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Faridabad News: 16 सेक्टरों में एसटीपी प्लांट की मदद से बढ़ेगी हरियाली
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माइक्रो एसटीपी से हरित क्षेत्र में पहुंचाया जाएगा पानी, पार्क व ग्रीन बेल्ट के इस्तेमाल में लिया जाएगा उपचारित जल
- भू-जल स्तर और हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ पानी की बर्बादी भी होगी कम
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एफएमडीए) ने हरित क्षेत्रों के लिए जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अथॉरिटी ने मास्टर सीवरेज योजना के तहत 6 माइक्रो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की परियोजना शुरू की है। इस योजना के तहत पार्कों और ग्रीन बेल्ट में सिंचाई के लिए उपचारित जल का उपयोग किया जाएगा। इससे न केवल पानी की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
शहर के सेक्टर-9, 10, 14, 15, 15ए, 16, 17, 18, 19, 29, 30, 31, 32, 34, 35 और 37 के पार्कों में लंबे समय से जल की कमी बनी हुई है। कई जगहों पर को टैंकरों से पानी उपलब्ध कराना पड़ता है। इससे लागत और समय दोनों बढ़ते हैं। ऐसे में एसटीपी से मिलने वाला उपचारित जल हरियाली को संजीवनी देगा और शहर के पर्यावरण को स्वस्थ बनाएगा। शुरुआत में 16 सेक्टरों में उपचारित जल का प्रयोग किया जाएगा। यह परियोजना सफल होने पर अन्य सेक्टरों में भी इस तरह के प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। छोटे स्तर पर एसटीपी बनाने से सेक्टरों से निकलने वाले गंदे पानी को वहीं पर उपचारित करके इस्तेमाल में लिया जा सकेगा।
एफएमडीए के अधिकारियों का कहना है कि यह योजना शहरी जल प्रबंधन का एक आधुनिक मॉडल बनेगी। इसमें सीवरेज का पुनर्चक्रण कर उसका उपयोग हरित विकास में किया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी। साथ ही पौधों को नया जीवन मिलेगा। एक अधिकारी ने बताया कि यह परियोजना शहर की जल नीति में एक नया अध्याय जोड़ेगी। फरीदाबाद में शहरी नालों का पानी अब बेकार नहीं जाएगा, बल्कि इसे उपचारित कर पार्कों में इस्तेमाल में लिया जाएगा।
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ईपीएस मॉडल पर होगा काम
परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीएस) मोड पर आधारित होगी। प्रत्येक एसटीपी की क्षमता 500 किलो लीटर प्रतिदिन होगी। इसके साथ ही 10 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी रहेगी। एफएमडीए की तरफ से इन एसटीपी को छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
हर सेक्टर में हरियाली की पहल
एफएमडीए ने योजना के लिए जिन सेक्टरों को चुना है, वे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। जहां लंबे समय से पार्कों की सिंचाई की समस्या वर्षों से बनी हुई है। खासतौर पर सेक्टर-29 और 31 के टाउन पार्कों में गर्मियों के दौरान हरियाली सूख जाती है। इन इलाकों में माइक्रो एसटीपी लगने से पानी की आपूर्ति सुचारू होगी और हरियाली बनाए रखना आसान हो जाएगा।
फरीदाबाद में बदलता जल प्रबंधन
हाल के वर्षों में फरीदाबाद को लगातार गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों से जूझना पड़ रहा है। नगर निगम और एफएमडी ने अब जल संरक्षण और पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी है। पार्कों में उपचारित जल के प्रयोग से लगभग 20-25 प्रतिशत तक ताजे पानी की बचत संभव होगी। वहीं दूसरी तरफ एफएमडीए की तरफ से बाढ़ व बारिश के पानी के संचय के लिए भी विशेष रिचार्ज स्थल बनाए जा रहे हैं।
एनसीआर में मिलेगी अलग पहचान
इस योजना के पूरा होने के बाद फरीदाबाद दिल्ली-एनसीआर के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा। जहां पार्कों की सिंचाई के लिए पूरी तरह उपचारित सीवेज जल का प्रयोग किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल जमीनी स्तर पर काफी बड़ा बदलाव ला सकती है। बड़े एसटीपी को स्थापित करने में काफी समय व धन लगता है। अगर इस कार्य में सफलता मिलती है तो अन्य सेक्टरों में भी इसी तरह की परियोजनाओं पर काम किया जाएगा।
प्राधिकरण की तरफ से लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। जल संरक्षण को प्राथमिकता पर रखकर परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। - अंकित भारद्वाज, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर
