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Faridabad News: परिणाम के बाद निराश न हों छात्र, जीवन है सबसे बड़ा
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विशेषज्ञ बोले-एक परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं होती
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10वीं के परिणाम घोषित होने के बाद जहां कई छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं कुछ विद्यार्थियों के अंक उम्मीद के अनुसार नहीं आए या वे परीक्षाओं में असफल हो गए। ऐसे में शिक्षा विशेषज्ञों और स्कूल प्राचार्यों ने छात्रों से हिम्मत न हारने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं होती। अगर इस बार परिणाम अच्छा नहीं आया तो आगे और मौके मिलेंगे, जहां छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि असफलता को सीख के रूप में लेकर आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है। प्राचार्यों ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। उन्हें समझें, उनका हौसला बढ़ाएं और सकारात्मक माहौल दें। बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि वे किसी एक परिणाम से नहीं, बल्कि अपने प्रयासों से पहचाने जाते हैं।
परीक्षा में कम या ज्यादा नंबर आते रहते हैं। जिन छात्रों के परिणाम उनके अनुरूप नहीं आए हैं, वे फिर से मेहनत करें।
- किशन चंद, प्राचार्य, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी पांच
जो विद्यार्थी परीक्षा में असफल हो गए हैं, उनके पास दूसरा मौका है। जीवन पढ़ाई कहीं बढ़कर है। मेहनत करने वाला आखिरकार सफल हो ही जाता है।
- कैलाश चंदर, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सराय ख्वाजा
परिणाम को लेकर अभिभावक बच्चों पर अधिक दबाव बनाते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। कम अंक वाले बच्चे भी जीवन में बेहतर कर सकते हैं।
- मुकेश चंद, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इंद्रानगर
मैं यही कहना चाहूंगा कि कम नंबर वाले बच्चे निराश न हों। वे फिर से परीक्षा देकर अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।
- राजकुमार, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय समयपुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10वीं के परिणाम घोषित होने के बाद जहां कई छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं कुछ विद्यार्थियों के अंक उम्मीद के अनुसार नहीं आए या वे परीक्षाओं में असफल हो गए। ऐसे में शिक्षा विशेषज्ञों और स्कूल प्राचार्यों ने छात्रों से हिम्मत न हारने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं होती। अगर इस बार परिणाम अच्छा नहीं आया तो आगे और मौके मिलेंगे, जहां छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि असफलता को सीख के रूप में लेकर आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है। प्राचार्यों ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। उन्हें समझें, उनका हौसला बढ़ाएं और सकारात्मक माहौल दें। बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि वे किसी एक परिणाम से नहीं, बल्कि अपने प्रयासों से पहचाने जाते हैं।
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परीक्षा में कम या ज्यादा नंबर आते रहते हैं। जिन छात्रों के परिणाम उनके अनुरूप नहीं आए हैं, वे फिर से मेहनत करें।
- किशन चंद, प्राचार्य, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी पांच
जो विद्यार्थी परीक्षा में असफल हो गए हैं, उनके पास दूसरा मौका है। जीवन पढ़ाई कहीं बढ़कर है। मेहनत करने वाला आखिरकार सफल हो ही जाता है।
- कैलाश चंदर, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सराय ख्वाजा
परिणाम को लेकर अभिभावक बच्चों पर अधिक दबाव बनाते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। कम अंक वाले बच्चे भी जीवन में बेहतर कर सकते हैं।
- मुकेश चंद, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इंद्रानगर
मैं यही कहना चाहूंगा कि कम नंबर वाले बच्चे निराश न हों। वे फिर से परीक्षा देकर अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।
- राजकुमार, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय समयपुर