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Faridabad News: जर्जर सीवरेज लाइनों का बिना खुदाई कायाकल्प, 50 साल तक टिकाऊ रहने का दावा

Tue, 10 Mar 2026 11:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 11:39 PM IST
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Rejuvenation of dilapidated sewerage lines without digging, claims to last for 50 years
पहली बार लागू होगी ट्रेंचलेस सीआईपीपी तकनीक
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अब सीवर लाइन डालने व रिपेयरिंग के नाम पर जगह-जगह नहीं खोदी जाएंगी सड़कें
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के सेक्टर-45 और आसपास के हजारों निवासियों को जल्द ही सीवरेज जाम और ओवरफ्लो की पुरानी समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम ने इलाके की जर्जर भूमिगत सीवरेज लाइनों के पुनर्वास के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक का बजट जारी किया है।
इस परियोजना में पहली बार क्योर्ड-इन-प्लेस पाइप (सीआईपीपी) नामक आधुनिक ट्रेंचलेस तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे सड़कों को खोदे बिना पाइपों को भीतर से नया बनाया जाएगा। निगम के मुताबिक इस तकनीक से तैयार लाइन कम से कम 50 वर्षों तक टिकाऊ रहेगी। सेक्टर-45 और वार्ड नंबर-20 के कई हिस्सों में पिछले कई वर्षों से सीवरेज लाइनें जर्जर हालत में हैं। बरसात के दिनों में नालियों और सीवर का पानी सड़कों पर आ जाता है, जिससे दुर्गंध और जलभराव की समस्या आम हो जाती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार कई बार शिकायतों के बावजूद केवल अस्थायी मरम्मत होती रही लेकिन मूल समस्या जस की तस बनी रही।
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नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग की रिपोर्ट में भी माना गया कि मौजूदा पाइपलाइनें कई स्थानों पर कमजोर और क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसी कारण सीवरेज का प्रवाह बाधित होता है और कई जगह पाइप धंसने का खतरा भी बना रहता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए निगम ने पूरे नेटवर्क के बदलने का निर्णय लिया है।
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छह महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य

नगर निगम के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 2 करोड़ से अधिक तय की गई है। एजेंसी को 6 महीने 10 दिन के भीतर पूरा काम समाप्त करना होगा। यदि प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो अप्रैल के आसपास काम शुरू होकर अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक खुदाई की बजाय सीआईपीपी तकनीक का इस्तेमाल होगा। सामान्य तौर पर नई सीवरेज लाइन डालने के लिए सड़कें कई दिनों तक खोदनी पड़ती हैं, जिससे यातायात और स्थानीय जीवन प्रभावित होता है। सीआईपीपी तकनीक में मौजूदा पाइपलाइन के अंदर एक विशेष राल (रेजिन) से तैयार लाइनर डाला जाता है। यह लाइनर पाइप के भीतर ही जमकर कठोर नई परत बना देता है और पूरी पाइपलाइन मजबूत हो जाती है। इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर खुदाई की जरूरत नहीं पड़ती और काम अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो जाता है। इंजीनियरों के अनुसार यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहां सड़कें चौड़ी नहीं हैं या बार-बार खुदाई से यातायात प्रभावित होता है।



नगर निगम ने इस परियोजना में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्तें रखी हैं। निगम के अनुसार एजेंसी को यह लिखित प्रमाण देना होगा कि लगाए गए लाइनर की डिजाइन कम से कम 50 वर्षों तक सामान्य लोडिंग परिस्थितियों में सुरक्षित रहेगी। इसका अर्थ है कि भविष्य में बार-बार पाइपलाइन बदलने या मरम्मत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरे इलाके की सीवरेज व्यवस्था दीर्घकालिक रूप से स्थिर रहेगी।


अगर कहीं खुदाई हुई तो होगा तकनीक का इस्तेमाल

इसके अलावा खुदाई या सड़क काटने की स्थिति में कॉल बिफोर यू डिग (सिब्यूडी) एप का उपयोग अनिवार्य किया गया है ताकि गैस पाइपलाइन, बिजली केबल या अन्य भूमिगत सेवाओं को नुकसान न पहुंचे। इस परियोजना से सेक्टर-45 और आसपास की कॉलोनियों में रहने वाली बड़ी आबादी को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सीवरेज व्यवस्था से न केवल जलभराव और दुर्गंध की समस्या कम होगी, बल्कि क्षेत्र में स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम भी घटेंगे। शहरी योजनाकारों के अनुसार मजबूत सीवरेज नेटवर्क किसी भी शहर के बुनियादी ढांचे की रीढ़ होता है। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में शहर के अन्य पुराने सेक्टरों में भी इसी तकनीक से सीवरेज लाइनों का पुनर्वास किया जा सकता है।
वर्जन


लोगों की सुविधा के लिए निगम हर स्तर पर काम कर रहा है। जल्द लोगों को इस परियोजना का लाभ भी मिलना शुरू हो जाएगा। -धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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