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Faridabad News: गांव को बचाने के लिए महापंचायत में आवाज की बुलंद

Mon, 14 Jul 2025 12:59 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jul 2025 12:59 AM IST
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Raised voice in Mahapanchayat to save the village
10 हजार लोगों ने महापंचायत में भाग लेकर अनंगपुर का किया समर्थन, पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा, किसान नेता राकेश टिकैत हुए शामिल
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पूरे देश से गुर्जर समाज के लोगों के साथ किसान नेता व अन्य जातियों के लोग रहे मौजूद
किन्नर समाज ने भी अनंगपुर का साथ देने का जताया भरोसा
महापंचायत में सरकार के खिलाफ दिखी नाराजगी
यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली व हरियाणा के दूसरे जिलों से पहुंचे लोग

अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। अनंगपुर गांव में प्रशासन की तरफ से की जा रही तोड़फोड़ के विरोध में 36 बिरादरी की महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें कांग्रेस, सपा, आप व भीम आर्मी , किसान यूनियन के नेता व समाज के अन्य लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने गांव को बचाने के लिए अपनी आवाज बुलंद की और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।
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अनंगपुर संघर्ष कमेटी व कांग्रेस नेता विजय प्रताप के नेतृत्व में रविवार को महापंचायत का आयोजन किया गया। राधा स्वामी आश्रम के सामने खाली पड़े मैदान में आयोजित महापंचायत में करीब 10 हजार लोगों ने भाग लिया। इसमें मुख्य रूप से गुर्जर समाज के लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर अनंगपुर गांव के समर्थन में कांग्रेस नेता व सांसद दीपेंद्र हुड्डा, पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, सपा नेता मुखिया गुर्जर, नूंह विधायक आफताब अहमद, पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना, पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता करण दलाल, यूपी के कैराना से सांसद इकरा हसन, पूर्व मंत्री गीता भुक्कल , सरधना विधायक अतुल प्रधान, पूर्व विधायक नीरज शर्मा, गुर्जर नेता विजय बैंसला, आप नेता सौरभ भारद्वाज व रविन्द्र भाटी के साथ अन्य कई विधायक व नेता मौजूद रहे।
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महापंचायत में जहां कांग्रेस के साथ सपा व आप के नेता शामिल थे वहीं किसान नेताओं ने भी महापंचायत का जमकर समर्थन किया। किसान नेता बलराज, गुरनाम सिंह चढूनी व राकेश टिकैत ने अनंगपुर गांव के लोगों को लोकसभा, विधानसभा व कोर्ट के साथ जमीनी स्तर पर अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।


कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी पर जमकर बोला हमला
महापंचायत में कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हमारे 37 विधायकों के साथ सभी सांसद आपके लिए हमेशा तैयार हैं बस आप अपनी आवाज को बुलंद कीजिए। वहीं विजय प्रताप ने बीजेपी सरकार पर गांव के साथ दोहरा व्यवहार करने का आरोप लगाया। नूंह विधायक ने बीजेपी को गरीब विरोधी बताया।


गांव अवैध तो पुलिस चौकी व थाना कैसे वैध
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने महापंचायत के दौरान कहा कि जब मैं यहां पर आ रहा था तो रास्ते में देख रहा था कि रोड पर पड़ने वाले कई फार्म हाउस को तोड़ दिया गया है, वहीं उसी लाइन में पुलिस चौकी भी बनी है इसके साथ कुछ दूरी पर थाना भी बना है। यह जमीन अवैध है तो चौकी थाने वैध कैसे हैं।

धरने से नहीं मानेगी सरकार जमीनी पर लेट जाओ
किसान नेता राकेश टिकैत ने महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि ये सरकार ऐसे मानने वाली नहीं है। हम लोगों ने 13 महीने धरना दिया था लेकिन नहीं मानी थी। अपनी बात मनवाने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ेगी। सभी समाज के लोग आपके साथ हैं।


किन्नर समाज ने भी अनंगपुर का साथ देने का जताया भरोसा
राष्ट्रीय महिला एकता मंच की व्यवस्थापक व किन्नर समाज की नेता रिया किन्नर ने भी अनंगपुर गांव को बचाने के लिए ग्रामीणों के समर्थन में आगे आने की बात कही। उनकी तरफ से राष्ट्रपति को भी ज्ञापन सौंपा गया है।


सरकार पर लगाया पक्ष ठीक से न रखने का आरोप
महापंचायत में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अरावली से जुड़े क्षेत्र का मामला ठीक से पेश नहीं किया गया। इसका खामियाजा गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार को अपनी भूल का सुधार करके गांवों के बचाव के लिए कानून बनाना चाहिए।

गुर्जर नेता ने दिखाया कांग्रेस को आइना
महापंचायत में अधिकतर नेताओं ने सरकार पर जमकर हमला बोला व अपनी पार्टी- संगठन की तरफ से लोगों का समर्थन करने की बात कही। वहीं जयपुर से आए गुर्जर नेता विजय बैंसला ने कहा कि राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार ने इसी तरह एक गांव को हटाया था। इसलिए केवल एक पार्टी को कोसने से काम नहीं चलेगा हम लोगों को व्यवस्था में बदलाव करने की जरूरत है। जहां भी कई सालों से जंगलों में लोग रह रहे हैं उन्हें वहां रहने का अधिकार मिलना चाहिए।

महापंचायत ने सरकार को दिया 30 दिन का अल्टीमेटम

महापंचायत में 360 पाल के अध्यक्ष सुरेंद्र सोलंकी और 56 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार ने महापंचायत का फैसला सुनाते हुए सरकार को तुरंत तोड़-फोड़ रोकने, टूटे हुए निर्माणों का मुआवजा देने व 45 सौ एकड़ की जमीन में से 2 हजार एकड़ जमीन फॉरेस्ट में लेने व 25 सौ एकड़ जमीन गांव वालों के लिए छोड़ने की बात कही। महापंचायत ने फैसला सुनाया कि सरकार कानून में संशोधन करें और तुरंत प्रभाव से अध्यादेश लाए, अगर 30 दिन के अंदर ये सभी मांगे नहीं मानी तो संघर्ष समिति कठोर फैसला लेगी।
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