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Faridabad News: पर्ची यहां, दवाइयां बाजार से...नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में ‘फ्री इलाज’ का सच
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- टूट रहा मरीजों का सपना, दवाइयों के लिए यहां -वहां भटकने पर मजबूर
रिजवान खान
नूंह। सरकार भले ही गरीबों को मुफ्त इलाज देने के दावे कर रही हो, लेकिन नल्हड़ मेडिकल कॉलेज की हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को दवाइयों के लिए अस्पताल से ज्यादा बाहर बने मेडिकलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। औषधि वितरण कक्ष में दवाइयां न मिलने के कारण करीब 60 प्रतिशत तक मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई कई जरूरी दवाइयां औषधि कक्ष से नहीं दी जातीं। कर्मचारियों द्वारा अक्सर दवा खत्म है कहकर मरीजों को सीधे बाहर से दवाइयां खरीदने की सलाह दे दी जाती है। कई मरीजों का आरोप है कि कर्मचारी दवा ढूंढ़ने की जहमत तक नहीं उठाते और उन्हें टाल दिया जाता है। मोहम्मदपुर गांव से आए हमीदा, पथरेड़ी के राज कपूर, कोटला के हुसैनदीन, मलाई गांव के जीत खान और फिरोजपुर झिरका के सरीफ का कहना है कि वे बड़ी उम्मीद के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे, लेकिन दवाइयां नहीं मिलने से मायूस होकर बाजार का रुख करना पड़ा। गरीब परिवारों के लिए यह खर्च किसी बोझ से कम नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मरीजों को दवाइयां ही बाहर से खरीदनी पड़ें, तो फिर सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का दावा महज कागजी साबित हो रहा है।
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कई बार विधानसभा में उठ चुका है मुद्दा
नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में दवाइयों की कमी और अव्यवस्था को लेकर नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद और फिरोजपुर झिरका से विधायक मामन खान भी कई बार विधानसभा में आवाज उठा चुके हैं, लेकिन हालात अब भी जस के तस हैं। अब सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे और गरीब मरीजों को राहत मिलेगी, या फिर मेडिकल कॉलेज में इलाज का मतलब यूं ही जेब ढीली करना बना रहेगा।
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अस्पताल में दवाइयां का स्टॉक पूरा है। कभी-कभार कुछ दवाइयां नहीं होती तो उन्हें जल्द ही मंगा लिया जाता है। हमारी पूरी कोशिश है कि मरीजों को दवाइयां मेडिकल कॉलेज से ही दी जाए। इसके अलावा अगर कोई बाहर से दवाइयां मंगवा रहा है तो उसकी जांच करवाई जाएगी।
- मुकेश कुमार, डायरेक्टर मेडिकल कॉलेज नूंह।
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अपना इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आया था, लेकिन यहां एक दो दवाई मिली हैं। शेष बची महंगी दवाओं को बाहर से लेने के लिए बोल दिया है।
- राज कपूर, मरीज पथरेडी।
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कान से पानी बहने व कम सुनने की समस्या बनी हुई है। फ्री इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलज आया हूं। यहां पर दवाइयां नहीं है यह कहकर बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए बोला गया है।
- हुसैनदीन, मरीज कोटला।
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काले पीलिया की बीमारी से ग्रस्त हूं और दो बार मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए आ चुका हूं। दोनों बार बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
- जीत खान, मरीज, मलाई।
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करीब 60 किलोमीटर दूर से यह सोचकर इलाज कराने आया हूं कि मेडिकल कॉलेज में बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और इलाज भी फ्री होगा। लेकिन यहां पर तो फ्री के नाम पर सिर्फ दिखावा है।
- सरीफ खान, मरीज, फिरोजपुर झिरका
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रिजवान खान
नूंह। सरकार भले ही गरीबों को मुफ्त इलाज देने के दावे कर रही हो, लेकिन नल्हड़ मेडिकल कॉलेज की हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को दवाइयों के लिए अस्पताल से ज्यादा बाहर बने मेडिकलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। औषधि वितरण कक्ष में दवाइयां न मिलने के कारण करीब 60 प्रतिशत तक मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई कई जरूरी दवाइयां औषधि कक्ष से नहीं दी जातीं। कर्मचारियों द्वारा अक्सर दवा खत्म है कहकर मरीजों को सीधे बाहर से दवाइयां खरीदने की सलाह दे दी जाती है। कई मरीजों का आरोप है कि कर्मचारी दवा ढूंढ़ने की जहमत तक नहीं उठाते और उन्हें टाल दिया जाता है। मोहम्मदपुर गांव से आए हमीदा, पथरेड़ी के राज कपूर, कोटला के हुसैनदीन, मलाई गांव के जीत खान और फिरोजपुर झिरका के सरीफ का कहना है कि वे बड़ी उम्मीद के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे, लेकिन दवाइयां नहीं मिलने से मायूस होकर बाजार का रुख करना पड़ा। गरीब परिवारों के लिए यह खर्च किसी बोझ से कम नहीं है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मरीजों को दवाइयां ही बाहर से खरीदनी पड़ें, तो फिर सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का दावा महज कागजी साबित हो रहा है।
कई बार विधानसभा में उठ चुका है मुद्दा
नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में दवाइयों की कमी और अव्यवस्था को लेकर नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद और फिरोजपुर झिरका से विधायक मामन खान भी कई बार विधानसभा में आवाज उठा चुके हैं, लेकिन हालात अब भी जस के तस हैं। अब सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे और गरीब मरीजों को राहत मिलेगी, या फिर मेडिकल कॉलेज में इलाज का मतलब यूं ही जेब ढीली करना बना रहेगा।
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अस्पताल में दवाइयां का स्टॉक पूरा है। कभी-कभार कुछ दवाइयां नहीं होती तो उन्हें जल्द ही मंगा लिया जाता है। हमारी पूरी कोशिश है कि मरीजों को दवाइयां मेडिकल कॉलेज से ही दी जाए। इसके अलावा अगर कोई बाहर से दवाइयां मंगवा रहा है तो उसकी जांच करवाई जाएगी।
- मुकेश कुमार, डायरेक्टर मेडिकल कॉलेज नूंह।
अपना इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आया था, लेकिन यहां एक दो दवाई मिली हैं। शेष बची महंगी दवाओं को बाहर से लेने के लिए बोल दिया है।
- राज कपूर, मरीज पथरेडी।
कान से पानी बहने व कम सुनने की समस्या बनी हुई है। फ्री इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलज आया हूं। यहां पर दवाइयां नहीं है यह कहकर बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए बोला गया है।
- हुसैनदीन, मरीज कोटला।
काले पीलिया की बीमारी से ग्रस्त हूं और दो बार मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए आ चुका हूं। दोनों बार बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
- जीत खान, मरीज, मलाई।
करीब 60 किलोमीटर दूर से यह सोचकर इलाज कराने आया हूं कि मेडिकल कॉलेज में बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और इलाज भी फ्री होगा। लेकिन यहां पर तो फ्री के नाम पर सिर्फ दिखावा है।
- सरीफ खान, मरीज, फिरोजपुर झिरका