अशुभ संकेत: सूरजकुंड मेले पर पड़ सकता है रूस-यूक्रेन युद्ध का असर, 20 मार्च से होना है शुरू
सूरजकुंड मेला में इस बार कंट्री पार्टनर ब्रिटेन के साथ अजरबेजान, यूक्रेन, आर्मीनिया, क्यूबा, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस आदि देशों के आने की संभावना है। ये देश परोक्ष रूप से तनाव ग्रस्त दोनों देशों में से किसी एक का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में मेले में इनके सैलानियों की संख्या कम रहने की संभावना है।
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सूरजकुंड में आयोजित होने वाले 35 हस्तशिल्प मेले पर भी रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पड़ सकता है। संभावना जताई जा रही है कि इससे विदेशी सैलानियों की संख्या कम हो सकती है। साथ ही हस्तशिल्प कलाकारों की संख्या भी कम होने की संभावना है। इससे मेला प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है।
दरअसल, सूरजकुंड मेला 20 मार्च से चार अप्रैल तक लगने जा रहा है। इसमें देशी-विदेशी हस्तशिल्प कलाकार भाग लेंगे। मेला प्रबंधन को अनुमान है कि इस बार 30 से अधिक देश इसमें भाग लेंगे। ब्रिटेन को कंट्री पार्टनर भी बनाया गया है। लेकिन जानकारों की मानें तो जिस तरह से रूस और यूक्रेन में तनाव है, इससे पूरा विश्व चिंतित है। हालांकि जानकारों का यह भी कहना है कि 20 मार्च तक स्थिति तो सामान्य हो सकती है, लेकिन इससे आर्थिक मंदी का दौर बढ़ सकता है, जो मेला के लिए शुभ संकेत नहीं होंगे।
इन देशों के आने की है संभावना
जानकारी के अनुसार सूरजकुंड मेला में इस बार कंट्री पार्टनर ब्रिटेन के साथ अजरबेजान, यूक्रेन, आर्मीनिया, क्यूबा, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस आदि देशों के आने की संभावना है। ये देश परोक्ष रूप से तनाव ग्रस्त दोनों देशों में से किसी एक का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में मेले में इनके सैलानियों की संख्या कम रहने की संभावना है।
शनिवार या रविवार को आ सकते हैं अधिकारी
सूरजकुंड मेला के नोडल अधिकारी राजेश जून ने बताया कि मेला की तैयारियों का जायजा लेने शनिवार या रविवार को थीम स्टेट जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग के अधिकारी पहुंच सकते हैं। उनके साथ हरियाणा पर्यटन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। सभी मेला की तैयारियों का जायजा लेंगे। साथ ही आगे की रणनीति बनाएंगे। हालांकि राजेश जून ने यह भी बताया कि मेले को लेकर तैयारी जोरों पर है। लगभग सारे कार्य पूरे कर लिए गए हैं।