क्षेत्र का एक्यूआई 290 दर्ज किया गया।
श्वास रोगियों के लिए काफी खतरनाक
हवा में प्रदूषित कण काफी बढ़ गए हैं। यह मौसम श्वास रोगियों के लिए काफी खतरनाक माना जाता है। खासकर ठंड के मौसम में प्रदूषण के कारण खून की धमनियां सिकुड़ने से दिल को संपूर्ण शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने पर मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। रक्त की धमनियां सिकुड़ने से रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है। ऐसे में ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग की नशे अचानक काम करना बंद कर देती हैं। बोलने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और आंखों से साफ दिखाई नहीं देता। इसलिए लोगों को इस बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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- डॉ. रोहित गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, एस्कोर्ट फोर्टिस अस्पताल
प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। कोई भी लापरवाही मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश कुमार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी
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पिछले कुछ दिनों से शहर की हवा में लगातार जहर घुल रहा है। आसमान में हर समय हवा का गुबार छाया रहता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से रविवार को फरीदाबाद में एक्यूआई का स्तर 312 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किया गया। जोकि शनिवार के मुकाबले 48 अंक अधिक है। यह बहुत खराब हवा की श्रेणी में आता में है। अलग-अलग क्षेत्रों की अगर बात करें तो सेक्टर 30 क्षेत्र की हवा सबसे अधिक खराब रही। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 343 दर्ज किया गया। वहीं, सेक्टर 16 का 303 रहा। एनआईटी क्षेत्र की हवा इनकी तुलना में कुछ साफ रही। एनआईटी क्षेत्र का एक्यूआई 290 दर्ज किया गया।
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श्वास रोगियों के लिए काफी खतरनाक
हवा में प्रदूषित कण काफी बढ़ गए हैं। यह मौसम श्वास रोगियों के लिए काफी खतरनाक माना जाता है। खासकर ठंड के मौसम में प्रदूषण के कारण खून की धमनियां सिकुड़ने से दिल को संपूर्ण शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने पर मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। रक्त की धमनियां सिकुड़ने से रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है। ऐसे में ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग की नशे अचानक काम करना बंद कर देती हैं। बोलने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और आंखों से साफ दिखाई नहीं देता। इसलिए लोगों को इस बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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- डॉ. रोहित गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, एस्कोर्ट फोर्टिस अस्पताल
प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। कोई भी लापरवाही मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश कुमार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी