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निगम के पास डेंगू पर काबू पाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं
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फरीदाबाद। शहर में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अभी तक डेंगू के कुल 149 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया वार्ड फुल चल रहे हैं। शहर में फॉगिंग की जिम्मेदारी नगर निगम के पास होती है, लेकिन नगर निगम के पास डेंगू पर जीत हासिल करने के लिए पर्याप्त संसाधन ही उपलब्ध नहीं है।
निगम कर्मचारियों के पास 10 साल पुरानी जापानी मशीनें हैं, जो फॉगिंग करते हुए ही खराब हो जाती है। ऐसे में फॉगिंग के बीच में ही उसको मैकेनिक के पास ले जाकर ठीक कराना पड़ता है। निगम के पास कुल 9 मशीनें हैं। इनमें तीन बड़ी और छह छोटी मशीनें हैं। अब नगर निगम के एमओएच ब्रांच ने 12 नई मशीनें खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है।
नगर निगम के हेल्थ ब्रांच की मानें तो साल 2010 में स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम को यह जापानी मशीनें सौंपी थी। दोबारा फॉगिंग करने वाली इन मशीनों को नहीं खरीदा गया। मशीनें खराब हो जाती है तो रिपेयर करवाया जाता है। इसके बाद फॉगिंग करवाई जाती है। बड़ी मशीन की कीमत पांच लाख रुपये तक है। निगम के पास इन मशीनों को चलाने के लिए वाहन भी नहीं है। मशीन को बाइक के पीछे बांधकर फॉगिंग की जाती है। एक कर्मचारियों ने बताया कि बाइक पर बांधकर चलाने से मशीन में कोई न कोई फॉल्ट आ जाता है। निगम के हेल्थ अधिकारी डॉ. नीतिश परवाल ने बताया कि निगम एक साथ 12 मशीनें खरीदना अभी संभव नहीं है। बेहतर होगा कि निजी एजेंसी ने मशीनों हायर भी किया जा सकता है। साल में एक ही बार इन मशीनों का प्रयोग किया जाता है। वहीं हायर करने पर मशीन को ठीक करने की जिम्मेदारी भी निजी एजेंसी की होगी। उन्होंने कहा कि नई मशीनों को लेने के लिए कार्रवाई चल रही है। वहीं जरूरी जगहों पर फॉगिंग कराई जा रही है।
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निगम कर्मचारियों के पास 10 साल पुरानी जापानी मशीनें हैं, जो फॉगिंग करते हुए ही खराब हो जाती है। ऐसे में फॉगिंग के बीच में ही उसको मैकेनिक के पास ले जाकर ठीक कराना पड़ता है। निगम के पास कुल 9 मशीनें हैं। इनमें तीन बड़ी और छह छोटी मशीनें हैं। अब नगर निगम के एमओएच ब्रांच ने 12 नई मशीनें खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है।
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नगर निगम के हेल्थ ब्रांच की मानें तो साल 2010 में स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम को यह जापानी मशीनें सौंपी थी। दोबारा फॉगिंग करने वाली इन मशीनों को नहीं खरीदा गया। मशीनें खराब हो जाती है तो रिपेयर करवाया जाता है। इसके बाद फॉगिंग करवाई जाती है। बड़ी मशीन की कीमत पांच लाख रुपये तक है। निगम के पास इन मशीनों को चलाने के लिए वाहन भी नहीं है। मशीन को बाइक के पीछे बांधकर फॉगिंग की जाती है। एक कर्मचारियों ने बताया कि बाइक पर बांधकर चलाने से मशीन में कोई न कोई फॉल्ट आ जाता है। निगम के हेल्थ अधिकारी डॉ. नीतिश परवाल ने बताया कि निगम एक साथ 12 मशीनें खरीदना अभी संभव नहीं है। बेहतर होगा कि निजी एजेंसी ने मशीनों हायर भी किया जा सकता है। साल में एक ही बार इन मशीनों का प्रयोग किया जाता है। वहीं हायर करने पर मशीन को ठीक करने की जिम्मेदारी भी निजी एजेंसी की होगी। उन्होंने कहा कि नई मशीनों को लेने के लिए कार्रवाई चल रही है। वहीं जरूरी जगहों पर फॉगिंग कराई जा रही है।
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