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Faridabad News: तेल और साबुन की बढ़ती कीमतें बिगाड़ रहीं बजट
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ग्राहकों को समझाना दुकानदारों को पड़ रहा है भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। रोजमर्रा की चीजों के महंगा होने से लोगों के घरों का बजट बिगड़ गया है। साथ ही व्यापारी भी इससे परेशान हैं। घर में खाना बनाने से लेकर कपड़ा धोना तक महंगा हो गया है। तेल से लेकर सर्फ की कीमतों पर 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। सरसों का तेल जहां 20 से 30 रुपये तक महंगा हो गया है, वहीं सर्फ की कीमत 10 रुपये प्रति किग्रा तक बढ़ गई है। नमकीन भी 10 रुपये प्रति किग्रा महंगी हो गई है। लगातार बढ़ रही महंगाई से लोगों को संतुलन बैठाना मुश्किल हो रहा है। साथ ही दुकानदारों को भी ग्राहकों को समझाना पड़ रहा है।
ईरान और अमेरिका-इस्राइल युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति बाधित है। इस कारण तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं खाद्य तेलों की घरेलू आपूर्ति भी कम हो गई है। इस कारण खाद्य तेल महंगे हो गए है। ब्रांडेड सरसों के तेल की खुदरा कीमत 180 रुपये से 210 रुपये तक पहुंच गई है। जो कि पहले से 20 से 30 रुपये अधिक है। एनआईटी-5 पांच के किराना व्यापारी धीरज जुनेजा ने बताया कि नमकीन की कीमत 10 रुपये प्रति किग्रा बढ़ी है।
वहीं सर्फ व साबुन की कीमतों में 15 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। उनका कहना है कि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में वृद्धि से भाड़े पर भी असर नहीं पड़ा है और वस्तुएं भी महंगी हुई हैं। इससे हमें ही नुकसान झेलना पड़ा रहा है। मुनाफा उतना ही है, पर लागत बढ़ गई और भाड़ा भी अधिक देना पड़ रहा है। ग्राहक भी गैर जरूरत वाली चीजों को खरीदने से बच रहे हैं या कम मात्रा में खरीद रहे हैं।
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दुकानदार सुंदर ने बताया कि एक नामी कंपनी के एक किग्रा तेल की कीमत पहले 154 रुपये थी, जो अब 180 पहुंच गई है। वहीं नमकीन का 50 किग्रा का पैकेट 3900 की जगह 4200 रुपये का मिल रहा है। चीनी भी महंगी हुई है। 50 किग्रा की बोरी 2200 रुपये की जगह 2280 रुपये तक पहुंच गई है।
व्यापारियों का कहना है कि वैश्विक तनाव, कमजोर रुपया और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से चीजें महंगी हो रही है। कंपनियां बढ़ती लागत का हवाला देकर कीमतें बढ़ रही है या पैकेट का वजन कम कर रही है। तेल की कीमत बढ़ने का कारण आयात प्रभावित होना है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। रोजमर्रा की चीजों के महंगा होने से लोगों के घरों का बजट बिगड़ गया है। साथ ही व्यापारी भी इससे परेशान हैं। घर में खाना बनाने से लेकर कपड़ा धोना तक महंगा हो गया है। तेल से लेकर सर्फ की कीमतों पर 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। सरसों का तेल जहां 20 से 30 रुपये तक महंगा हो गया है, वहीं सर्फ की कीमत 10 रुपये प्रति किग्रा तक बढ़ गई है। नमकीन भी 10 रुपये प्रति किग्रा महंगी हो गई है। लगातार बढ़ रही महंगाई से लोगों को संतुलन बैठाना मुश्किल हो रहा है। साथ ही दुकानदारों को भी ग्राहकों को समझाना पड़ रहा है।
ईरान और अमेरिका-इस्राइल युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति बाधित है। इस कारण तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं खाद्य तेलों की घरेलू आपूर्ति भी कम हो गई है। इस कारण खाद्य तेल महंगे हो गए है। ब्रांडेड सरसों के तेल की खुदरा कीमत 180 रुपये से 210 रुपये तक पहुंच गई है। जो कि पहले से 20 से 30 रुपये अधिक है। एनआईटी-5 पांच के किराना व्यापारी धीरज जुनेजा ने बताया कि नमकीन की कीमत 10 रुपये प्रति किग्रा बढ़ी है।
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वहीं सर्फ व साबुन की कीमतों में 15 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। उनका कहना है कि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में वृद्धि से भाड़े पर भी असर नहीं पड़ा है और वस्तुएं भी महंगी हुई हैं। इससे हमें ही नुकसान झेलना पड़ा रहा है। मुनाफा उतना ही है, पर लागत बढ़ गई और भाड़ा भी अधिक देना पड़ रहा है। ग्राहक भी गैर जरूरत वाली चीजों को खरीदने से बच रहे हैं या कम मात्रा में खरीद रहे हैं।
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दुकानदार सुंदर ने बताया कि एक नामी कंपनी के एक किग्रा तेल की कीमत पहले 154 रुपये थी, जो अब 180 पहुंच गई है। वहीं नमकीन का 50 किग्रा का पैकेट 3900 की जगह 4200 रुपये का मिल रहा है। चीनी भी महंगी हुई है। 50 किग्रा की बोरी 2200 रुपये की जगह 2280 रुपये तक पहुंच गई है।
व्यापारियों का कहना है कि वैश्विक तनाव, कमजोर रुपया और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से चीजें महंगी हो रही है। कंपनियां बढ़ती लागत का हवाला देकर कीमतें बढ़ रही है या पैकेट का वजन कम कर रही है। तेल की कीमत बढ़ने का कारण आयात प्रभावित होना है।