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जान जोखिम में डालकर नौनिहाल स्कूल जाने को मजबूर
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फरीदाबाद। गाजियाबाद में एक निजी स्कूल के बस में हुए हादसे में एक बच्चे की मौत के बाद स्मार्ट सिटी में भी नौनिहाल जानजोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई स्कूलों की ओर से बस सुविधा उपलब्ध नहीं होने छात्रों को वैन से जाना पड़ता है। वैन संचालक क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाकर ले जाते हैं। वहीं, कुछ निजी स्कूलों चालकों की सुरक्षा को लेकर हिदायत दी है।
शहर के कुछ निजी स्कूल बसों के चालकों ने गाजियाबाद (यूपी) में हुए हादसे से सीख नहीं ली। बृहस्पतिवार दोपहर में स्कूल की छुट्टी के बाद सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया। स्कूल बस की खिड़कियां खुली हुई थी और बच्चे हाथ निकालकर बैठे थे। इससे हादसा होने का खतरा बना रहा। वैन संचालक भी इसे लेकर गंभीर नहीं दिखे। कई स्कूल बच्चों को बस सेवा उपलब्ध नहीं करते या रूट पर बस नहीं चलती। ऐसे में अभिभावक वैन से बच्चों को स्कूल भेजते हैं। वैन में भी बच्चों के साथ लापरवाही दिखी। एनआईटी पांच, सेक्टर सात, नहर पार कई स्कूलों में निजी वैन संचालक धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाकर बच्चों को ले जा रहे हैं। वैन में जहां आठ से 10 लोगों की बैठने की क्षमता होती है, इनमें 20 से 25 बच्चे बैठे हुए थे। पूछने पर उनका कहना था कि जब अभिभावकों को कोई आपत्ति नहीं है, तो आप क्यूं सवाल उठा रहे हो।
बस चालक को दिया निर्देश
सेक्टर-15 ए स्थित एक निजी स्कूल में बस संचालकों की सुबह बैठक हुई। इस दौरान उन्हें फस्ट एड, सीसीटीवी कैमरा, बस शुरू करने से पहले प्रत्येक खिड़की और दरवाजे सहित सभी चीजों को सही तरीके से चालक और सह संचालक को दिशा निर्देश दिया गया है। एक अन्य निजी स्कूल के बस प्रभारी ने बताया कि कर्मचारी की प्रत्येक बच्चों पर नजर होती है, जिससे की किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हो।
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बस चालक को सुरक्षा के नियमों को पालन करने का आदेश दिया गया है। प्रत्येक बस पर नजर रखी जाती है। अगर वह नियम तोड़ते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होती है।
दीपक भारती, विद्या मंदिर स्कूल
स्कूल सुरक्षा पॉलिसी के तहत स्कूली बसों की जांच की जाती है। यदि कोई स्कूल नियमों की अनदेखी करेगा तो कार्रवाई की जाएगी।
रितु चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी
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शहर के कुछ निजी स्कूल बसों के चालकों ने गाजियाबाद (यूपी) में हुए हादसे से सीख नहीं ली। बृहस्पतिवार दोपहर में स्कूल की छुट्टी के बाद सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया। स्कूल बस की खिड़कियां खुली हुई थी और बच्चे हाथ निकालकर बैठे थे। इससे हादसा होने का खतरा बना रहा। वैन संचालक भी इसे लेकर गंभीर नहीं दिखे। कई स्कूल बच्चों को बस सेवा उपलब्ध नहीं करते या रूट पर बस नहीं चलती। ऐसे में अभिभावक वैन से बच्चों को स्कूल भेजते हैं। वैन में भी बच्चों के साथ लापरवाही दिखी। एनआईटी पांच, सेक्टर सात, नहर पार कई स्कूलों में निजी वैन संचालक धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाकर बच्चों को ले जा रहे हैं। वैन में जहां आठ से 10 लोगों की बैठने की क्षमता होती है, इनमें 20 से 25 बच्चे बैठे हुए थे। पूछने पर उनका कहना था कि जब अभिभावकों को कोई आपत्ति नहीं है, तो आप क्यूं सवाल उठा रहे हो।
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बस चालक को दिया निर्देश
सेक्टर-15 ए स्थित एक निजी स्कूल में बस संचालकों की सुबह बैठक हुई। इस दौरान उन्हें फस्ट एड, सीसीटीवी कैमरा, बस शुरू करने से पहले प्रत्येक खिड़की और दरवाजे सहित सभी चीजों को सही तरीके से चालक और सह संचालक को दिशा निर्देश दिया गया है। एक अन्य निजी स्कूल के बस प्रभारी ने बताया कि कर्मचारी की प्रत्येक बच्चों पर नजर होती है, जिससे की किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हो।
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बस चालक को सुरक्षा के नियमों को पालन करने का आदेश दिया गया है। प्रत्येक बस पर नजर रखी जाती है। अगर वह नियम तोड़ते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होती है।
दीपक भारती, विद्या मंदिर स्कूल
स्कूल सुरक्षा पॉलिसी के तहत स्कूली बसों की जांच की जाती है। यदि कोई स्कूल नियमों की अनदेखी करेगा तो कार्रवाई की जाएगी।
रितु चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी