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पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा खोरी गांव
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फरीदाबाद। खोरी गांव में तोड़फोड़ के बाद अब उसे नगर वन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे लेकर फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने योजना तैयार की है। इसके लिए लोगों की सहायता ली जाएगी।
दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डर पर वन क्षेत्र और नगर निगम की जमीन पर फरीदाबाद में बसा खोरी गांव अब रिहायशी कब्जे से काफी हद तक मुक्त है। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, खोरी गांव में 170 एकड़ जमीन है। इसमें से 80 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर करीब डेढ़ माह चली भारी तोड़फोड़ कार्रवाई के बाद इस कब्जे को खाली करा लिया गया है। कोर्ट का नगर निगम और हरियाणा सरकार को आदेश था कि खोरी में तोड़फोड़ करके फिर से जंगल बनाया जाए।
इस उद्देश्य से एफएमडीए ने खोरी गांव में एक बार फिर जंगल विकसित करने की योजना तैयार की है। इस योजना को नगर वन नाम दिया गया है। इसके तहत एफएमडीए लोगों से श्रम दान, पौधे दान, पेड़ दान के रूप में मदद लेगा। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पर इच्छुक लोग आवेदन अपना आवेदन कर सकते हैं। लोगों से मिलने वाले पेड़ पौधों को खोरी में खाली कराई गई जगह पर रोपा जाएगा। चार से पांच साल बाद यहां एक बार फिर से जंगल तैयार हो जाएगा। इसके पर्यटकों के आने जाने की पूरी छूट होगी। जिससे वह देख सकेंगे कि एफएमडीए ने जंगल की जमीन को फिर से कैसे सुंदर जंगल में तबदील किया है।
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खोरी गांव में तोड़फोड़ के बाद खाली हुई करीब 150 एकड़ जमीन पर फिर से जंगल बनाने की योजना तैयार की गई है। इसे नगर वन नाम दिया गया है। इसके लिए एफएमडीए लोगों की भी सहायता लेगा।
- डॉ. गरिमा मित्तल, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एफएमडीए
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दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डर पर वन क्षेत्र और नगर निगम की जमीन पर फरीदाबाद में बसा खोरी गांव अब रिहायशी कब्जे से काफी हद तक मुक्त है। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, खोरी गांव में 170 एकड़ जमीन है। इसमें से 80 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर करीब डेढ़ माह चली भारी तोड़फोड़ कार्रवाई के बाद इस कब्जे को खाली करा लिया गया है। कोर्ट का नगर निगम और हरियाणा सरकार को आदेश था कि खोरी में तोड़फोड़ करके फिर से जंगल बनाया जाए।
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इस उद्देश्य से एफएमडीए ने खोरी गांव में एक बार फिर जंगल विकसित करने की योजना तैयार की है। इस योजना को नगर वन नाम दिया गया है। इसके तहत एफएमडीए लोगों से श्रम दान, पौधे दान, पेड़ दान के रूप में मदद लेगा। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पर इच्छुक लोग आवेदन अपना आवेदन कर सकते हैं। लोगों से मिलने वाले पेड़ पौधों को खोरी में खाली कराई गई जगह पर रोपा जाएगा। चार से पांच साल बाद यहां एक बार फिर से जंगल तैयार हो जाएगा। इसके पर्यटकों के आने जाने की पूरी छूट होगी। जिससे वह देख सकेंगे कि एफएमडीए ने जंगल की जमीन को फिर से कैसे सुंदर जंगल में तबदील किया है।
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खोरी गांव में तोड़फोड़ के बाद खाली हुई करीब 150 एकड़ जमीन पर फिर से जंगल बनाने की योजना तैयार की गई है। इसे नगर वन नाम दिया गया है। इसके लिए एफएमडीए लोगों की भी सहायता लेगा।
- डॉ. गरिमा मित्तल, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एफएमडीए