1800 करोड़ का काला धन: 10 पैसे के खेल में कारोबारी विदेश पहुंचा रहे पैसा, छोटा सा कट और अरबों के वारे-न्यारे
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने फरीदाबाद समेत देश के राज्यों में ट्रेडिंग के कारोबार से जुड़ी कंपनियों और उनके निदेशकों के घरों पर छापा मारा है।
विस्तार
रुपये में 10 पैसे के खेल से फरीदाबाद के स्टील कारोबारी चीन तक काला धन पहुंचाने में लगे थे। छोटा से कट से ही व्यापारियों के अरबों रुपये के वारे-न्यारे हो रहे हैं। शेल कंपनियों के जरिए चीन, रूस, उजबेकिस्तान, बांग्लादेश समेत अन्य देशों से कोई माल नहीं खरीद रहे बस कागजों में लेन-देन दिखाकर अरबों रुपये विदेश भेजा जा रहा है। इस मामले में हरियाणा-दिल्ली समेत देशभर में ईडी के छापे में 1800 करोड़ रुपये का काला धन विदेश भेजने का मामला पता चला है। मंगलवार को फरीदाबाद की तीन कंपनियों समेत देशभर में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ। जांच में पता चला की कारोबारियों ने दिल्ली के ट्रेडर्स से सांठगांठ कर रखी थी।
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने फरीदाबाद समेत देश के राज्यों में ट्रेडिंग के कारोबार से जुड़ी कंपनियों और उनके निदेशकों के घरों पर छापा मारा है। इसमें फरीदाबाद सेक्टर-21सी निवासी की कंपनियां राज नंदनिया, मेसर्स ट्रिपल एम मेटल एंड अलॉयज के निदेशक हेतराम शर्मा, मैसर्स एचएम मैटल मोहन शर्मा के घर और कंपनी कार्यालयों पर ईडी ने जांच की।
मौके से कई जरूरी दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच की। प्राथमिक जांच में सामने आया था कि यह कंपनियां बड़े पैमाने पर देश के बाहर विदेश पैसे भेजने के खेल कर रही हैं। अन्य कंपनियों के नाम पर कागजों पर फर्जी माल ढुलाई, आयात को दिखाया जा रहा था। तलाशी के दौरान ईडी ने लगभग 15 लाख रुपये बरामद किए हैं। हालांकि एक साल पहले सीजीएसटी, इनकम टैक्स और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) भी दोनों कंपनी निदेशकों के यहां छापा मार चुकी हैं।
सेक्टर-21सी निवासी मोहन शर्मा और हेतराम शर्मा दोनों भाई हैं। हाल ही हेतराम जीएसटी फर्जीवाड़े केस में तीन माह जेल में रह कर आया है। दोनों ने अलग-अलग नामों पर कंपनियां बनाई हैं। जीएसटी नंबर भी लिया है। जिसमें स्टील ट्रेडिंग का कारोबार करना दिखाया गया है और दिल्ली की अमित स्टील ट्रेडर्स नामक कंपनी से इनका लिंक है।
कच्चे बिल पर सामान मंगाने वाली कंपनियों का होता है पैसा
देश में बड़ी तादात में बिना बिल के माल मंगाया जाता है। इसमें 10 से 15 फीसदी ही बिलिंग होती है और बाकी कच्चा बिल होता है। यहां पर बिना बिल का आया सामान अच्छे दामों पर निकाला जाता है। बाद में शेल कंपनियों और फर्जी प्रोपराइटर फर्मों के जरिए पैसा सामान भेजने वाले देशों में मौजूद व्यापारियों को भेज दिया जाता है।
कई शेल कंपनियां और प्रोपराइटर फर्म के जरिए विदेश पहुंचता है पैसा
इस खेल में कई शेल कंपनियां शामिल होती हैं। एक शेल कंपनियों से दूसरी शेल कंपनियों तक पैसा जाता है। इस तरह से तीन से चार स्थानों पर पैसा जाते-जाते एक फर्जी नाम-पता की प्रोप्रराइटर फर्म से एकाएक पैसा दूसरे देशों में बैठी फर्जी कंपनियों के खातों में पहुंचाया जाता है। कंपनियों में किसी प्रकार का कोई काम नहीं होता है, लेकिन ये कंपनियां विदेश माल भेजने और के नाम पर केवल कागजों में बिल काटती थीं।
लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं स्टील कारोबारी
सूत्रों के अनुसार कारोबारियों को फर्जीवाड़े से बड़ा लाभ मिल रहा था। जांच में पता चला है कि यह लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं। कारोबारियों के पास लेम्बोर्गिनी, पोर्श, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज जैसी लग्जरी गाड़ियों का बेड़ा है।