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Faridabad News: बीके अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ ने की सांकेतिक हड़ताल, परेशान रहे मरीज और तीमारदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में सोमवार को नर्सिंग स्टाफ के दो घंटे के पेन डाउन से मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आपातकालीन विभाग के बाहर नर्सिंग स्टाफ ने सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (एमओटीपी) के विरोध में सांकेतिक हड़ताल की।
इस दौरान मरीज उपचार और जरूरी नर्सिंग सेवाओं के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। हालांकि अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इमरजेंसी और कैजुअल्टी सेवाओं के लिए आवश्यक स्टाफ तैनात रखा गया। छांयसा से पिता का इलाज कराने पहुंचे इंद्रपाल ने बताया कि उनके पिता को ग्लूकोज लगाया गया था। बोतल टांगने के लिए स्टैंड नहीं मिलने पर उन्हें करीब दो घंटे तक ग्लूकोज की बोतल हाथ में पकड़कर खड़ा रहना पड़ा। उनका आरोप है कि पेन डाउन के दौरान नर्सिंग स्टाफ की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली।
नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि 5 से 7 अक्तूबर तक रोजाना दो घंटे सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। मैट्रन सुनीता ने कहा कि नई स्थानांतरण नीति में नर्सिंग कैडर की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की व्यावहारिक परेशानियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। बड़ी संख्या में महिला नर्सिंग कर्मचारी हैं। दूर-दराज के स्वास्थ्य केंद्रों पर तबादले से सुरक्षा, आने-जाने और परिवार से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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नर्सिंग ऑफिसर बबीता राणा ने कहा कि कर्मचारियों को अपनी पसंद के जिले में जाने का विकल्प मिलना चाहिए और सभी रिक्त पद ऑनलाइन ट्रांसफर के लिए उपलब्ध कराए जाने चाहिए। वहीं राजकंवार ने कहा कि यदि सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं हुई तो 8 अक्तूबर के बाद आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
मरीजों से बातचीत
नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर होने से काफी परेशानी हुई। सहायता के लिए इमरजेंसी में कोई भी उपलब्ध नहीं था।
- बिजेन्दर, सेक्टर-22
स्टाफ की हड़ताल से मरीजों को दिक्कत हुई। इससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
- सोनी, गाजीपुर
ऑनलाइन ट्रांसफर सरकार की नीति के तहत किए जा रहे हैं। किसी कर्मचारी को आपत्ति है तो अपनी समस्या मुख्यालय के समक्ष रखनी चाहिए। समाधान मुख्यालय स्तर पर ही किया जा सकता है।
- डॉ. विकास गोयल, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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फरीदाबाद। बीके अस्पताल में सोमवार को नर्सिंग स्टाफ के दो घंटे के पेन डाउन से मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आपातकालीन विभाग के बाहर नर्सिंग स्टाफ ने सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (एमओटीपी) के विरोध में सांकेतिक हड़ताल की।
इस दौरान मरीज उपचार और जरूरी नर्सिंग सेवाओं के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। हालांकि अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इमरजेंसी और कैजुअल्टी सेवाओं के लिए आवश्यक स्टाफ तैनात रखा गया। छांयसा से पिता का इलाज कराने पहुंचे इंद्रपाल ने बताया कि उनके पिता को ग्लूकोज लगाया गया था। बोतल टांगने के लिए स्टैंड नहीं मिलने पर उन्हें करीब दो घंटे तक ग्लूकोज की बोतल हाथ में पकड़कर खड़ा रहना पड़ा। उनका आरोप है कि पेन डाउन के दौरान नर्सिंग स्टाफ की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली।
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नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि 5 से 7 अक्तूबर तक रोजाना दो घंटे सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। मैट्रन सुनीता ने कहा कि नई स्थानांतरण नीति में नर्सिंग कैडर की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की व्यावहारिक परेशानियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। बड़ी संख्या में महिला नर्सिंग कर्मचारी हैं। दूर-दराज के स्वास्थ्य केंद्रों पर तबादले से सुरक्षा, आने-जाने और परिवार से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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नर्सिंग ऑफिसर बबीता राणा ने कहा कि कर्मचारियों को अपनी पसंद के जिले में जाने का विकल्प मिलना चाहिए और सभी रिक्त पद ऑनलाइन ट्रांसफर के लिए उपलब्ध कराए जाने चाहिए। वहीं राजकंवार ने कहा कि यदि सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं हुई तो 8 अक्तूबर के बाद आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
मरीजों से बातचीत
नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर होने से काफी परेशानी हुई। सहायता के लिए इमरजेंसी में कोई भी उपलब्ध नहीं था।
- बिजेन्दर, सेक्टर-22
स्टाफ की हड़ताल से मरीजों को दिक्कत हुई। इससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
- सोनी, गाजीपुर
ऑनलाइन ट्रांसफर सरकार की नीति के तहत किए जा रहे हैं। किसी कर्मचारी को आपत्ति है तो अपनी समस्या मुख्यालय के समक्ष रखनी चाहिए। समाधान मुख्यालय स्तर पर ही किया जा सकता है।
- डॉ. विकास गोयल, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी