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Faridabad News: आपातकालीन विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी

Sat, 05 Sep 2026 01:00 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:00 AM IST
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Shortage of specialist doctors in the emergency department.
बीके अस्पताल की इमरजेंसी में रोज पहुंचते हैं करीब 100 मरीज, सुविधाओं के अभाव में किया जाता है रेफर
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भारती दुबे

फरीदाबाद। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बीके नागरिक अस्पताल का आपातकालीन विभाग खुद बदहाल व्यवस्थाओं से जूझ रहा है। सड़क हादसे, हार्ट अटैक, गंभीर चोट और सांस लेने में परेशानी जैसी आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल और बेहतर उपचार की जरूरत होती है, लेकिन अस्पताल की इमरजेंसी में सीमित बेड, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, वेंटिलेटर सुविधा का अभाव है।

गंभीर हालत में आने वाले कई मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दिल्ली या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है। बीके अस्पताल के आपातकालीन विभाग में महज 20 बेड की सुविधा है। इसके बावजूद यहां प्रतिदिन करीब 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों की संख्या के मुकाबले बेड की संख्या काफी कम होने के कारण कई बार मरीजों को सीमित संसाधनों में ही उपचार देना पड़ता है। इमरजेंसी में प्रति शिफ्ट करीब दो नर्स और अन्य स्टाफ की ड्यूटी रहती है। ऐसे में मरीजों की अधिक संख्या के बीच स्टाफ पर भी काम का दबाव बना रहता है।
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वेंटिलेटर और विशेषज्ञ उपचार की सुविधा नहीं



अस्पताल में छह बेड का आईसीयू भी है, लेकिन इसके संचालन के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने की स्थिति में उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। सांस लेने में गंभीर परेशानी के साथ आने वाले मरीजों को भी जरूरत पड़ने पर दिल्ली रेफर किया जाता है। अस्पताल के आईसीयू में कई उपकरण खराब पड़े हैं। ऑक्सीजन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। वहीं, आईसीयू संचालित हैं। लोगों का आरोप है कि सुविधाएं न होने के बावजूद दिखावा करने के लिए आईसीयू में पथरी, मोतियाबिंद व हड्डी रोगी को ऑपरेशन के बाद शिफ्ट कर दिया जाता है। जबकि इन मरीजों को जनरल वार्ड में भी शिफ्ट किया जा सकता है। गंभीर मरीजों के लिए आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने से आईसीयू की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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रोज करीब 10 मरीज किए जाते हैं रेफर



आपातकालीन विभाग में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। इनमें से लगभग 10 मरीजों को गंभीर स्थिति या आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण रेफर किए जाने की बात सामने आई है। सड़क हादसों और गंभीर चोट के मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजने में लगने वाला समय उनकी परेशानी बढ़ा सकता है।



26 में 11 एंबुलेंस फांक रहीं धूल


अस्पताल में पहले करीब 21 एंबुलेंस थीं। कुछ समय पहले पांच नई एंबुलेंस मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 26 हो गई है। हालांकि इनमें से करीब 11 एंबुलेंस धूल फांक रही हैं। बाकी एंबुलेंस को कभी- कभी चलाया जाता है, ताकि एंबुलेंस का इंजन या कोई सामग्री खराब न हो।

एंबुलेंस चालकों के 56 में से 23 पद खाली

बीके अस्पताल में सुबह, शाम और रात को एंबुलेंस चलाने के लिए कुल 56 पद हैं। इसमें केवल 33 चालक ही एंबुलेंस को चला रहे हैं। 23 पद रिक्त पड़े हैं और इसका भुगतान गरीब मरीज कर रहा है। अस्पताल में जब मरीजों को आपात स्थिति में एंबुलेंस की जरूरत होती है, तब यह खड़ी हुई एंबुलेंस कोई मदद नहीं कर पाती। ऐसे में मरीजों को निजी एंबुलेंस सेवा की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी खर्च उठाना पड़ता है।
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रात में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी



आपातकालीन विभाग में सबसे बड़ी समस्या रात के समय सामने आती है। रात में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहने के कारण गंभीर मरीजों के परिजनों को चिंता का सामना करना पड़ता है। विभाग में आने वाले मरीजों को तत्काल विशेषज्ञ परामर्श की आवश्यकता होती है, लेकिन विशेषज्ञों की अनुपलब्धता में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करने की स्थिति बन जाती है।



ऐसे में जिस आपातकालीन विभाग से मरीजों को तत्काल और जीवनरक्षक उपचार मिलने की उम्मीद रहती है, वही विभाग सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेड, विशेषज्ञ डॉक्टर, वेंटिलेटर, आईसीयू, सफाई और एंबुलेंस व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

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सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
आपातकालीन विभाग में उपचार व्यवस्था के साथ सफाई व्यवस्था को लेकर भी मरीज और उनके परिजन परेशान हैं। वार्ड में जगह-जगह गंदगी पड़ी रहने और शौचालयों से दुर्गंध आने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। आपातकालीन विभाग में गंभीर हालत में मरीज पहुंचते हैं, ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था बेहद जरूरी है। लेकिन मौजूदा स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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