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पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही कम
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फरीदाबाद। जिले में बृहस्पतिवार से पहली से नौवीं कक्षा तक कक्षाएं शुरू हो गई। विद्यार्थियों को कोविड-19 की दिशानिर्देश के अनुसार स्कूल में प्रवेश मिला। पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति मात्र 30 से 35 फीसदी रही। स्कूलों के गेट पर ही सैनिटाइजर रखे हुए थे। मास्क लगाने के बाद ही प्रवेश दिया गया।
कोरोना की तीसरी लहर के कारण पहली से नौवीं कक्षा तक के स्कूलों को बंद कर दिए थे। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या कम होने के बाद स्कूल में पठन- पाठन का कार्य शुरू हो गया। हालांकि कई स्कूलों में कोविड-19 के दिशानिर्देश का पालन नहीं किया गया। विद्यार्थी एक-दूसरे के साथ बैठे थे। स्कूल प्रबंधन की ओर से भी इसे नजर अंदाज किया गया। हालांकि एनआईटी पांच नंबर स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ विद्यालय के मुख्य गेट पर सैनिटाइजर रखा था।
स्कूल प्रबंधन की ओर से मास्क की भी जांच की गई, जो विद्यार्थी मास्क लेकर नहीं आए थे। उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं दिया गया। नौवीं से 12वीं कक्षा में मात्र 323 विद्यार्थी आए जबकि स्कूल में कुल 909 विद्यार्थी है। पहली से नौवीं कक्षा में कुल 451 विद्यार्थी है, उनमें से मात्र 98 बच्चे उपस्थित रहें। शिक्षिका पूनम का कहना है कि कोरोना काल में कुछ बच्चे अपने दादा-दादी के घर चले गए है। इस कारण पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही है। सोमवार से विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इसी प्रकार एनआईटी तीन स्थित राजकीय स्कूल में भी विद्यार्थियों की संख्या कम रहीं। यहां भी स्कूल में प्रवेश से हाथ को सैनिटाइज करना जरूरी था। स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार छठी कक्षा में कुल 158 विद्यार्थी है, इनमें से मात्र 50 विद्यार्थी ही उपस्थित थे। सातवीं कक्षा में मात्र 26 विद्यार्थी उपस्थित थे, जबकि कक्षा में 149 विद्यार्थी है। आठवीं कक्षा में 65 विद्यार्थी, नौवीं कक्षा में मात्र 15 विद्यार्थी उपस्थित थे। जबकि कक्षा में 201 विद्यार्थी है। दसवीं कक्षा में 82 विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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स्कूल खुलने का पहला दिन था। इस कारण स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम थी। एक-दो दिन में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।
रितु चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी
कई दिन के बाद स्कूल आने से बहुत अच्छा लगा। दोस्तों से मुलाकात हुई है।
-दिव्या, छात्रा
कई दिनों के बाद स्कूल खुला है, इसलिए स्कूल आने का मन नहीं कर रहा था। लेकिन मम्मी-पापा के दबाव के कारण स्कूल आना पड़ा।
लावली, छात्रा
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कोरोना की तीसरी लहर के कारण पहली से नौवीं कक्षा तक के स्कूलों को बंद कर दिए थे। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या कम होने के बाद स्कूल में पठन- पाठन का कार्य शुरू हो गया। हालांकि कई स्कूलों में कोविड-19 के दिशानिर्देश का पालन नहीं किया गया। विद्यार्थी एक-दूसरे के साथ बैठे थे। स्कूल प्रबंधन की ओर से भी इसे नजर अंदाज किया गया। हालांकि एनआईटी पांच नंबर स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ विद्यालय के मुख्य गेट पर सैनिटाइजर रखा था।
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स्कूल प्रबंधन की ओर से मास्क की भी जांच की गई, जो विद्यार्थी मास्क लेकर नहीं आए थे। उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं दिया गया। नौवीं से 12वीं कक्षा में मात्र 323 विद्यार्थी आए जबकि स्कूल में कुल 909 विद्यार्थी है। पहली से नौवीं कक्षा में कुल 451 विद्यार्थी है, उनमें से मात्र 98 बच्चे उपस्थित रहें। शिक्षिका पूनम का कहना है कि कोरोना काल में कुछ बच्चे अपने दादा-दादी के घर चले गए है। इस कारण पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही है। सोमवार से विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इसी प्रकार एनआईटी तीन स्थित राजकीय स्कूल में भी विद्यार्थियों की संख्या कम रहीं। यहां भी स्कूल में प्रवेश से हाथ को सैनिटाइज करना जरूरी था। स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार छठी कक्षा में कुल 158 विद्यार्थी है, इनमें से मात्र 50 विद्यार्थी ही उपस्थित थे। सातवीं कक्षा में मात्र 26 विद्यार्थी उपस्थित थे, जबकि कक्षा में 149 विद्यार्थी है। आठवीं कक्षा में 65 विद्यार्थी, नौवीं कक्षा में मात्र 15 विद्यार्थी उपस्थित थे। जबकि कक्षा में 201 विद्यार्थी है। दसवीं कक्षा में 82 विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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स्कूल खुलने का पहला दिन था। इस कारण स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम थी। एक-दो दिन में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।
रितु चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी
कई दिन के बाद स्कूल आने से बहुत अच्छा लगा। दोस्तों से मुलाकात हुई है।
-दिव्या, छात्रा
कई दिनों के बाद स्कूल खुला है, इसलिए स्कूल आने का मन नहीं कर रहा था। लेकिन मम्मी-पापा के दबाव के कारण स्कूल आना पड़ा।
लावली, छात्रा