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ठीकरी पहरे में गुजर रही पूरी रात, पांच गांवों के लोगों में अभी भी तेंदुए का भय
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बल्लभगढ़। तेंदुए का भय ग्रामीणों के दिल में इस कदर बैठ गया है कि लोग अकेले घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। जो खेतों और जंगलों की तरफ जा भी रहे हैं, सुरक्षा के लिए कुल्हाड़ी, डंडे और शोर मचाने के लिए खाली कनस्तर साथ ले जा रह हैं। गांव जाजरू में सप्ताह भर पहले सीसीटीवी में तेंदुए नुमा जानवर दिखाई देने के बाद से ही लोग डरे हुए थे। इसके बाद बुधवार को भी गांव सागरपुर की एक महिला ने तेंदुए द्वारा हमला किए जाने का दावा किया। उसके हाथों पर जानवर के पंजों के निशान भी थे। इन घटनाओं के बाद से आसपास के पांच गांवों के लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। तेंदुए के डर से ग्रामीण रातभर ठीकरी पहरा दे रहे हैं।
गांव सागरपुर निवासी अनुज भाटी ने बताया कि गांव में लोगों ने अकेले बाहर जाना बंद कर रखा है। सबसे ज्यादा ध्यान छोटे बच्चों का रखा जा रहा है। गांव सागरपुर के साथ लगते गांव जाजरू, प्याला, सुनपेड़, साहूपुरा के लोगों में भी भय का माहौल है। अनुज का कहना है कि इन सभी गांवों के साथ में जंगल का इलाका है। इन गांवों के मवेशी एक ही जंगल में चारा खाने आते हैं। इन दिनों खेतों में ज्वार की फसल काफी ऊंची हो गई है। तेंदुए के डर से ग्रामीण जानवरों के लिए चारा काटने भी नही जा रहे हैं। गांव के युवा छोटे-छोटे समूह बनाकर रात को ठीकरी पहरा भी दे रहे हैं। उन्होंने गांव में लावारिस पशुओं की गिनती भी शुरू कर दी है।
वन्य जीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन गांव के लोगों का मानना है कि तेंदुआ है। ऐसे में सुरक्षा के तौर पर अब ग्रामीण समूह में खेतों की तरफ जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए अपने साथ कुल्हाड़ी, डंडे व शोर मचाने के लिए खाली कनस्तर आदि भी रख रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर शोर मचाकर तेंदुए को भगाया जा सके और ग्रामीणों तक तेंदुए की मौजूदगी का संदेश भी पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में कपास की फसल पर फूल आ चुका है। बरसात हुई तो सारा फूल झड़ जाएगा और किसानों की फसल खराब हो जाएगी। इसलिए समय रहते फसल को बीनना जरूरी है लेकिन तेंदुए के भय से मजदूर व ग्रामीण खेतों में नही जा रहे हैं।
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गांव सागरपुर निवासी अनुज भाटी ने बताया कि गांव में लोगों ने अकेले बाहर जाना बंद कर रखा है। सबसे ज्यादा ध्यान छोटे बच्चों का रखा जा रहा है। गांव सागरपुर के साथ लगते गांव जाजरू, प्याला, सुनपेड़, साहूपुरा के लोगों में भी भय का माहौल है। अनुज का कहना है कि इन सभी गांवों के साथ में जंगल का इलाका है। इन गांवों के मवेशी एक ही जंगल में चारा खाने आते हैं। इन दिनों खेतों में ज्वार की फसल काफी ऊंची हो गई है। तेंदुए के डर से ग्रामीण जानवरों के लिए चारा काटने भी नही जा रहे हैं। गांव के युवा छोटे-छोटे समूह बनाकर रात को ठीकरी पहरा भी दे रहे हैं। उन्होंने गांव में लावारिस पशुओं की गिनती भी शुरू कर दी है।
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वन्य जीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन गांव के लोगों का मानना है कि तेंदुआ है। ऐसे में सुरक्षा के तौर पर अब ग्रामीण समूह में खेतों की तरफ जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए अपने साथ कुल्हाड़ी, डंडे व शोर मचाने के लिए खाली कनस्तर आदि भी रख रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर शोर मचाकर तेंदुए को भगाया जा सके और ग्रामीणों तक तेंदुए की मौजूदगी का संदेश भी पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में कपास की फसल पर फूल आ चुका है। बरसात हुई तो सारा फूल झड़ जाएगा और किसानों की फसल खराब हो जाएगी। इसलिए समय रहते फसल को बीनना जरूरी है लेकिन तेंदुए के भय से मजदूर व ग्रामीण खेतों में नही जा रहे हैं।
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