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Faridabad News: स्वीमिंग पूल में गोते खा रहे सुरक्षा के नियम
Wed, 10 Apr 2024 11:47 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
Updated Wed, 10 Apr 2024 11:47 PM IST
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जिले में 50 से अधिक स्थानों पर चल रहे स्वीमिंग पूल, नियमों को ताक पर रखकर हो रहा संचालन
- जिला खेल विभाग ने एक भी स्वीमिंग पूल को डेढ़ वर्ष में नहीं दिया अनापत्ति प्रमाण पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में नियमों को दरकिनार कर स्वीमिंग पूल संचालक लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आरोप है कि यहां सुरक्षा नियमों के अनुसार न तो लाइफ गार्ड है और नहीं सुरक्षा के माकूल इंतजाम। खेल विभाग की बगैर स्वीकृति के ही स्वीमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में एक भी स्वीमिंग पूल ने अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया है, जबकि प्रत्येक वर्ष इनके नवीनीकरण की स्वीकृति लेनी पड़ती है। यह तब है कि जब जिले में प्रत्येक वर्ष स्वीमिंग पूल में किसी न किसी की जान चली जाती है। घटनाओं के बाद भी जिला प्रशासन संचालकों के खिलाफ सख्त नहीं है।
जिले में अप्रैल से अगस्त तक स्वीमिंग पूल संचालित किए जाते हैं। प्रत्येक वर्ष स्वीमिंग पूल शुरू करने से पहले पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, अग्निशमन विभाग, खेल विभाग सहित कई जगहों से अनापत्ति प्रमाण लेना पड़ता है। जिले में क्लब, होटल, स्कूल, सोसाइटियों में करीब 50 से अधिक स्वीमिंग पूल हैं। खेल विभाग के अधिकारी का कहना है अभी तक एक भी स्वीमिंग पूल संचालक की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं किया गया है। कुछ पूल संचालकों को छोड़कर किसी भी संचालक की ओर से नियमों का पालन नहीं किया जाता है।
गर्मी से छुटकारा पाने के लिए लोग यहां घंटों समय बिताते हैं। ग्रेटर फरीदाबाद की विभिन्न सोसायटी, निजी स्कूल और कई अन्य जगहों पर अवैध तरीके से पूल का संचालन किया जा रहा है। जिला स्वीमिंग संघ के महासचिव एके पंडित का भी मानना है कि कुछ ही पूल संचालक नियमों का पालन करते हैं। स्वीमिंग पूल संचालक तय मानकों को भी पूरा नहीं करते हैं। पूल में न तो लाइफ गार्ड होते हैं और न ही पानी के क्लोरिनेशन, चिकित्सक के नाम पर कोई होता है।
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कई लोगों की हो चुकी है मौत
पिछले तीन वर्षों में नहाने के दौरान स्वीमिंग पूल में पांच से छह लोगों की मौत भी हो चुकी है। गत वर्ष ग्रेटर फरीदाबाद स्थित हरि विहार, बुढैना, बड़खल में स्वीमिंग के दौरान युवाओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले सेक्टर-12 स्थित स्वीमिंग पूल में भी एक बुजुर्ग की मौत हुई थी। इन हादसों के बाद भी जिला प्रशासन ने पूल संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया। आज भी जिले के लगभग सभी पूल सुरक्षा नियमों को नजर अंदाज कर रहे हैं।
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वर्जन
स्वीमिंग पूल संचालन के लिए खेल विभाग की ओर से इस वर्ष एक भी अनापत्ति प्रमाण जारी नहीं किया गया है। आवेदन के आधार पर विभाग के कोच लाइफ गार्ड और अन्य कुछ सुरक्षा नियमों का निरीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी करते हैं। इसी प्रकार कुछ अन्य विभाग के भी अधिकारी पूल का निरीक्षण करते हैं। सबकुछ ठीक होने के बाद ही पूल का संचालन किया जा सकता है।
- देवेंद्र सिंह गुलिया, जिला खेल अधिकारी
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यह हैं नियम
स्विमिग पूल संचालक को प्रशिक्षित लाइफ गार्ड रखना होगा, स्वीमिंग पूल में चेंजिंग रूम, बड़े अस्पताल के चिकित्सक व नर्स पैनल पर होने चाहिए, आक्सीजन सिलिंडर, पूल की गहराई, प्रशिक्षित कोच, पानी में क्लोरीन की मात्रा, सुरक्षाकर्मी, स्वीमिंग पूल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का रजिस्टर में पंजीकरण, जीवन रक्षक उपकरण सहित कई आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी।
