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नगर निगम के 25 अधिकारियों को नोटिस
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फरीदाबाद। मुख्यमंत्री मनोहरलाल के आदेश के बाद नगर निगम में हुए करीब 50 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच तेज हो गई है। विजिलेंस विभाग ने शक के दायरे में आ रहे निगम के करीब 25 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिए कहा है। जांच में शामिल न होने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। इससे अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं।
नगर निगम में बिना काम के ठेकेदारों को 50 करोड़ का भुगतान घोटाले की जांच जारी है। पिछले दिन जांच में गड़बड़ी करने वाले करीब छह अधिकारियों व कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। हाल ही में 10 अप्रैल को फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की बैठक में पहुंचने पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भी घोटाले की जांच में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। इसके बाद विजिलेंस विभाग ने अब अपनी जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब पूरे शहर में 2014 से 2020 तक कराए गए सभी विकास कार्यों और ठेकेदार को हुए भुगतान की जांच की जा रही है। नगर निगम सूत्रों के अनुसार, जिन निगम अधिकारियों को नोटिस जारी किया है, उनमें कनिष्ठ अभियंता (जेई), उपमंडल अधिकारी (एसडीओ), कार्यकारी अभियंता तक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कई सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। हालांकि विजिलेंस जांच में बीते वर्षों अलग-अलग डिविजन में तैनात रहे अधिकारियों से भी पूछताछ की जानकारी मिली है।
इसमें वाउचर में हस्ताक्षर किसके हैं, यह भी खंगाला जा रहा है। संभावना है कि हकीकत और कागजी कार्रवाई में अंतर की जांच पड़ताल के लिए विजिलेंस मौके पर जाकर जांच पड़ताल की तैयारी में है। अभी तक विजिलेंस वर्ष 2017 से साल 2020 तक हुए कार्यों की जांच कर रही थी, लेकिन विभाग को आशंका है कि इनमें और बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है। इसलिए विभाग ने सरकार से अनुमति लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस बारे में विजिलेंस के अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हैं। इस संबंध जानकारी के लिए विजिलेंस डीएसपी कैलाश चंद से बात करने की बात की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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नगर निगम में बिना काम के ठेकेदारों को 50 करोड़ का भुगतान घोटाले की जांच जारी है। पिछले दिन जांच में गड़बड़ी करने वाले करीब छह अधिकारियों व कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। हाल ही में 10 अप्रैल को फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की बैठक में पहुंचने पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भी घोटाले की जांच में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। इसके बाद विजिलेंस विभाग ने अब अपनी जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब पूरे शहर में 2014 से 2020 तक कराए गए सभी विकास कार्यों और ठेकेदार को हुए भुगतान की जांच की जा रही है। नगर निगम सूत्रों के अनुसार, जिन निगम अधिकारियों को नोटिस जारी किया है, उनमें कनिष्ठ अभियंता (जेई), उपमंडल अधिकारी (एसडीओ), कार्यकारी अभियंता तक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कई सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। हालांकि विजिलेंस जांच में बीते वर्षों अलग-अलग डिविजन में तैनात रहे अधिकारियों से भी पूछताछ की जानकारी मिली है।
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इसमें वाउचर में हस्ताक्षर किसके हैं, यह भी खंगाला जा रहा है। संभावना है कि हकीकत और कागजी कार्रवाई में अंतर की जांच पड़ताल के लिए विजिलेंस मौके पर जाकर जांच पड़ताल की तैयारी में है। अभी तक विजिलेंस वर्ष 2017 से साल 2020 तक हुए कार्यों की जांच कर रही थी, लेकिन विभाग को आशंका है कि इनमें और बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है। इसलिए विभाग ने सरकार से अनुमति लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस बारे में विजिलेंस के अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हैं। इस संबंध जानकारी के लिए विजिलेंस डीएसपी कैलाश चंद से बात करने की बात की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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