सबसे निचले पायदान पर ‘स्मार्ट’ हुआ फरीदाबाद, सामने हैं बड़ी चुनौतियां
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सप्ताहभर के अंतराल में आए तीन अहम परिणामों में फरीदाबाद ने फिसड्डी साबित होने की हैट्रिक लगा दी है। स्मार्ट सिटी से पहले हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 12वीं के परीक्षा परिणाम में 43 फीसदी अंकों के साथ फरीदाबाद जिला सबसे पीछे यानी 21वें पायदान पर रहा।
इसके बाद 10वीं के परीक्षा परिणाम में महज 33 फीसदी रिजल्ट देने वाले इस जिले ने पूरे राज्य में किरकिरी कराई। बोर्ड परीक्षाओं के शर्मनाक परिणाम पर अभी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर परभ मंथन चल ही रहा था कि सप्ताहभर में ही फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी प्रतियोगिता का रिजल्ट भी आ गया।
जिसमें लखनऊ ने अव्वल स्थान पाया है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटा फरीदाबाद 13वें स्थान पर आया है। फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का रायपुर, कोलकाता का न्यू टाउन, बिहार का भागलपुर और झारखंड का रांची शहर फरीदाबाद से अच्छी रैकिंग पाने में सफल रहा है।
स्मार्ट सिटी के सामने है कई बड़ी चुनौतियां
1: लखनऊ
2: वारंगल
3: धर्मशाला
4: चंड़ीगढ़
5: रायपुर
6: न्यू टाउन कोलकाता
7: भागलपुर
8: पणजी
9: पोर्ट ब्लेयर
10: इम्फाम
11: रांची
12: अगरतला
13: फरीदाबाद
स्मार्ट सिटी के सामने है कई बड़ी चुनौतियां
प्रदेश की सबसे पुरा नी औद्योगिक नगरी और एनसीआर का सबसे पहला शहर भले ही स्मार्ट सिटी में शामिल हो गया हो, लेकिन स्मार्ट सिटी बनने की राह में शहर के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी है। शहरी क्षेत्र की कुल आबादी करीब 15 लाख है।
लेकिन अधिकांश जनता मूलभूत सुविधाओं से जूझ रही है। कई कालोनियां पेयजल से जूझ रही हैं तो कोई सीवरेज से। शहर में आए दिन बिजली की समस्या बनी रहती है। जब लोगों को मूलभूत सुविधा ही नहीं मिल पा रही है तो किस आधार पर शहर को स्मार्ट सिटी में जगह मिली।
ये है बड़ी चुनौतियां:
1: अवैध कालोनियों का बोलबाला: शहर में अवैध कालोनियों का बोलबाला बहुत ज्यादा है। अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों ने शहर का स्वरूप बिगाड़ दिया। सूत्रों के मुताबिक शहर की 2 लाख बीस हजार की आबादी स्लम एरिया में रहती है। शहर के चारों ओर 63 स्लम एरिया चिन्हित किए गए हैं। 66 कालोनियों को सरकार ने नियमित कर दिया लेकिन अभी भी 50 से अधिक अवैध कालोनियां बनकर तैयार हो गई हैं।
2: जर्जर पड़ी है शहर की सड़के: राष्ट्रीय राजधानी से सटे की जर्जर सड़के शहर के पिछड़ेपन के हालात खुद ही बयां कर रही हैं। नेशनल हाईवे, नीलम-बाटा रोड, बीके हार्डवेयर रोड, हार्डवेयर-बाटा रोड, एनआईटी, ग्रीनफील्ड, ओल्ड मार्केट, फरीदाबाद बाईपस की सड़कें बुरे हालात में हैं।
3: यहां जाम है आम: बारिश होते ही शहर की अधिकांश सड़कों पर जाम लगना आम बात है। दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे, अजरौंदा, नीलम पुल, बाटा पुल, बडख़ल, बल्लगढ़ चौक आदि पर जाम का नजारा कभी भी देखा जा सकता है। इसके अलावा शहर के अंदरूनी हिस्से में वाहनों के बढ़ते दबाव से सड़कें सिकुड़ती जा रही हैं।
जिले में गर्मी हो या सर्दी बिजली व पानी की सुविधा लोगों को मुहैया नही हो पाती
5: शहर में गंदगी का अंबार: मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शहर से सफाई अभियान की शुरूआत की थी, लेकिन बावजूद इसके शहर
में जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। शहर के लोगों को आज तक गंदगी से निजात नही मिली है।
‘स्मार्ट’ हुआ फरीदाबाद
तमाम जद्दोजहद के बाद आखिरकार फरीदाबाद स्मार्ट सिटी की दूसरी सूची में शामिल हो गया। 12 फीसदी सुधार के साथ शहर को ये सफलता मिली है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने इसकी घोषणा की। फास्ट ट्रैक शहरों की सूची में कुल 23 शहरों ने हिस्सा लिया था।
इनमें से 13 शहर चयनित किए गए हैं। निगमायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि अब शहर को स्मार्ट बनाने की दिशा में काम शुरू हो जाएगा। फिलहाल अभी एसपीवी (स्पेशल पर्पज वीकल) बनाने पर काम किया जाएगा। इसके बाद प्रपोजल के अनुसार एस्टिमेट तैयार कर डीपीआर बनाने का काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पांच साल में 2600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसमें से 500-500 करोड़ रुपये की सहायता केंद्र और राज्य सरकार देगी। शेष राशि की व्यवस्था नगर निगम को करनी होगी।
पहले चरण में टॉप-20 की सूची से फरीदाबाद बाहर हो गया था। उस समय जिले को 47.86 प्रतिशत नंबर ही मिले थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने फिर से अलग-अलग राज्यों के 23 शहरों को फास्ट ट्रैक शहरों की सूची में जगह दी और उन्हें दोबारा से अपने प्रपोजल में सुधार लाने को कहा।
फास्ट ट्रैक प्रतियोगिता में निगम अधिकारियों ने अपने प्रपोजल और बेहतर बनाकर पेश किए
इस फास्ट ट्रैक प्रतियोगिता में निगम अधिकारियों ने अपने प्रपोजल और बेहतर बनाकर पेश किए। इसमें करीब 12 प्रतिशत का सुधार हुआ। इसी के साथ शहर स्मार्ट शहर की सूची में शामिल हो गया।
निगमायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि नए प्रपोजल में क्षेत्र आधारित विकास के लिए 2108 करोड़ रुपये, स्मार्ट मोबिलिटी इनिशिएटिव के लिए 377.67 करोड़ रुपये, स्मार्ट तथा टिकाऊ नागरिक अवसंरचना की पहल के लिए 543.63 करोड़ रुपये, स्मार्ट शहरीकरण के लिए 1186.70 करोड़ रुपये तथा पैन-सिटी सोल्यूशन के लिए 469.68 करोड़ का कुल प्रस्तावित व्यय शामिल है।
नए प्रपोजल में प्रस्तावित व्यय
2108 करोड़ क्षेत्र आधारित विकास के लिए
377.67 करोड़ स्मार्ट मोबिलिटी इनिशिएटिव के लिए
543.63 करोड़ स्मार्ट तथा टिकाऊ नागरिक अवसंरचना के लिए
1186.70 करोड़ स्मार्ट शहरीकरण के लिए
469.68 करोड़ पैन-सिटी सोल्यूशन के लिए
ऐसे बनेगा शहर स्मार्ट:
निगमायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि इस बार रेट्रोफिटिंग के तहत आवासीय, वाणिज्कि, संस्थागत, औद्योगिक, मलिन बस्तियों और शहरी गांवों को आकर्षित करने के लिए फ्रेंड्स कॉलोनी तथा कारखाना बाग समेत सेक्टर- 20 के साथ लगती 1267 एकड़ का क्षेत्र, संत नगर तथा अजरौंदी गांव समेत सेक्टर- 20 ए, गांव फतेहपुर चंदेला समेत सेक्टर- 21 बी, साथ लगती कॉलोनियों एसजीएम नगर एफ तथा जी ब्लॉक और इंदरा एन्कलेव, समेत सेक्टर- 21 डी, शास्त्री कॉलोनी, गोपी कॉलोनी, शिव कॉलोनी, राजा गार्डन, बाबा नगर, एनएच-5 निशुन हट, समेत सेक्टर- 19 के विकास का प्रस्ताव है।
इसमें 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित लगभग 37000 की आबादी है। यह सभी इलाके नेशनल हाईवे और रेलवे लाइन के नजदीक हैं। अगले पांच वर्षों में इन क्षेत्रों को पूरी तरह से स्मार्ट शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।
ये मिलेगी सुविधा:
24 घंटे बिजली और पानी की सुविधा
शहर में उचित ट्रांसपोटेशन की व्यवस्था
सड़कों के साथ फुटपाथ की व्यवस्था
पब्लिक यातायात की सुगमता
शहर के चारों ओर पर्याप्त हरियाली की व्यवस्था
शहर में स्मार्ट पुलिस स्टेशन की व्यवस्था
यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर रहेगा जोर:
यहां पैन सिटी प्रपोजल के तहत विकास होगा। इसके अंदर यातायात और पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम को शामिल किया गया है। क्योंकि शहर के ज्यादातर लोगों ने ट्रैफिक व पार्किंग व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया था। स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी डीआर भास्कर ने बताया कि पूरे शहर में बेहतरीन पार्किंग बनाई जाएंगी।
यहां स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को लागू किया जाएगा। इसमें 120 से अधिक सीसीटीवी कैमरे प्रमुख स्थानों व चौराहों पर लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रपोजल में पांच साल में 26 सौ करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। जिसमें से पहले साल नगर निगम के पास केंद्र सरकार की तरफ से 198 करोड़ रुपये की राशि आएगी।
राज्य सरकार भी 200 करोड़ रुपये देगी। इससे एस्टिमेट तैयार किया जाएगा। इस एस्टिमेट को सरकार के पास भेजा जाएगा, जहां से फिर से अगली किस्त जारी होगी। अगले चार साल तक 100-100 करोड़ रुपये केंद्र एवं राज्य सरकार देगी। अर्थात सरकारों की ओर से कुल 1000 करोड़ रुपये जारी किये जाएंगे। शेष 1600 करोड़ रुपये एसपीवी अपने स्तर से व्यवस्था करेगी।