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Faridabad News: फरीदाबाद की मिट्टी में बढ़ रहा जहर, सिकुड़ रही खेती योग्य भूमि

Tue, 26 Aug 2025 11:00 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद Updated Tue, 26 Aug 2025 11:00 PM IST
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Poison is increasing in Faridabad's soil, cultivable land is shrinking
फसल की फोटो । मोहित शुक्ला की खबर के साथ ।
- आईआईएसडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, प्रदूषण के कारण खराब हो रही स्थिति
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मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। आईआईएसडब्ल्यूसी (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ सॉइल एंड वॉटर कंजर्वेशन) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में जिले की मिट्टी और जल को लेकर कई गंभीर खुलासे हुए हैं। जिले की मिट्टी और भूजल लगातार प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। खासतौर पर आर्सेनिक का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ गया है, मिट्टी की नमी क्षमता घट चुकी है और खेती योग्य भूमि लगातार सिकुड़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक फरीदाबाद की मिट्टी में आर्सेनिक का स्तर मानक सीमा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर की तुलना में आठ गुना ज्यादा 0.08 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है। इसके कारण कृषि कार्य प्रभावित होने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्सेनिक से युक्त मिट्टी और पानी से लंबे समय तक संपर्क कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
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मिट्टी की नमी क्षमता घटी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2005 से 2023 के बीच जिले की मिट्टी की नमी धारण क्षमता में 25 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इसका सीधा असर फसलों की उत्पादकता पर पड़ रहा है। पहले जिन क्षेत्रों में सिंचाई के बाद मिट्टी लंबे समय तक नमी बनाए रखती थी, अब वहां तेजी से सूखने की समस्या बढ़ गई है। इस कारण से किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ती है जिससे लागत बढ़ रही है और भूजल भी प्रभावित हो रहा है।
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खेती योग्य भूमि 15-18% तक घटी
आईआईएसडब्ल्यूसी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन दशकों में फरीदाबाद जिले में खेती योग्य भूमि औसतन 15 से 18 प्रतिशत तक घट चुकी है। तेजी से फैलते शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और अवैध कॉलोनियों के कारण कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा या तो कंक्रीट में बदल गया है या प्रदूषण की वजह से अनुपयोगी होता जा रहा है। यह स्थिति खाद्य सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ी चुनौती है।

उद्योगों का अपशिष्ट पैदा कर रहा समस्या
सर्वे में बल्लभगढ़ क्षेत्र पर विशेष चिंता जताई गई है। यहां 60 प्रतिशत से अधिक उद्योग बिना किसी उपचार के सीधे अपना अपशिष्ट जमीन और नालों में छोड़ रहे हैं। इन अपशिष्टों में भारी धातुएं और जहरीले रसायन शामिल हैं जो मिट्टी की गुणवत्ता को बर्बाद कर रहे हैं और भूजल को भी दूषित कर रहे हैं। आसपास रहने वाले लोगों में सांस संबंधी रोग, त्वचा संबंधी समस्याएं और गैस्ट्रिक बीमारियां का खतरा भी बढ़ रहा है।

निर्माण मलबे पर लेना होगा एक्शन
फरीदाबाद के कई हिस्सों में निर्माण मलबा सीधे खेतों और खाली पड़ी जमीनों पर फेंका जाता है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति तेजी से कम हो रही है। खुले में पड़ा मलबा बारिश के दौरान नालों में बहकर जलभराव और सीवर जाम जैसी समस्याओं को भी बढ़ा देता है।


बीमार हो रही जमीन, अब इलाज की जरूरत
रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि फरीदाबाद की धरती लगातार बीमार होती जा रही है। आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा, घटती नमी और सिकुड़ती कृषि भूमि न केवल किसानों बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी पर भी सीधा असर डाल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि प्रदूषण और शहरीकरण पर लगाम नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं।

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आर्सेनिक का स्तर गंदे पानी के कारण बढ़ रहा है। इसको कम करने के लिए बड़े स्तर पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पड़ेंगे। वहीं लोगों को भी इसका ध्यान रखना होगा कि निर्माणों का मलबा खेतों में न डाला जाए।
- वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि वानिकी, कृषि विज्ञान केंद्र फरीदाबाद, अशोक कुमार देशवाल
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