{"_id":"6a4567da0f8483005b0ad964","slug":"sir-difficulties-have-increased-for-newly-married-women-verification-has-become-a-challenge-due-to-a-lack-of-documents-and-information-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-73771-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: एसआईआरः नई विवाहित महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें, दस्तावेज और जानकारी के अभाव में सत्यापन बना चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: एसआईआरः नई विवाहित महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें, दस्तावेज और जानकारी के अभाव में सत्यापन बना चुनौती
विज्ञापन
बीएलओ के घर-घर नहीं पहुंचने की समस्या से बढ़ रही चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बीच सबसे अधिक परेशानी नई विवाहित महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। शादी के बाद ससुराल आई महिलाओं के लिए मतदाता सूची में नाम स्थानांतरित कराना टेढ़ी खीर बन गया है। इसके साथ ही सत्यापन प्रक्रिया पूरी करना आसान नहीं रह गया है। दस्तावेजों की कमी, परिवार की पुरानी जानकारी उपलब्ध नहीं होना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसके साथ ही बीएलओ के घर-घर नहीं पहुंचने जैसी समस्याओं ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में कई महिलाएं समय पर गणना प्रपत्र भरने को लेकर असमंजस में हैं।
वेबसाइट पर पुराना विवरण निकालना है मुश्किल
महिलाओं का कहना है कि शादी के बाद उनका नाम और पता बदल चुका है। ऐसे में एसआईआर सत्यापन के दौरान जरूरी प्रमाण उपलब्ध कराने में दिक्कत आ रही है। यदि वे ऑनलाइन अपने परिवार का पुराना विवरण निकालना भी चाहें तो यह प्रक्रिया आसान नहीं है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर केवल बूथ संख्या के आधार पर ही साल 2002 की जानकारी मिलती है। वहीं, अधिकांश महिलाओं को अपने पुराने बूथ नंबर की जानकारी नहीं है। इसके कारण अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के पास छोड़कर चले जाते हैं बीएलओ
शहर की कई कॉलोनियों और सोसाइटियों से बीएलओ के घर-घर नहीं पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। सेक्टर-84 स्थित पार्क एलीट सोसाइटी के निवासियों का कहना है कि पांच बीएलओ को सत्यापन का जिम्मा सौंपा गया है। 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक केवल एक-दो बीएलओ ही पहुंचे हैं। अन्य बीएलओ एसआईआर फॉर्म आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के पास छोड़कर चले जाते हैं। इसके बाद लोगों को पहले आरडब्ल्यूए से फॉर्म लेना पड़ता है। कई बार आरडब्ल्यूए पदाधिकारी स्वयं घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने को मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन
एसआईआर फॉर्म भरने की नहीं है जानकारी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि फॉर्म के साथ यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही कि किस कॉलम में क्या भरना है। इसके साथ ही फॉर्म के साथ कौन-कौन से दस्तावेज संलग्न करने होंगे। व्यापक स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं होने से लोग भ्रम की स्थिति में हैं। बीएलओ के घर-घर नहीं पहुंचने का खामियाजा मतदाताओं को भुगतना पड़ रहा है।
एक ही सोसाइटी में कई बीएलओ की तैनाती से हो रही परेशानी
शहरी क्षेत्रों में एक ही सोसाइटी में कई बीएलओ तैनात होने से भी लोगों की परेशानी बढ़ी है। अधिकांश मतदाताओं को पता ही नहीं है कि उनका बीएलओ कौन है और संपर्क किससे किया जाए। कई स्थानों पर बीएलओ घर जाकर सत्यापन करने के बजाय मतदाताओं को बूथ पर बुला रहे हैं। इससे नौकरीपेशा लोगों, बुजुर्ग और महिलाओं को अतिरिक्त परेशानी हो रही है। कुछ लोगों ने यह आशंका भी जताई कि यदि वे समय पर बूथ नहीं पहुंचे तो उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता है।
--
ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से चल रहा है एसआईआर
