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अब तक दो लाख सैलानी पहुंचे

Tue, 29 Mar 2022 11:22 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 11:22 PM IST
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So far two lakh tourists have reached
फरीदाबाद। हड़ताल के बीच सूरजकुंड मेले में मंगलवार को करीब 50 हजार सैलानी पहुंचे। दिन में मायूस बैठे हस्तशिल्प कलाकारों के चेहरे पर खुशी नजर आई। मेले के नोडल अधिकारी राजेश जून ने बताया कि 19 से 29 मार्च तक सूरजकुंड में देसी-विदेशी कुल दो लाख के आसपास सैलानी मेले का लुफ्त उठाने पहुंचे। हालांकि, पिछले वर्षों की अपेक्षा सैलानियों की संख्या कुछ कम जरूर रही। इसके बावजूद पर्यटन विभाग को बीते 11 दिन में दो करोड़ के आसपास का राजस्व मिला है। अधिकारियों का कहना है कि अभी मेले में एक सप्ताह का और समय है। ऐसे में उम्मीद है कि मेला का लुफ्त लेने के लिए 10 लाख से अधिक सैलानी पहुंचेंगे और इसका फायदा पर्यटन विभाग के साथ हस्तशिल्प कलाकारों को होगा। अधिकारियों के अनुसार, मेले से पर्यटन विभाग को 10 करोड़ से अधिक राजस्व होने की उम्मीद है।
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ऑटो चालकों ने वसूला मनमाना किराया
रोडवेज की हड़ताल का असर मंगलवार को सूरजकुंड मेले पर भी देखने को मिला। बसों के परिचालन नहीं होने से उम्मीद से कम सैलानी मेले में पहुंचे। अगर किसी तरह पहुंचे भी तो उन्हें आने-जाने के लिए कैब, ई-रिक्शा, निजी वाहन व ऑटो आदि का सहारा लेना पड़ा। ऐसे में ऑटो चालकों ने पर्यटकों से मनमाना किराया वसूल किए। इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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गर्मी ने बढ़ाई परेशानी
सूरजकुंड मेले के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही गर्मी में भी बेतहाशा वृद्धि हो रही है। इस कारण दिन में मेला परिसर लगभग सूना रहता हैै। हालांकि, शाम होते ही सैलानियों की संख्या बढ़ने लगती है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार मेला रात में करीब 11.30 बजे तक संचालित हो रहा है। ऐसे में दिन की अपेक्षा शाम को काफी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं।
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पर्यटकों को लुभा रहे बाग प्रिंट परिधान
स्टॉल नंबर- 526 पर मध्यप्रदेश स्थित धार जिले से आए हस्तशिल्प कलाकार की कलाकारी सैलानियों को खूब भा रही है। कलाकार सैलानियों को बाग प्रिंट की जानकारी देते नजर आ रहे हैं। हस्तशिल्प कलाकार भीम सिंह डोडवे ने बताया कि वह सूती कपड़ा बाजार से खरीदते हैं। फिर उसे करीब 12 घंटे तक पानी में रखते हैं। इसके बाद फिटकरी से लाल रंग व जंग लगे लोहे से काला रंग बनाकर, उसमें हरेरा पाउडर, अरेंडी का तेल आदि मिलाकर कपड़े को लकड़ी के सांचे पर चित्र उकेरते हैं। एक परिधान को बनाने में 15 से 20 दिन का समय लगता है। इसे हम बाग प्रिंट कहते हैं। यह पूरी तरह से प्राकृतिक होता है। सैलानियों को बाग प्रिंट वाले कपड़े खूब पसंद आ रहे हैं। सैलानियों के लिए स्टॉल पर 1000 से 2500 रुपये तक के परिधान उपलब्ध हैं।

पर्वतारोहण की दी जा रही जानकारी
जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग की ओर से मेले में सैलानियों को पर्वतारोहण की जानकारी दी जा रही है। पहाड़ों पर चढ़ने के दौरान किस तरह के पोशाक, जूते आदि का उपयोग किया जाता है। इसकी बारीकी से जानकारी दी जा रही है। मेला प्रबंधन के अनुसार, इसके लिए बड़े चौपाल के पास पर्वतारोहण के दौरान उपयोग में आने वाले परिधानों की प्रदर्शनी लगी है, जो सैलानियों को खूब पसंद आ रही है।
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