{"_id":"6ae37f5006aadcacdd0e2fcc","slug":"returning-home-for-diwali-becomes-expensive-private-bus-fares-surge-up-to-three-times-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-84079-2026-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: दिवाली पर घर लौटना महंगा, निजी बसों के किराये में तीन गुना तक उछाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: दिवाली पर घर लौटना महंगा, निजी बसों के किराये में तीन गुना तक उछाल
विज्ञापन
सामान्य दिनों में 700 से 900 रुपये का टिकट 3600 से 4000 रुपये तक पहुंचा
निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। दिवाली और छठ पर्व पर घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए इस बार सफर महंगा हो गया है। त्योहार नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली निजी बसों के किराये में तीन गुना तक उछाल आ गया है। सामान्य दिनों में 700 से 900 रुपये में मिलने वाला टिकट अब 3600 से 4000 रुपये तक पहुंच गया है। किराये में भारी अंतर के बावजूद त्योहार पर परिवार के साथ पहुंचने की चाह लोगों को महंगे टिकट खरीदने के लिए मजबूर कर रही है। वहीं, यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच सीटों की कमी भी परेशानी बढ़ा रही है। स्थिति यह है कि कुछ बसों में एक सीट पर दो यात्रियों को बिठाकर ले जाया जा रहा है। यात्रियों के लिए अधिक किराया देने के बाद भी आरामदायक यात्रा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। लंबी दूरी के मार्गों पर ऐसी स्थिति में सफर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
त्योहार पर घर जाने के लिए पहले से बजट बनाते हैं, लेकिन अचानक किराया बढ़ने से पूरा हिसाब बिगड़ जाता है।
- सनी, यात्री
परिवार के साथ जाना है, ऐसे में हर सदस्य का टिकट महंगा मिलने से यात्रा का खर्च कई गुना बढ़ गया है।
- भुवन, यात्री
लंबी दूरी का सफर है, इसलिए सीट मिलना जरूरी है। ज्यादा पैसे देने के बाद भी ठीक से बैठने की जगह नहीं मिलती।
- चिराग, यात्री
छुट्टी सीमित होती है, इसलिए त्योहार पर घर जाना टाल नहीं सकते। निजी बसों के महंगे किराये का असर सीधे जेब पर पड़ता है।
- संदीप, यात्री
विज्ञापन
निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। दिवाली और छठ पर्व पर घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए इस बार सफर महंगा हो गया है। त्योहार नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली निजी बसों के किराये में तीन गुना तक उछाल आ गया है। सामान्य दिनों में 700 से 900 रुपये में मिलने वाला टिकट अब 3600 से 4000 रुपये तक पहुंच गया है। किराये में भारी अंतर के बावजूद त्योहार पर परिवार के साथ पहुंचने की चाह लोगों को महंगे टिकट खरीदने के लिए मजबूर कर रही है। वहीं, यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच सीटों की कमी भी परेशानी बढ़ा रही है। स्थिति यह है कि कुछ बसों में एक सीट पर दो यात्रियों को बिठाकर ले जाया जा रहा है। यात्रियों के लिए अधिक किराया देने के बाद भी आरामदायक यात्रा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। लंबी दूरी के मार्गों पर ऐसी स्थिति में सफर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
त्योहार पर घर जाने के लिए पहले से बजट बनाते हैं, लेकिन अचानक किराया बढ़ने से पूरा हिसाब बिगड़ जाता है।
- सनी, यात्री
परिवार के साथ जाना है, ऐसे में हर सदस्य का टिकट महंगा मिलने से यात्रा का खर्च कई गुना बढ़ गया है।
- भुवन, यात्री
लंबी दूरी का सफर है, इसलिए सीट मिलना जरूरी है। ज्यादा पैसे देने के बाद भी ठीक से बैठने की जगह नहीं मिलती।
- चिराग, यात्री
छुट्टी सीमित होती है, इसलिए त्योहार पर घर जाना टाल नहीं सकते। निजी बसों के महंगे किराये का असर सीधे जेब पर पड़ता है।
- संदीप, यात्री