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बम धमाकों के बीच मेट्रो स्टेशन के नीचे बिताए छह दिन

Sun, 06 Mar 2022 10:32 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 10:32 PM IST
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Six days spent under metro station between bomb blasts
फरीदबाद। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच खारकीव शहर में फंसे भारतीय विद्यार्थियों की रविवार को सकुशल स्वदेश वापसी हुई। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर विद्यार्थियों के परिजनों ने तुरंत गले लगा लिया और फफक-फफक कर रो पड़े। इस दौरान उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। फरीदाबाद लौटे विद्यार्थी बम धमाकों के बीच युद्ध का वह मंजर याद कर सिहर उठे। अमर उजाला से बातचीत करते हुए उन्होंने बमबारी के बीच बिताए पलों को साझा किया। उन्होंने कहा कि खारकीव की जिस यूनिवर्सिटी में वह पढ़ रहे थे आज वह खंडहर में तब्दील हो गई है। छह दिन भूखे-प्यासे मेट्रो स्टेशन के बंकर में बिताए।
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कॉलेज खंडहर में तब्दील
डबुआ कॉलोनी निवासी अंकित खारकीव में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। रविवार सुबह सकुशल वापिस लौटे। उन्होंने बताया कि युद्ध के कारण तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। छह दिन से मेट्रो स्टेशन में छुपे हुए थे। ऊपर बमबारी हो रही थी। मिसाइलों और बमों की तेज आवाज से सिहर उठते थे। हमारे कॉलेज और उसके पास की इमारतें मिसाइल हमले में लगभग पूरी क्षतिग्रस्त हो गई है। रूस की ओर से हमला सुबह 10 बजे के बाद शुरू होते थे। इसलिए वह अपने दोस्तों के साथ सुबह छह बजे मेट्रो स्टेशन से बाहर निकले। कैब से किसी तरह हंगरी बॉर्डर पहुंचे। यहां लंबी लाइन होने के कारण तीन दिन में बॉर्डर पार कर सका। घर लौटने पर काफी खुश हूं। इसके लिए सरकार का बहुत आभारी हूं।
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अल सुबह फ्लैट से बनाकर लाते थे खाना
सेक्टर-55 निवासी पवन एमबीबीएस के अंतिम सत्र के विद्यार्थी हैं। उन्होंने बताया कि खारकीव में हालात बेहद खराब है। मेट्रो स्टेशन के पास रोजाना बम गिर रहे थे। गोलीबारी ज्यादातर दिन में होती थी। इसलिए हम सुबह छह बजे अपने फ्लैट में जाकर खाना बनाकर लाते थे। रेड अलर्ट होने के कारण मेट्रो के गेट खुलने और बंद होने का समय तय था। जिससे अंदर लोग सुरक्षित रह सके। यदि तय समय के बाद कोई आता था तो उसे बाहर रहना पड़ता था।
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बमबारी शुरू होते ही कॉलेज छोड़ने के लिए कहा
एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र कृष्ण तेवतिया ने अपने परिवार के साथ प्रदेश के परिवहन मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा से मिलकर धन्यवाद जताया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में जब बम गिरने शुरू हुए तो उन्हें कॉलेज छोड़ने के लिए कहा गया। यह सुनकर सभी के दिल दहल गए, जब इसकी सूचना उन्होंने अपने परिजनों को दी तो उनके पिता मुकेश तेवतिया प्रदेश के परिवहन मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा से मिले और अपने बेटे को वतन वापसी की मांग की थी। करीब 48 घंटे बाद जब कृष्ण अपने देश अपने गांव साहूपूरा पहुंचा तो उसे काफी खुशी और गर्व महसूस हुआ। उन्होंने परिवहन मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा का गुलदस्ता देकर आभार प्रकट किया व भाजपा सरकार का भी धन्यवाद जताया।
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