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Faridabad News: अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय में अब भर्ती हो सकेंगे मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गांव छांयसा स्थित श्री अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में मरीजों को भर्ती कर उपचार (आईपीडी) की सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। उच्च अधिकारियों ने इसकी अनुमति प्रदान कर दी हैं। वहीं, मरीजों को निजी सेंटर व बीके अस्पताल जाकर जांच करवाने से भी छुटकारा मिलेगा। अब अस्पताल में ही विभिन्न प्रकार की जांच की सेवा उपलब्ध होगी। इससे ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। पहले उन्हें निजी सेंटर व बीके अस्पताल में जाकर जांच करवानी होती थी। चिकित्सा महाविद्यालय के निदेशक डॉ. गौतम गोले ने बताया कि इस साल कॉलेज में 100 विद्यार्थियों ने दाखिला ले लिया हैं। अब कॉलेज में 200 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
अस्पताल में 16 जुलाई 2022 को ओपीडी शुरू की गई थी, लेकिन मरीजों की संख्या में इजाफा नहीं होने की वजह से चिकित्सालय नहीं चल पा रहा था। इसलिए उच्च अधिकारियों से इन पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) शुरू करने की मांग की गई थी, जिसको लेकर उच्च अधिकारियों ने उनको अनुमति प्रदान कर दी है। अब अस्पताल में आईपीडी सेवा को शुरू करने के लिए तैयारियां की जा रही हैं, जो कि आने वाले 2 महीने के अंदर शुरू हो जाएगी। आईपीडी शुरू होते ही ओपीडी की सेवाओं में भी बढ़ोतरी की जाएगी।
निदेशक ने बताया कि अभी उनके अस्पताल में आने वाले मरीज को केवल डॉक्टर की ओर से उपचार होने के बाद दवाइयां दी जाती हैं, लेकिन किसी प्रकार की कोई जांच नहीं की जाती है। इस कारण मरीज को निजी सेंटर व बीके अस्पताल में जाकर जांच करवानी पड़ती है, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए अब अस्पताल में एक्स रे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच शुरू की जा रही है। मशीनों का इंस्टॉलेशन किया जा चुका है। आईपीडी शुरू होते ही ओपीडी में इन सेवाओं को भी तुरंत प्रभाव से शुरू कर दिया जाएगा।
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अस्पताल में अभी 10 विभागों में ओपीडी सेवाएं जारी हैं, जिसमें कान-नाक-गला रोग विशेषज्ञ, सामान्य रोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ, कैंसर रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा ओपीडी में सेवाएं दी जा रही है।
दोबारा कर रहे हैं एनओसी के लिए आवेदन
निदेशक गौतम गोले ने बताया कि उनके अस्पताल में फायर विभाग के द्वारा जांच की गई थी, लेकिन कुछ कमियों के चलते एनओसी नहीं मिली। अब उन कमियों को दूर कर लिया गया है। दोबारा से एनओसी के लिए आवेदन करेंगे। फायर अधिकारी के द्वारा जांच करने के बाद एनओसी मिल जाएगी। वहीं, एसटीपी को ईटीपी में बदलने के लिए उन्होंने प्रदूषण विभाग के पास फाइल को जमा करवाया है।
ट्रांसपोर्ट सुविधा में की जाएगी बढ़ोतरी
महाविद्यालय के निदेशक गौतम गोले ने बताया कि अस्पताल को शुरू हुए करीब एक साल हो गया है, लेकिन मरीजों की संख्या में इजाफा नहीं हो पाया है। इसका एक कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं होना भी है। सुविधा के अभाव के कारण लोगों को अस्पताल तक आने में कई समस्याएं आती हैं। आईपीडी शुरू होने के बाद बस सेवा शुरू करने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
मार्च 2020 में सरकार ने किया था अधिग्रहण
राज्य सरकार ने छांयसा के गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर को अधिग्रहित करके स्वयं चलाने का फैसला लिया। इसे लेकर शहर में कई संगठनों ने मुहिम चलाई थी, जिसके बाद सरकार आगे आई थी। करीब 27.175 एकड़ जमीन पर बने इस कॉलेज को वित्तीय विवाद के कारण बैंकों ने वर्ष 2018 में सील कर दिया था। अब इसका नाम बदलकर श्री अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल महाविद्यालय कर दिया है।
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बल्लभगढ़। गांव छांयसा स्थित श्री अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में मरीजों को भर्ती कर उपचार (आईपीडी) की सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। उच्च अधिकारियों ने इसकी अनुमति प्रदान कर दी हैं। वहीं, मरीजों को निजी सेंटर व बीके अस्पताल जाकर जांच करवाने से भी छुटकारा मिलेगा। अब अस्पताल में ही विभिन्न प्रकार की जांच की सेवा उपलब्ध होगी। इससे ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। पहले उन्हें निजी सेंटर व बीके अस्पताल में जाकर जांच करवानी होती थी। चिकित्सा महाविद्यालय के निदेशक डॉ. गौतम गोले ने बताया कि इस साल कॉलेज में 100 विद्यार्थियों ने दाखिला ले लिया हैं। अब कॉलेज में 200 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
अस्पताल में 16 जुलाई 2022 को ओपीडी शुरू की गई थी, लेकिन मरीजों की संख्या में इजाफा नहीं होने की वजह से चिकित्सालय नहीं चल पा रहा था। इसलिए उच्च अधिकारियों से इन पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) शुरू करने की मांग की गई थी, जिसको लेकर उच्च अधिकारियों ने उनको अनुमति प्रदान कर दी है। अब अस्पताल में आईपीडी सेवा को शुरू करने के लिए तैयारियां की जा रही हैं, जो कि आने वाले 2 महीने के अंदर शुरू हो जाएगी। आईपीडी शुरू होते ही ओपीडी की सेवाओं में भी बढ़ोतरी की जाएगी।
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निदेशक ने बताया कि अभी उनके अस्पताल में आने वाले मरीज को केवल डॉक्टर की ओर से उपचार होने के बाद दवाइयां दी जाती हैं, लेकिन किसी प्रकार की कोई जांच नहीं की जाती है। इस कारण मरीज को निजी सेंटर व बीके अस्पताल में जाकर जांच करवानी पड़ती है, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए अब अस्पताल में एक्स रे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच शुरू की जा रही है। मशीनों का इंस्टॉलेशन किया जा चुका है। आईपीडी शुरू होते ही ओपीडी में इन सेवाओं को भी तुरंत प्रभाव से शुरू कर दिया जाएगा।
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अस्पताल में अभी 10 विभागों में ओपीडी सेवाएं जारी हैं, जिसमें कान-नाक-गला रोग विशेषज्ञ, सामान्य रोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ, कैंसर रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा ओपीडी में सेवाएं दी जा रही है।
दोबारा कर रहे हैं एनओसी के लिए आवेदन
निदेशक गौतम गोले ने बताया कि उनके अस्पताल में फायर विभाग के द्वारा जांच की गई थी, लेकिन कुछ कमियों के चलते एनओसी नहीं मिली। अब उन कमियों को दूर कर लिया गया है। दोबारा से एनओसी के लिए आवेदन करेंगे। फायर अधिकारी के द्वारा जांच करने के बाद एनओसी मिल जाएगी। वहीं, एसटीपी को ईटीपी में बदलने के लिए उन्होंने प्रदूषण विभाग के पास फाइल को जमा करवाया है।
ट्रांसपोर्ट सुविधा में की जाएगी बढ़ोतरी
महाविद्यालय के निदेशक गौतम गोले ने बताया कि अस्पताल को शुरू हुए करीब एक साल हो गया है, लेकिन मरीजों की संख्या में इजाफा नहीं हो पाया है। इसका एक कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं होना भी है। सुविधा के अभाव के कारण लोगों को अस्पताल तक आने में कई समस्याएं आती हैं। आईपीडी शुरू होने के बाद बस सेवा शुरू करने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
मार्च 2020 में सरकार ने किया था अधिग्रहण
राज्य सरकार ने छांयसा के गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर को अधिग्रहित करके स्वयं चलाने का फैसला लिया। इसे लेकर शहर में कई संगठनों ने मुहिम चलाई थी, जिसके बाद सरकार आगे आई थी। करीब 27.175 एकड़ जमीन पर बने इस कॉलेज को वित्तीय विवाद के कारण बैंकों ने वर्ष 2018 में सील कर दिया था। अब इसका नाम बदलकर श्री अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल महाविद्यालय कर दिया है।