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- जिला खेल विभाग ने एक भी स्वीमिंग पूल को डेढ़ वर्ष में नहीं दिया अनापत्ति प्रमाण पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में नियमों को दरकिनार कर स्वीमिंग पूल संचालक लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आरोप है कि यहां सुरक्षा नियमों के अनुसार न तो लाइफ गार्ड है और नहीं सुरक्षा के माकूल इंतजाम। खेल विभाग की बगैर स्वीकृति के ही स्वीमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में एक भी स्वीमिंग पूल ने अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया है, जबकि प्रत्येक वर्ष इनके नवीनीकरण की स्वीकृति लेनी पड़ती है। यह तब है कि जब जिले में प्रत्येक वर्ष स्वीमिंग पूल में किसी न किसी की जान चली जाती है। घटनाओं के बाद भी जिला प्रशासन संचालकों के खिलाफ सख्त नहीं है।
जिले में अप्रैल से अगस्त तक स्वीमिंग पूल संचालित किए जाते हैं। प्रत्येक वर्ष स्वीमिंग पूल शुरू करने से पहले पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, अग्निशमन विभाग, खेल विभाग सहित कई जगहों से अनापत्ति प्रमाण लेना पड़ता है। जिले में क्लब, होटल, स्कूल, सोसाइटियों में करीब 50 से अधिक स्वीमिंग पूल हैं। खेल विभाग के अधिकारी का कहना है अभी तक एक भी स्वीमिंग पूल संचालक की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं किया गया है। कुछ पूल संचालकों को छोड़कर किसी भी संचालक की ओर से नियमों का पालन नहीं किया जाता है।
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गर्मी से छुटकारा पाने के लिए लोग यहां घंटों समय बिताते हैं। ग्रेटर फरीदाबाद की विभिन्न सोसायटी, निजी स्कूल और कई अन्य जगहों पर अवैध तरीके से पूल का संचालन किया जा रहा है। जिला स्वीमिंग संघ के महासचिव एके पंडित का भी मानना है कि कुछ ही पूल संचालक नियमों का पालन करते हैं। स्वीमिंग पूल संचालक तय मानकों को भी पूरा नहीं करते हैं। पूल में न तो लाइफ गार्ड होते हैं और न ही पानी के क्लोरिनेशन, चिकित्सक के नाम पर कोई होता है।
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कई लोगों की हो चुकी है मौत
पिछले तीन वर्षों में नहाने के दौरान स्वीमिंग पूल में पांच से छह लोगों की मौत भी हो चुकी है। गत वर्ष ग्रेटर फरीदाबाद स्थित हरि विहार, बुढैना, बड़खल में स्वीमिंग के दौरान युवाओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले सेक्टर-12 स्थित स्वीमिंग पूल में भी एक बुजुर्ग की मौत हुई थी। इन हादसों के बाद भी जिला प्रशासन ने पूल संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया। आज भी जिले के लगभग सभी पूल सुरक्षा नियमों को नजर अंदाज कर रहे हैं।
वर्जन
स्वीमिंग पूल संचालन के लिए खेल विभाग की ओर से इस वर्ष एक भी अनापत्ति प्रमाण जारी नहीं किया गया है। आवेदन के आधार पर विभाग के कोच लाइफ गार्ड और अन्य कुछ सुरक्षा नियमों का निरीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी करते हैं। इसी प्रकार कुछ अन्य विभाग के भी अधिकारी पूल का निरीक्षण करते हैं। सबकुछ ठीक होने के बाद ही पूल का संचालन किया जा सकता है।
- देवेंद्र सिंह गुलिया, जिला खेल अधिकारी
यह हैं नियम
स्विमिग पूल संचालक को प्रशिक्षित लाइफ गार्ड रखना होगा, स्वीमिंग पूल में चेंजिंग रूम, बड़े अस्पताल के चिकित्सक व नर्स पैनल पर होने चाहिए, आक्सीजन सिलिंडर, पूल की गहराई, प्रशिक्षित कोच, पानी में क्लोरीन की मात्रा, सुरक्षाकर्मी, स्वीमिंग पूल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का रजिस्टर में पंजीकरण, जीवन रक्षक उपकरण सहित कई आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी।