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सेक्टर-8 से 17 तक काटे गए सैकड़ों पेड़

Wed, 03 Mar 2021 10:56 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 10:56 PM IST
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no. of trees cut from sector 8 to sector 17 for expressway
बाईपास रोड किनारे एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए काटे गए पेड़। - फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। दिल्ली-बड़ौदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए बाईपास किनारे ग्रीन बेल्ट में पेड़ों की कटाई की जा रही है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकारण (एचएसवीपी) की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जहां-जहां जगह उपलब्ध करवाई जानी है, वहां अवैध निर्माण सहित पेड़ों की कटाई की जा रही है। काम में तेजी लाने के लिए सेक्टर-8 से 17 तक सैकड़ों पेड़ों को अभी तक काटा जा चुका है। वहीं, अगले सप्ताह फिर अवैध निर्माण ढहाने के लिए बाईपास रोड सहित सेक्टर-2, 3 और 4 पर एक बार फिर से प्राधिकरण कार्रवाई की तैयारी में है।
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एचएसवीपी फिलहाल अवैध निर्माण ढहाने के लिए निशानदेही में जुटा है। इन कब्जों के कारण एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू ही नहीं हो सका है। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद दाएं-बाएं सरकारी जमीन की हिफाजत के लिए सुरक्षा दीवार बनाने की योजना है, जिससे कब्जाधारक एक्सप्रेस-वे की ओर न बढ़ सकें। प्रथम चरण में सुरक्षा दीवार ऐसी जगह बनाई जाएगी, जहां अवैध निर्माण होने की आशंका सबसे अधिक होगी। जिले से निकलने वाले प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे की राह में फिलहाल ऐतमादपुर, सेक्टर-28 और सेक्टर-9 के सामने बड़ौली में काफी अवैध निर्माण हैं।
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एचएसवीपी के प्रशासक प्रदीप दहिया की भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों से इस जगह पर दीवार बनाने के लिए बात हुई है। इसके साथ ही सेक्टर-8 से लेकर सेक्टर-17 रोज गार्डन तक बाईपास रोड किनारे सैकड़ों पेड़ों को काटकर जगह खाली करवाई गई है।
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एक्सप्रेस-वे को तीन हिस्सों में बांटा गया है। इसका पहला हिस्सा डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू होकर मीठापुर तक नौ किलोमीटर, दूसरा मीठापुर से मलरेना पुल तक 24 किलोमीटर और तीसरा मलेरना पुल से सोहना तक 26 किलोमीटर होगा। तीनों हिस्से के तहत जमीन अधिग्रहण की जा चुकी है। बाईपास को 12 लेन बनाने के लिए एनएचएआई अधिकारियों को कुल 70 मीटर जगह चाहिए। इससे कम में योजना सिरे नहीं चढ़ सकेगी। लेकिन फिलहाल कई जगह बड़े स्तर पर निर्माण बने हुए हैं। इसलिए अभी परेशानी बनी हुई है। बाईपास पर जहां-जहां जगह खाली है वह एनएचएआई को सौंप दी गई है।
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