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Faridabad News: चरखी दादरी की मीनाक्षी का अचार लोगों को आ रहा पसंद
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कई राज्यों में सरस मेले व अन्य आयोजनों में ले चुकी हैं भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर - 12 स्थित सरस आजीविका मेले में ग्रामीण भारत की शिल्प कलाओं का मुख्य रूप से प्रदर्शन किया जा रहा है। ऐसे में चरखी दादरी से पहुंची मीनाक्षी कई प्रकार के अचार लेकर पहुंची हैं, जो लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। मीनाक्षी ने बताया कि उन्होंने अपनी सास से अचार बनाना सीखा है।
मीनाक्षी का कहना है कि वे कई राज्यों में सरस मेले व अन्य आयोजनों में भाग ले चुकी हैं। उनका अचार लोगों को काफी पसंद आ रहा है। वे मेले में आम, निंबू, भिंडी, अदरक, लहसुन, आंवला, टेट, लास्वा, गाजर, मिक्स, मूली सहित अन्य प्रकार के अचार लेकर पहुंची है। मेले में तीन दिन ही हुए हैं कि लोग उनके अचार को खूब खरीद रहे हैं। इसके साथ ही आंवले का मुरब्बा लोगों को खूब भा रहा है। लोग एक साथ कई किलों तक खरीद कर अपने साथ ले जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वे अपने देवर के साथ यहां पहुंची है, और उनका एक डेढ़ साल का बच्चा भी है। उन्होंने अपनी सास से अचार बनाना सीखा और पति के समर्थन के साथ अब वे देश के कई राज्यों तक अपने हाथ के अचार का स्वाद पहुंचा रहीं हैं। स्टॉल पर 200 से लेकर 500 रुपये तक के अचार मौजूद हैं। पिछले 12 वर्षों से वे अचार बना रही हैं। वहीं, पिछले 8 वर्षों से वे दीपक स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही उनके साथ कई और महिलाएं भी अचार बनाने का कार्य कर रही हैं। मीनाक्षी कई महिलाओं को अचार बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। इससे गांव की कई महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर - 12 स्थित सरस आजीविका मेले में ग्रामीण भारत की शिल्प कलाओं का मुख्य रूप से प्रदर्शन किया जा रहा है। ऐसे में चरखी दादरी से पहुंची मीनाक्षी कई प्रकार के अचार लेकर पहुंची हैं, जो लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। मीनाक्षी ने बताया कि उन्होंने अपनी सास से अचार बनाना सीखा है।
मीनाक्षी का कहना है कि वे कई राज्यों में सरस मेले व अन्य आयोजनों में भाग ले चुकी हैं। उनका अचार लोगों को काफी पसंद आ रहा है। वे मेले में आम, निंबू, भिंडी, अदरक, लहसुन, आंवला, टेट, लास्वा, गाजर, मिक्स, मूली सहित अन्य प्रकार के अचार लेकर पहुंची है। मेले में तीन दिन ही हुए हैं कि लोग उनके अचार को खूब खरीद रहे हैं। इसके साथ ही आंवले का मुरब्बा लोगों को खूब भा रहा है। लोग एक साथ कई किलों तक खरीद कर अपने साथ ले जा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि वे अपने देवर के साथ यहां पहुंची है, और उनका एक डेढ़ साल का बच्चा भी है। उन्होंने अपनी सास से अचार बनाना सीखा और पति के समर्थन के साथ अब वे देश के कई राज्यों तक अपने हाथ के अचार का स्वाद पहुंचा रहीं हैं। स्टॉल पर 200 से लेकर 500 रुपये तक के अचार मौजूद हैं। पिछले 12 वर्षों से वे अचार बना रही हैं। वहीं, पिछले 8 वर्षों से वे दीपक स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही उनके साथ कई और महिलाएं भी अचार बनाने का कार्य कर रही हैं। मीनाक्षी कई महिलाओं को अचार बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। इससे गांव की कई महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
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