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Faridabad News: खुले में हो रही टीबी की जांच, संक्रमण फैलने का खतरा
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जिला नागरिक अस्पताल में सुरक्षा मानकों का नहीं हो रहा पालन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के सबसे बड़े सरकारी बीके सिविल अस्पताल में टीबी मरीजों की जांच खुले में किए जाने का मामला सामने आया है। अस्पताल की पुरानी इमारत को तोड़कर मातृ एवं शिशु वार्ड का निर्माण किया जा रहा है। इसी भवन में पहले टीबी जांच कक्ष संचालित होता था। कमरा टूटने के बाद पिछले करीब एक वर्ष से मरीजों की जांच अस्थायी रूप से खुले स्थान पर की जा रही है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
अस्पताल परिसर में मरीजों के सैंपल खुले स्थान पर लिए जा रहे हैं। जांच के लिए आने वाले मरीज बिना पर्याप्त दूरी के एक-दूसरे के पास बैठे दिखाई देते हैं। वहीं, जांच में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण खुले पड़े कूड़ेदान में रखे नजर आते हैं। आसपास सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। निर्माण कार्य के चलते उड़ने वाली धूल और मिट्टी के कारण संक्रमण का खतरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार टीबी एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए इसकी जांच और सैंपल संग्रह निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप अलग और सुरक्षित स्थान पर होना चाहिए। खुले स्थान पर जांच होने से मरीजों के साथ-साथ अस्पताल आने वाले अन्य लोगों के लिए भी संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। टीबी लैब टेक्नीशियन भूषण ने बताया कि जिस कमरे में पहले टीबी विभाग संचालित होता था, उसे नए मातृ एवं शिशु वार्ड के निर्माण के लिए तोड़ दिया गया है। फिलहाल मजबूरी में बाहर बैठकर ही जांच का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक वर्ष से इसी व्यवस्था के तहत काम चल रहा है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है और जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने का आश्वासन मिला है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के सबसे बड़े सरकारी बीके सिविल अस्पताल में टीबी मरीजों की जांच खुले में किए जाने का मामला सामने आया है। अस्पताल की पुरानी इमारत को तोड़कर मातृ एवं शिशु वार्ड का निर्माण किया जा रहा है। इसी भवन में पहले टीबी जांच कक्ष संचालित होता था। कमरा टूटने के बाद पिछले करीब एक वर्ष से मरीजों की जांच अस्थायी रूप से खुले स्थान पर की जा रही है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
अस्पताल परिसर में मरीजों के सैंपल खुले स्थान पर लिए जा रहे हैं। जांच के लिए आने वाले मरीज बिना पर्याप्त दूरी के एक-दूसरे के पास बैठे दिखाई देते हैं। वहीं, जांच में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण खुले पड़े कूड़ेदान में रखे नजर आते हैं। आसपास सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। निर्माण कार्य के चलते उड़ने वाली धूल और मिट्टी के कारण संक्रमण का खतरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार टीबी एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए इसकी जांच और सैंपल संग्रह निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप अलग और सुरक्षित स्थान पर होना चाहिए। खुले स्थान पर जांच होने से मरीजों के साथ-साथ अस्पताल आने वाले अन्य लोगों के लिए भी संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। टीबी लैब टेक्नीशियन भूषण ने बताया कि जिस कमरे में पहले टीबी विभाग संचालित होता था, उसे नए मातृ एवं शिशु वार्ड के निर्माण के लिए तोड़ दिया गया है। फिलहाल मजबूरी में बाहर बैठकर ही जांच का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक वर्ष से इसी व्यवस्था के तहत काम चल रहा है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है और जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने का आश्वासन मिला है।
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