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सूरजकुंड मेला विभिन्न देशों के हस्तशिल्पियों का महाकुंभ: द्रौपदी मुर्मू

Fri, 02 Feb 2024 10:52 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद Updated Fri, 02 Feb 2024 10:52 PM IST
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Surajkund Mela is Mahakumbh of handicraftsmen from different countries: Draupadi Murmu
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 37वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले का किया उद्घाटन
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- मेले के दौरान 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार होने की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। 37वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उद्घाटन किया। मेले में पहुंची राष्ट्रपति ने कहा कि आज सूरजकुंड मेला अनेक देशों के हस्तशिल्पियों का महाकुंभ बन गया है। यह हमारी सांस्कृतिक विविधता और परंपरा के साथ-साथ नवीनता का उत्सव है, जो कला और शिल्प सीमाओं को तोड़कर समझ के पुल बनाता हैं। इस मौके पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पर्यटन मंत्री कुंवरपाल मौजूद रहे। मेले के 16 दिनों के दौरान 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार होने की उम्मीद है, जो शिल्पकारों व हथकरघा व्यापारियों के लिए आर्थिक दृष्टि से एक बहुत बड़ा मंच साबित होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मेला परिसर में हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया और हरियाणवी संस्कृति की झलक बिखेर रहे शिल्पकारों से रूबरू हुईं। उन्होंने कलाकृतियों के बारे में भी जानकारी ली। साथ ही मेले के थीम स्टेट गुजरात राज्य के स्टॉलों का अवलोकन करते हुए शिल्पकारों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि तंजानिया इस वर्ष के मेले का भागीदार देश है। पिछले वर्ष अक्तूबर में तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन से चर्चा के दौरान दोनों देशों की सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और अधिक विस्तारित करने के महत्व पर सहमति बनी थी। इस मेले में आने वाले पर्यटकों को लकड़ी की नक्काशी, मिट्टी के बर्तन और बुनाई सहित जीवंत और रंगीन तंजानिया कला और शिल्प का अनुभव करने का मौका मिलेगा। यह तंजानियाई नृत्य, संगीत और व्यंजनों को प्रदर्शित करने का एक अद्भुत मंच है, जिसमें हम भारत और पूर्वी अफ्रीकी तट के बीच सदियों से लोगों के बीच संपर्क के कारण कुछ भारतीय प्रभाव की झलक भी देख सकते हैं।
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इस अवसर पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने इस दिन को हरियाणा राज्य के लिए एक ऐतिहासिक दिवस बताया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में तोमर वंश के राजा सूरजपाल द्वारा बनवाया गया ऐतिहासिक सूरजकुंड रोमन शैली में बना है और उगते सूरज की आकृति का है। उगता सूरज प्रगति का प्रतीक माना जाता है।
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पहले भी दो बार राष्ट्रपति कर चुके हैं मेले का उद्घाटन
सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला बीते 37 साल से प्रतिवर्ष फरवरी के पहले पखवाड़े में आयोजित किया जाता है। मेले को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में आयोजन के लिए वर्ष 2007 में शुरुआत हुई और वर्ष 20013 में मेले को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिला। वर्ष 2007 से वर्ष 2013 के बीच दो बार वर्ष 2009 और 2013 में राष्ट्रपति, वर्ष 2007 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, वर्ष 2008 में विदेश मंत्री, वर्ष 2012 में लोक सभा अध्यक्ष और वर्ष 2010 में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मेले का उद्घाटन किया था। शुक्रवार को तीसरी बार राष्ट्रपति ने मेले का उद्घाटन किया।
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