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Faridabad News: ओजोन और यूवी किरणों से साफ होगा सीवर का पानी
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क्लोरीनेशन से आगे बढ़ेगा फरीदाबाद, सीवर के पानी से सींचे जाएंगे पार्क
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
स्मार्ट सिटी के सीवर के पानी को उपचारित कर दोबारा उपयोग लायक बनाने के लिए अब पारंपरिक क्लोरीनेशन से आगे बढ़कर स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) उपचारित सीवर के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्लोरीनेशन के बदले आधुनिक ओजोन और यूवी किरण तकनीक का इस्तेमाल करेगा।
एफएमडीए मिर्जापुर में 20 एमएलडी क्षमता का ओजोन आधारित ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना बना रहा है। वहीं, सूरजकुंड में 20 एमएलडी क्षमता का यूवी किरण आधारित प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही प्रतापगढ़, बादशाहपुर और मिर्जापुर के मौजूदा एसटीपी में टर्शियरी ट्रीटमेंट की व्यवस्था विकसित की जाएगी। उपचारित पानी की गुणवत्ता बेहतर होने के बाद इसे पार्कों, ग्रीन बेल्ट और बागवानी जैसे गैर-पेय कार्यों में इस्तेमाल करने की योजना है। गौरतलब है कि प्रतापगढ़, मिर्जापुर और बादशाहपुर के एसटीपी में सीवर के पानी के उपचार के बाद कीटाणुशोधन के लिए क्लोरीनेशन किया जाता है। एफएमडीए ने नगर निगम के बनाए इन तीनों एसटीपी को टेकओवर किया था। इनमें प्रतापगढ़ का 100 एमएलडी, मिर्जापुर का 80 एमएलडी और बादशाहपुर का 45 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी शामिल है। शहर से निकलने वाला सीवर का पानी इन संयंत्रों में पहुंचता है।
अभी एसटीपी में उपचारित पानी को आसपास के नहरों में छोड़ा जा रहा है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खेती-बाड़ी में किया जा रहा है। एफएमडीए अब उपचारित पानी को दोबारा ट्रीट कर उसकी गुणवत्ता और बेहतर करने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत प्रतिदिन करीब 500 किलोलीटर उपचारित पानी को दोबारा साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पानी का इस्तेमाल पार्कों, ग्रीनबेल्ट और बागवानी जैसे गैर-पेय जरूरतों में किया जा सकेगा। इससे उन स्थानों पर पेयजल या भूजल के इस्तेमाल की जरूरत घटेगी, जहां अभी सिंचाई के लिए ताजे पानी पर निर्भरता है।
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भूजल दोहन कम करने पर जोर
फरीदाबाद में भूजल का लगातार दोहन होने और उसके संरक्षण के पर्याप्त उपाय नहीं होने के कारण भूजल स्तर पर दबाव बना हुआ है। जिला डार्क जोन में शामिल है। शहर से रोजाना 350 एमएलडी से अधिक सीवर का पानी निकलता है। ऐसे में एफएमडीए की योजना सीवर के पानी को केवल निस्तारित करने के बजाय उसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की है।
कैसे पानी साफ करती हैं ओजोन और यूवी किरणें
ओजोन और यूवी तकनीक सीवर के पानी को और साफ करने और उसमें मौजूद कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करती हैं। ओजोन को पानी में मिलाने से कई तरह के कीटाणु और हानिकारक तत्व नष्ट होते हैं। इससे पानी की दुर्गंध भी कम होती है। वहीं, यूवी किरणें पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों पर असर डालकर उन्हें निष्क्रिय कर देती हैं। इससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होती है और इसे बागवानी, पार्कों व ग्रीन बेल्ट की सिंचाई जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
वर्जन-
सीवर के पानी को उपचारित कर उसकी गुणवत्ता बेहतर बनाने के बाद बागवानी और ग्रीन बेल्ट की सिंचाई में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए मिर्जापुर में ओजोन आधारित प्लांट और सूरजकुंड में यूवी तकनीक का प्लांट लगाया जाएगा। इससे पेयजल की बचत के साथ भूजल दोहन कम करने में भी मदद मिलेगी। - समुंदर सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