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार छह विधानसभा क्षेत्रों में पृथला सबसे आगे है, जहां करीब 40 हजार मतदाता फॉर्म जमा कर चुके हैं। फरीदाबाद विधानसभा में 17.34 प्रतिशत (47,863), तिगांव में 16.42 प्रतिशत (65,934), एनआईटी में 15.66 प्रतिशत (53,534), बड़खल में 9.8 प्रतिशत (34,425) और बल्लभगढ़ में 8.22 प्रतिशत (23,508) मतदाता गणना प्रपत्र जमा कर चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान अपेक्षाकृत बेहतर गति से चल रहा है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में अभी भी जागरूकता और घर-घर सत्यापन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बीच सबसे अधिक परेशानी नई विवाहित महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। शादी के बाद ससुराल आई महिलाओं के लिए मतदाता सूची में नाम स्थानांतरित कराना टेढ़ी खीर बन गया है। इसके साथ ही सत्यापन प्रक्रिया पूरी करना आसान नहीं रह गया है। दस्तावेजों की कमी, परिवार की पुरानी जानकारी उपलब्ध नहीं होना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसके साथ ही बीएलओ के घर-घर नहीं पहुंचने जैसी समस्याओं ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में कई महिलाएं समय पर गणना प्रपत्र भरने को लेकर असमंजस में हैं।
वेबसाइट पर पुराना विवरण निकालना है मुश्किल
महिलाओं का कहना है कि शादी के बाद उनका नाम और पता बदल चुका है। ऐसे में एसआईआर सत्यापन के दौरान जरूरी प्रमाण उपलब्ध कराने में दिक्कत आ रही है। यदि वे ऑनलाइन अपने परिवार का पुराना विवरण निकालना भी चाहें तो यह प्रक्रिया आसान नहीं है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर केवल बूथ संख्या के आधार पर ही साल 2002 की जानकारी मिलती है। वहीं, अधिकांश महिलाओं को अपने पुराने बूथ नंबर की जानकारी नहीं है। इसके कारण अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के पास छोड़कर चले जाते हैं बीएलओ
शहर की कई कॉलोनियों और सोसाइटियों से बीएलओ के घर-घर नहीं पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। सेक्टर-84 स्थित पार्क एलीट सोसाइटी के निवासियों का कहना है कि पांच बीएलओ को सत्यापन का जिम्मा सौंपा गया है। 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक केवल एक-दो बीएलओ ही पहुंचे हैं। अन्य बीएलओ एसआईआर फॉर्म आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के पास छोड़कर चले जाते हैं। इसके बाद लोगों को पहले आरडब्ल्यूए से फॉर्म लेना पड़ता है। कई बार आरडब्ल्यूए पदाधिकारी स्वयं घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने को मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन
एसआईआर फॉर्म भरने की नहीं है जानकारी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि फॉर्म के साथ यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही कि किस कॉलम में क्या भरना है। इसके साथ ही फॉर्म के साथ कौन-कौन से दस्तावेज संलग्न करने होंगे। व्यापक स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं होने से लोग भ्रम की स्थिति में हैं। बीएलओ के घर-घर नहीं पहुंचने का खामियाजा मतदाताओं को भुगतना पड़ रहा है।
एक ही सोसाइटी में कई बीएलओ की तैनाती से हो रही परेशानी
शहरी क्षेत्रों में एक ही सोसाइटी में कई बीएलओ तैनात होने से भी लोगों की परेशानी बढ़ी है। अधिकांश मतदाताओं को पता ही नहीं है कि उनका बीएलओ कौन है और संपर्क किससे किया जाए। कई स्थानों पर बीएलओ घर जाकर सत्यापन करने के बजाय मतदाताओं को बूथ पर बुला रहे हैं। इससे नौकरीपेशा लोगों, बुजुर्ग और महिलाओं को अतिरिक्त परेशानी हो रही है। कुछ लोगों ने यह आशंका भी जताई कि यदि वे समय पर बूथ नहीं पहुंचे तो उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से चल रहा है एसआईआर
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार छह विधानसभा क्षेत्रों में पृथला सबसे आगे है, जहां करीब 40 हजार मतदाता फॉर्म जमा कर चुके हैं। फरीदाबाद विधानसभा में 17.34 प्रतिशत (47,863), तिगांव में 16.42 प्रतिशत (65,934), एनआईटी में 15.66 प्रतिशत (53,534), बड़खल में 9.8 प्रतिशत (34,425) और बल्लभगढ़ में 8.22 प्रतिशत (23,508) मतदाता गणना प्रपत्र जमा कर चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान अपेक्षाकृत बेहतर गति से चल रहा है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में अभी भी जागरूकता और घर-घर सत्यापन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।