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स्मार्ट सिटी : एक दशक बाद भी अधूरी 14 परियोजनाएं

Fri, 07 Aug 2026 12:05 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:05 AM IST
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Smart City: 14 projects remain incomplete even after a decade.
कैग रिपोर्ट ने फरीदाबाद के स्मार्ट सिटी मिशन की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक खामियों को किया उजागर
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18 परियोजनाएं बिना निदेशक मंडल की मंजूरी के बंद की
14 परियोजनाओं को आठ महीने में पूरा करने की चुनौती

राहुल राज

फरीदाबाद। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट ने फरीदाबाद के स्मार्ट सिटी मिशन की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक खामियों को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड (एफएससीएल) ने 18 परियोजनाएं बिना निदेशक मंडल की मंजूरी के बंद कर दीं। वहीं, 30 जून 2024 तक 28 परियोजनाएं 3 दिन से लेकर 1,506 दिन (करीब चार वर्ष) तक की देरी का शिकार रहीं। इन हालात के बीच राज्य सरकार ने सभी लंबित स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक की नई समय सीमा तय की है यानी मिशन शुरू होने के करीब एक दशक बाद भी 46 में से केवल 32 परियोजनाएं पूरी हो सकी हैं। अब शेष 14 परियोजनाओं को अगले आठ महीने में पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।

फंड जुटाने में विफल रही एफएससीएल

कैग रिपोर्ट के अनुसार, फरीदाबाद के लिए स्मार्ट सिटी प्रस्ताव के तहत 2,601.01 करोड़ रुपये की लागत से 46 परियोजनाएं प्रस्तावित थीं। इनमें एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के तहत सेक्टर-19, 20, 20ए, 21बी और 21डी के विकास पर 2,108 करोड़ रुपये, जबकि पैन सिटी परियोजनाओं पर 469.47 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे लेकिन वित्तीय मोर्चे पर योजना पूरी तरह पटरी से उतर गई। 2,601.01 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले एफएससीएल केवल 980 करोड़ रुपये (37.67 प्रतिशत) ही जुटा सकी और यह पूरी राशि केंद्र व राज्य सरकार की ग्रांट से मिली। जमीन के व्यावसायिक उपयोग से 428.38 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य था, लेकिन इस मद में एक भी रुपया नहीं मिला। वहीं 1,007.50 करोड़ रुपये के तीन पीपीपी प्रोजेक्ट और 12.13 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने की योजना भी पूरी तरह विफल रही।
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बिना जमीन और एनओसी के दे दिया एसटीपी का ठेका

कैग रिपोर्ट में 64.50 करोड़ रुपये की लागत से आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की परियोजना में भी लापरवाही सामने आई है। ऑडिट के अनुसार, मार्च 2022 में संबंधित विभागों से जमीन उपलब्ध कराए बिना और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना ही ठेका जारी कर दिया। बाद में छह प्रस्तावित स्थलों पर जमीन ही उपलब्ध नहीं हो सकी, जबकि सेक्टर-45 में स्थानीय लोगों के विरोध के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। नतीजतन परियोजना ठप पड़ गई और ठेकेदार को 27 लाख रुपये का निष्फल भुगतान करना पड़ा। आखिरकार दिसंबर 2023 में छह एसटीपी का कार्य रद्द करना पड़ा।
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छह महीने में पूरा होना था संत नगर का विकास, छह साल बाद भी अधूरा

रिपोर्ट में संत नगर स्लम पुनर्विकास परियोजना को भी स्मार्ट सिटी मिशन की सुस्त कार्यशैली का उदाहरण बताया गया है। 9.69 करोड़ रुपये की इस परियोजना को अनुबंध के अनुसार छह महीने में पूरा किया जाना था लेकिन करीब छह वर्ष बाद भी यह पूरी नहीं हो सकी। ऑडिट में बताया गया कि ठेकेदार को 2.58 करोड़ रुपये का भुगतान करने के बावजूद कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ। बाद में अनुबंध समाप्त कर शेष कार्य नगर निगम को सौंप दिया गया।
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