स्मार्ट सिटी के सीवर के पानी को उपचारित कर दोबारा उपयोग लायक बनाने के लिए अब पारंपरिक क्लोरीनेशन से आगे बढ़कर स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) उपचारित सीवर के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्लोरीनेशन के बदले आधुनिक ओजोन और यूवी किरण तकनीक का इस्तेमाल करेगा।
एफएमडीए मिर्जापुर में 20 एमएलडी क्षमता का ओजोन आधारित ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना बना रहा है। वहीं, सूरजकुंड में 20 एमएलडी क्षमता का यूवी किरण आधारित प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही प्रतापगढ़, बादशाहपुर और मिर्जापुर के मौजूदा एसटीपी में टर्शियरी ट्रीटमेंट की व्यवस्था विकसित की जाएगी। उपचारित पानी की गुणवत्ता बेहतर होने के बाद इसे पार्कों, ग्रीन बेल्ट और बागवानी जैसे गैर-पेय कार्यों में इस्तेमाल करने की योजना है। गौरतलब है कि प्रतापगढ़, मिर्जापुर और बादशाहपुर के एसटीपी में सीवर के पानी के उपचार के बाद कीटाणुशोधन के लिए क्लोरीनेशन किया जाता है। एफएमडीए ने नगर निगम के बनाए इन तीनों एसटीपी को टेकओवर किया था। इनमें प्रतापगढ़ का 100 एमएलडी, मिर्जापुर का 80 एमएलडी और बादशाहपुर का 45 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी शामिल है। शहर से निकलने वाला सीवर का पानी इन संयंत्रों में पहुंचता है।
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अभी एसटीपी में उपचारित पानी को आसपास के नहरों में छोड़ा जा रहा है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खेती-बाड़ी में किया जा रहा है। एफएमडीए अब उपचारित पानी को दोबारा ट्रीट कर उसकी गुणवत्ता और बेहतर करने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत प्रतिदिन करीब 500 किलोलीटर उपचारित पानी को दोबारा साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पानी का इस्तेमाल पार्कों, ग्रीनबेल्ट और बागवानी जैसे गैर-पेय जरूरतों में किया जा सकेगा। इससे उन स्थानों पर पेयजल या भूजल के इस्तेमाल की जरूरत घटेगी, जहां अभी सिंचाई के लिए ताजे पानी पर निर्भरता है।
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भूजल दोहन कम करने पर जोर
फरीदाबाद में भूजल का लगातार दोहन होने और उसके संरक्षण के पर्याप्त उपाय नहीं होने के कारण भूजल स्तर पर दबाव बना हुआ है। जिला डार्क जोन में शामिल है। शहर से रोजाना 350 एमएलडी से अधिक सीवर का पानी निकलता है। ऐसे में एफएमडीए की योजना सीवर के पानी को केवल निस्तारित करने के बजाय उसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की है।
कैसे पानी साफ करती हैं ओजोन और यूवी किरणें
ओजोन और यूवी तकनीक सीवर के पानी को और साफ करने और उसमें मौजूद कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करती हैं। ओजोन को पानी में मिलाने से कई तरह के कीटाणु और हानिकारक तत्व नष्ट होते हैं। इससे पानी की दुर्गंध भी कम होती है। वहीं, यूवी किरणें पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों पर असर डालकर उन्हें निष्क्रिय कर देती हैं। इससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होती है और इसे बागवानी, पार्कों व ग्रीन बेल्ट की सिंचाई जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
वर्जन-
सीवर के पानी को उपचारित कर उसकी गुणवत्ता बेहतर बनाने के बाद बागवानी और ग्रीन बेल्ट की सिंचाई में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए मिर्जापुर में ओजोन आधारित प्लांट और सूरजकुंड में यूवी तकनीक का प्लांट लगाया जाएगा। इससे पेयजल की बचत के साथ भूजल दोहन कम करने में भी मदद मिलेगी। - समुंदर सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए