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Faridabad News: अयोध्या नगरी की तरह सजा सूरजकुंड का दिवाली मेला
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- पर्यटन मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने दिवाली मेले का किया शुभारंभ, सांसकृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भगवान श्रीराम जब लंका पर विजय करने के बाद अयोध्या लौटे तो तमाम अयोध्या वासियों ने उनका घी के दीये जलाकर एवं तिलक कर स्वागत किया था। पूरी अयोध्या नगर भगवान श्रीराम के रंग में रंग गई थी। कुछ ऐसी ही थीम आपको सूरजकुंड के दिवाली उत्सव मं देखने को मिलेगी। 3 नवंबर से 10 नवंबर तक चलने दिवाली उत्सव का शुक्रवार को हरियाणा के पर्यटन मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने शुभारंभ किया।
लंका विजय के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तो अयोध्या वासियों ने उनका तिलक लगाकर एवं दीप प्रज्वलित कर स्वागत किया था। इसी तर्ज पर मेले के शुभारंभ के बाद भगवान राम एवं लक्ष्मण बने स्वरूपों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। कंवरपाल गुर्जर ने मेला परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की बनाई मेला संस्कृति की परंपरा को सरकारी तौर पर भी प्रोत्साहन देना होगा। लोगों को कुछ समय के लिए खुशी और सुकून देने के लिए ही मुख्यमंत्री ने सूरजकुंड मेला परिसर में दिवाली उत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया है।
पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा ने कहा कि आम लोगों की मांग पर आज हम प्रथम दिवाली उत्सव का शुभारंभ करने जा रहे हैं। मेले का बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है, भविष्य में इसे और ज्यादा विस्तृत किया जाएगा। इस अवसर पर बड़खल की विधायक सीमा त्रिखा, फरीदाबाद से विधायक नरेंद्र गुप्ता, तिगांव से विधायक राजेश नागर, पृथला से विधायक नयनपाल रावत, सीएम के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली, पर्यटन विभाग के एमडी नीरज कुमार, जीएम यूएस भारद्वाज सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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हैप्पीनेस इंडेक्स बढ़ाने के लिए मेला संस्कृति को जिंदा करना होगा
पर्यटन मंत्री ने कहा कि मेलों की संख्या दो होने से कलाकारों और शिल्पकारों को ज्यादा मौका मिलेगा। आज हमारे पास पैसा है, बड़ा मकान है लेकिन खुशी नहीं है। ऐसे में हमें अपने हैप्पीनेस इंडेक्स को बढ़ाने के लिए मेला संस्कृति को पुन: जिंदा करना होगा। हमारे बुजुर्गों ने गांव-गांव में मेले शुरू किए। इन मेलों में हजारों लाखों लोग जुटते हैं। यह सामाजिक एकता का परिचायक भी हैं।
36 वर्षों से सूरजकुंड मेला बना हमारी पहचान
सूरजकुंड मेला भी पिछले 36 सालों से देश व विदेश में हमारी पहचान बना हुआ है। इस मेले में लाखों लोग अपना समय निकालकर अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताते हैं। इससे कलाकारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है और लोगों को खुशी। लोगों की इसी खुशी को देखते हुए मनोहर लाल ने इस परिसर में दीपावली उत्सव भी शुरू करने का निर्णय लिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भगवान श्रीराम जब लंका पर विजय करने के बाद अयोध्या लौटे तो तमाम अयोध्या वासियों ने उनका घी के दीये जलाकर एवं तिलक कर स्वागत किया था। पूरी अयोध्या नगर भगवान श्रीराम के रंग में रंग गई थी। कुछ ऐसी ही थीम आपको सूरजकुंड के दिवाली उत्सव मं देखने को मिलेगी। 3 नवंबर से 10 नवंबर तक चलने दिवाली उत्सव का शुक्रवार को हरियाणा के पर्यटन मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने शुभारंभ किया।
लंका विजय के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तो अयोध्या वासियों ने उनका तिलक लगाकर एवं दीप प्रज्वलित कर स्वागत किया था। इसी तर्ज पर मेले के शुभारंभ के बाद भगवान राम एवं लक्ष्मण बने स्वरूपों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। कंवरपाल गुर्जर ने मेला परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की बनाई मेला संस्कृति की परंपरा को सरकारी तौर पर भी प्रोत्साहन देना होगा। लोगों को कुछ समय के लिए खुशी और सुकून देने के लिए ही मुख्यमंत्री ने सूरजकुंड मेला परिसर में दिवाली उत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया है।
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पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा ने कहा कि आम लोगों की मांग पर आज हम प्रथम दिवाली उत्सव का शुभारंभ करने जा रहे हैं। मेले का बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है, भविष्य में इसे और ज्यादा विस्तृत किया जाएगा। इस अवसर पर बड़खल की विधायक सीमा त्रिखा, फरीदाबाद से विधायक नरेंद्र गुप्ता, तिगांव से विधायक राजेश नागर, पृथला से विधायक नयनपाल रावत, सीएम के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली, पर्यटन विभाग के एमडी नीरज कुमार, जीएम यूएस भारद्वाज सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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हैप्पीनेस इंडेक्स बढ़ाने के लिए मेला संस्कृति को जिंदा करना होगा
पर्यटन मंत्री ने कहा कि मेलों की संख्या दो होने से कलाकारों और शिल्पकारों को ज्यादा मौका मिलेगा। आज हमारे पास पैसा है, बड़ा मकान है लेकिन खुशी नहीं है। ऐसे में हमें अपने हैप्पीनेस इंडेक्स को बढ़ाने के लिए मेला संस्कृति को पुन: जिंदा करना होगा। हमारे बुजुर्गों ने गांव-गांव में मेले शुरू किए। इन मेलों में हजारों लाखों लोग जुटते हैं। यह सामाजिक एकता का परिचायक भी हैं।
36 वर्षों से सूरजकुंड मेला बना हमारी पहचान
सूरजकुंड मेला भी पिछले 36 सालों से देश व विदेश में हमारी पहचान बना हुआ है। इस मेले में लाखों लोग अपना समय निकालकर अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताते हैं। इससे कलाकारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है और लोगों को खुशी। लोगों की इसी खुशी को देखते हुए मनोहर लाल ने इस परिसर में दीपावली उत्सव भी शुरू करने का निर्णय लिया है।