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Faridabad News: शहर में मानकों को ताक पर रखकर चल रहे पीजी
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किचन से बाथरूम तक अव्यवस्था, दिल्ली हादसे के बाद भी नहीं सबक ले रहे पीजी संचालक
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दिल्ली में हुए हादसे के बाद भी शहर में चल रहे पीजी में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। लोग मानकों को ताक पर रखकर पीजी चला रहे हैं। जिले में अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर करीब 150 पीजी पंजीकृत हैं। इनमें से 100 से अधिक पीजी में किसी न किसी तरह की अव्यवस्था सामने आ रही है। कई पीजी में तो एक साथ कई खामियां हैं। छोटे-छोटे कमरों में पांच से छह लोगों को रखा जा रहा है, जबकि किचन और बाथरूम की साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
शहर में नौकरी और पढ़ाई के लिए बाहर से आने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पीजी संचालक कम जगह में अधिक लोगों को रखकर मुनाफा कमाने में जुटे हैं। कई पीजी के कमरों में क्षमता से अधिक लोगों को रखा जाता है। इससे न केवल रहने वालों को परेशानी होती है, बल्कि किसी आपात स्थिति में खतरा भी बढ़ जाता है।
हफ्तों तक नहीं होती सफाई
कई पीजी में नियमित सफाई की व्यवस्था तक नहीं है। रहने वालों के अनुसार कुछ जगहों पर हफ्तों तक सफाईकर्मी नहीं आता। इससे कमरों के साथ-साथ कॉमन एरिया, किचन और बाथरूम में गंदगी जमा रहती है। किचन में साफ-सफाई की कमी के कारण भोजन बनाने और रखने की जगह भी अस्वच्छ बनी रहती है।
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आग लगने पर निकास तक की व्यवस्था नहीं
पीजी में सबसे गंभीर समस्या सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। कई भवन पुराने हैं और उनमें रहने वालों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त जगह नहीं है। कुछ पीजी में आग या अन्य आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए उचित निकास की व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
रहने वालों का कहना है कि पीजी लेने से पहले किराया और सुविधाओं की जानकारी तो दी जाती है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम और नियमित साफ-सफाई पर संचालकों का ध्यान कम रहता है। इसके अलावा पैसे लेते समय सिक्योरिटी और तमाम चीजों मांगी जाती हैं, पर सुविधाओं के नाम पर सिर्फ जुमला मिलता है। बता दें कि जिले में जिन कमरों में 5 से 6 लोग रहते हैं, उनका किराया 5 से 7 हजार रुपये है जबकि 3-4 लोगों का किराया 6 से 8 हजार जबकि 2 लोगों को किराया 9 से 10 हजार प्रतिव्यक्ति देना पड़ता है। अकेले एक कमरा लेने पर 12 से 15 हजार देने पड़ते हैं।
बातचीत
कमरों में क्षमता से ज्यादा लोग रहते हैं। सफाई भी नियमित नहीं होती है। किचन और बाथरूम की गंदगी से रोज परेशानी होती है।- नीतेश, पीजी निवासी सेक्टर-15
किराया लेते समय सुविधाओं की पूरी जानकारी दी जाती है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम और इमरजेंसी निकासी पर संचालक कोई खास ध्यान नहीं देते। - बब्लू, पीजी निवासी ओल्ड फरीदाबाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दिल्ली में हुए हादसे के बाद भी शहर में चल रहे पीजी में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। लोग मानकों को ताक पर रखकर पीजी चला रहे हैं। जिले में अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर करीब 150 पीजी पंजीकृत हैं। इनमें से 100 से अधिक पीजी में किसी न किसी तरह की अव्यवस्था सामने आ रही है। कई पीजी में तो एक साथ कई खामियां हैं। छोटे-छोटे कमरों में पांच से छह लोगों को रखा जा रहा है, जबकि किचन और बाथरूम की साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
शहर में नौकरी और पढ़ाई के लिए बाहर से आने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पीजी संचालक कम जगह में अधिक लोगों को रखकर मुनाफा कमाने में जुटे हैं। कई पीजी के कमरों में क्षमता से अधिक लोगों को रखा जाता है। इससे न केवल रहने वालों को परेशानी होती है, बल्कि किसी आपात स्थिति में खतरा भी बढ़ जाता है।
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हफ्तों तक नहीं होती सफाई
कई पीजी में नियमित सफाई की व्यवस्था तक नहीं है। रहने वालों के अनुसार कुछ जगहों पर हफ्तों तक सफाईकर्मी नहीं आता। इससे कमरों के साथ-साथ कॉमन एरिया, किचन और बाथरूम में गंदगी जमा रहती है। किचन में साफ-सफाई की कमी के कारण भोजन बनाने और रखने की जगह भी अस्वच्छ बनी रहती है।
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आग लगने पर निकास तक की व्यवस्था नहीं
पीजी में सबसे गंभीर समस्या सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। कई भवन पुराने हैं और उनमें रहने वालों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त जगह नहीं है। कुछ पीजी में आग या अन्य आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए उचित निकास की व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
रहने वालों का कहना है कि पीजी लेने से पहले किराया और सुविधाओं की जानकारी तो दी जाती है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम और नियमित साफ-सफाई पर संचालकों का ध्यान कम रहता है। इसके अलावा पैसे लेते समय सिक्योरिटी और तमाम चीजों मांगी जाती हैं, पर सुविधाओं के नाम पर सिर्फ जुमला मिलता है। बता दें कि जिले में जिन कमरों में 5 से 6 लोग रहते हैं, उनका किराया 5 से 7 हजार रुपये है जबकि 3-4 लोगों का किराया 6 से 8 हजार जबकि 2 लोगों को किराया 9 से 10 हजार प्रतिव्यक्ति देना पड़ता है। अकेले एक कमरा लेने पर 12 से 15 हजार देने पड़ते हैं।
बातचीत
कमरों में क्षमता से ज्यादा लोग रहते हैं। सफाई भी नियमित नहीं होती है। किचन और बाथरूम की गंदगी से रोज परेशानी होती है।- नीतेश, पीजी निवासी सेक्टर-15
किराया लेते समय सुविधाओं की पूरी जानकारी दी जाती है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम और इमरजेंसी निकासी पर संचालक कोई खास ध्यान नहीं देते। - बब्लू, पीजी निवासी ओल्ड फरीदाबाद