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Faridabad News: अभ्यर्थियों के दस्तावेज का सत्यापन नहीं कर रहे निजी स्कूल
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आरटीई के तहत दाखिले में निजी विद्यालयों कर रहे मनमानी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आरटीई के तहत दाखिले को लेकर निजी विद्यालयों की मनमानी के मामले सामने आ रहे हैं। पहले जहां निजी विद्यालय अभ्यर्थियों को दाखिला नहीं दे रहे थे। वहीं अब दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लटका कर रखा है। विभाग ने पहले सीटों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करने की तिथि 21 मई तक बढ़ा दी थी। लेकिन प्रक्रिया पूरी न होने के कारण इसको एक बार फिर से बढ़ाकर तीन जून कर दिया है।
जानकारी के अनुसार आरटीई के तहत जिले में 1519 छात्रों को सीट अलॉट की गई थी, जिसमें से महज 767 छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन हुआ है जबकि 752 आवेदन अभी तक लंबित हैं। निदेशालय ने शेष छात्रों का डेटा तीन जून तक अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर तय समय में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी विभाग ने दाखिले की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई थी।
दाखिला न देने पर बताना होगा कारण
विभाग ने स्कूलों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई स्कूल किसी छात्र का दाखिला खारिज करता है, तो उसे पोर्टल पर इसका स्पष्ट कारण दर्ज करना होगा। दाखिला रद्द करने के मुख्य कारणों में गलत निवास प्रमाण, आयु प्रमाण पत्र की कमी, ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए वार्षिक आय 1.8 लाख रुपये से अधिक होना शामिल है। बता दें कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए सुरक्षित रखी जाती हैं।
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जो स्कूल दाखिला देने से मना कर रहे हैं, उनकी सूची निदेशालय को भेज दी गई है। आरटीई के तहत पात्र अभ्यर्थी को दाखिला मिलना चाहिए।- बसंत कुमार ढिल्लों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आरटीई के तहत दाखिले को लेकर निजी विद्यालयों की मनमानी के मामले सामने आ रहे हैं। पहले जहां निजी विद्यालय अभ्यर्थियों को दाखिला नहीं दे रहे थे। वहीं अब दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लटका कर रखा है। विभाग ने पहले सीटों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करने की तिथि 21 मई तक बढ़ा दी थी। लेकिन प्रक्रिया पूरी न होने के कारण इसको एक बार फिर से बढ़ाकर तीन जून कर दिया है।
जानकारी के अनुसार आरटीई के तहत जिले में 1519 छात्रों को सीट अलॉट की गई थी, जिसमें से महज 767 छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन हुआ है जबकि 752 आवेदन अभी तक लंबित हैं। निदेशालय ने शेष छात्रों का डेटा तीन जून तक अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर तय समय में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी विभाग ने दाखिले की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई थी।
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दाखिला न देने पर बताना होगा कारण
विभाग ने स्कूलों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई स्कूल किसी छात्र का दाखिला खारिज करता है, तो उसे पोर्टल पर इसका स्पष्ट कारण दर्ज करना होगा। दाखिला रद्द करने के मुख्य कारणों में गलत निवास प्रमाण, आयु प्रमाण पत्र की कमी, ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए वार्षिक आय 1.8 लाख रुपये से अधिक होना शामिल है। बता दें कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए सुरक्षित रखी जाती हैं।
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जो स्कूल दाखिला देने से मना कर रहे हैं, उनकी सूची निदेशालय को भेज दी गई है। आरटीई के तहत पात्र अभ्यर्थी को दाखिला मिलना चाहिए।- बसंत कुमार ढिल्लों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी