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Faridabad News: चार जोन में बिना नक्शे के सिर्फ 22 भवन चिन्हित, शहर में अवैध निर्माणों की भरमार
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई को लेकर नगर निगम प्रशासन की कवायद कागजों तक सीमित नजर आ रही है। चार जोन में बिना स्वीकृत नक्शे के बने भवनों की जांच के लिए आदेश जारी होने के बावजूद अब तक नगर निगम प्रशासन महज 22 भवनों को ही चिन्हित कर पाया है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी भवन एनआईटी जोन में ही चिन्हित किए गए हैं। बाकी तीन जोन में अब तक अवैध रूप से बने भवनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
जून माह में लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद अवैध और बिना नक्शे के बने भवनों को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने शहर में ऐसे भवनों की जांच करने के निर्देश दिए थे। आदेश के तहत चारों जोन में सर्वे कर यह पता लगाया जाना था कि कितने भवन स्वीकृत नक्शे के विपरीत या बिना नक्शे के बनाए गए हैं। लेकिन करीब तीन महीने बीतने के बाद भी सर्वे का काम पूरा नहीं हो पाया है।
शहर में बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं, जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कई भवनों में नियमों के विपरीत अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किए जाने और बिना अनुमति निर्माण किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद निगम की जांच सिर्फ 22 भवनों तक सीमित रहने से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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बाकी जोन में नहीं हुई कार्रवाई
नगर निगम के चार जोन में एनआईटी जोन को छोड़कर बाकी जोन में अब तक बिना नक्शे के भवनों को चिन्हित करने का काम प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि निगम के पास अवैध निर्माणों की शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं तो फिर व्यापक सर्वे क्यों नहीं हो पा रहा। बता दें कि लखनऊ अग्निकांड के बाद नगर निगम प्रशासन ने भवनों की सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन को लेकर जांच के आदेश दिए थे। इसका उद्देश्य ऐसे भवनों की पहचान करना था, जहां नियमों का उल्लंघन होने के कारण आग जैसी आपदा की स्थिति में लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
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फरीदाबाद। शहर में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई को लेकर नगर निगम प्रशासन की कवायद कागजों तक सीमित नजर आ रही है। चार जोन में बिना स्वीकृत नक्शे के बने भवनों की जांच के लिए आदेश जारी होने के बावजूद अब तक नगर निगम प्रशासन महज 22 भवनों को ही चिन्हित कर पाया है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी भवन एनआईटी जोन में ही चिन्हित किए गए हैं। बाकी तीन जोन में अब तक अवैध रूप से बने भवनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
जून माह में लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद अवैध और बिना नक्शे के बने भवनों को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने शहर में ऐसे भवनों की जांच करने के निर्देश दिए थे। आदेश के तहत चारों जोन में सर्वे कर यह पता लगाया जाना था कि कितने भवन स्वीकृत नक्शे के विपरीत या बिना नक्शे के बनाए गए हैं। लेकिन करीब तीन महीने बीतने के बाद भी सर्वे का काम पूरा नहीं हो पाया है।
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शहर में बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं, जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कई भवनों में नियमों के विपरीत अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किए जाने और बिना अनुमति निर्माण किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद निगम की जांच सिर्फ 22 भवनों तक सीमित रहने से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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बाकी जोन में नहीं हुई कार्रवाई
नगर निगम के चार जोन में एनआईटी जोन को छोड़कर बाकी जोन में अब तक बिना नक्शे के भवनों को चिन्हित करने का काम प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि निगम के पास अवैध निर्माणों की शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं तो फिर व्यापक सर्वे क्यों नहीं हो पा रहा। बता दें कि लखनऊ अग्निकांड के बाद नगर निगम प्रशासन ने भवनों की सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन को लेकर जांच के आदेश दिए थे। इसका उद्देश्य ऐसे भवनों की पहचान करना था, जहां नियमों का उल्लंघन होने के कारण आग जैसी आपदा की स्थिति में लोगों की जान को खतरा हो सकता है।