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- भू-जल स्तर और हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ पानी की बर्बादी भी होगी कम
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एफएमडीए) ने हरित क्षेत्रों के लिए जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अथॉरिटी ने मास्टर सीवरेज योजना के तहत 6 माइक्रो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की परियोजना शुरू की है। इस योजना के तहत पार्कों और ग्रीन बेल्ट में सिंचाई के लिए उपचारित जल का उपयोग किया जाएगा। इससे न केवल पानी की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
शहर के सेक्टर-9, 10, 14, 15, 15ए, 16, 17, 18, 19, 29, 30, 31, 32, 34, 35 और 37 के पार्कों में लंबे समय से जल की कमी बनी हुई है। कई जगहों पर को टैंकरों से पानी उपलब्ध कराना पड़ता है। इससे लागत और समय दोनों बढ़ते हैं। ऐसे में एसटीपी से मिलने वाला उपचारित जल हरियाली को संजीवनी देगा और शहर के पर्यावरण को स्वस्थ बनाएगा। शुरुआत में 16 सेक्टरों में उपचारित जल का प्रयोग किया जाएगा। यह परियोजना सफल होने पर अन्य सेक्टरों में भी इस तरह के प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। छोटे स्तर पर एसटीपी बनाने से सेक्टरों से निकलने वाले गंदे पानी को वहीं पर उपचारित करके इस्तेमाल में लिया जा सकेगा।
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एफएमडीए के अधिकारियों का कहना है कि यह योजना शहरी जल प्रबंधन का एक आधुनिक मॉडल बनेगी। इसमें सीवरेज का पुनर्चक्रण कर उसका उपयोग हरित विकास में किया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी। साथ ही पौधों को नया जीवन मिलेगा। एक अधिकारी ने बताया कि यह परियोजना शहर की जल नीति में एक नया अध्याय जोड़ेगी। फरीदाबाद में शहरी नालों का पानी अब बेकार नहीं जाएगा, बल्कि इसे उपचारित कर पार्कों में इस्तेमाल में लिया जाएगा।
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ईपीएस मॉडल पर होगा काम
परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीएस) मोड पर आधारित होगी। प्रत्येक एसटीपी की क्षमता 500 किलो लीटर प्रतिदिन होगी। इसके साथ ही 10 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी रहेगी। एफएमडीए की तरफ से इन एसटीपी को छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
हर सेक्टर में हरियाली की पहल
एफएमडीए ने योजना के लिए जिन सेक्टरों को चुना है, वे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। जहां लंबे समय से पार्कों की सिंचाई की समस्या वर्षों से बनी हुई है। खासतौर पर सेक्टर-29 और 31 के टाउन पार्कों में गर्मियों के दौरान हरियाली सूख जाती है। इन इलाकों में माइक्रो एसटीपी लगने से पानी की आपूर्ति सुचारू होगी और हरियाली बनाए रखना आसान हो जाएगा।
फरीदाबाद में बदलता जल प्रबंधन
हाल के वर्षों में फरीदाबाद को लगातार गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों से जूझना पड़ रहा है। नगर निगम और एफएमडी ने अब जल संरक्षण और पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी है। पार्कों में उपचारित जल के प्रयोग से लगभग 20-25 प्रतिशत तक ताजे पानी की बचत संभव होगी। वहीं दूसरी तरफ एफएमडीए की तरफ से बाढ़ व बारिश के पानी के संचय के लिए भी विशेष रिचार्ज स्थल बनाए जा रहे हैं।
एनसीआर में मिलेगी अलग पहचान
इस योजना के पूरा होने के बाद फरीदाबाद दिल्ली-एनसीआर के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा। जहां पार्कों की सिंचाई के लिए पूरी तरह उपचारित सीवेज जल का प्रयोग किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल जमीनी स्तर पर काफी बड़ा बदलाव ला सकती है। बड़े एसटीपी को स्थापित करने में काफी समय व धन लगता है। अगर इस कार्य में सफलता मिलती है तो अन्य सेक्टरों में भी इसी तरह की परियोजनाओं पर काम किया जाएगा।
प्राधिकरण की तरफ से लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। जल संरक्षण को प्राथमिकता पर रखकर परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। - अंकित भारद्वाज, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर