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Faridabad News: कूड़ा प्रबंधन के नए मॉडल से बदलेगी फरीदाबाद की सूरत
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फरीदाबाद से रोजाना निकलता है 900 टन कचरा
निगम ने 22 से अधिक सोसाइटियों में शुरू करवा दिया है कचरा निस्तारण
बंधवाड़ी लैंडफिल से कम होगा कचरा का बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर को साफ-सुथरा बनाने और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए नगर निगम अब कूड़ा प्रबंधन का नया मॉडल लागू करने जा रहा है। निगम ने अपना फोकस अब बल्क वेस्ट जनरेटर्स यानी बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों पर कर दिया है।
इसके तहत निगम विशेषज्ञ निजी एजेंसियों को सूचीबद्ध करेगा जो सीधे संस्थानों से कचरा उठाएंगी उसे अलग-अलग करेंगी और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करेंगी। अधिकारियों का मानना है कि अगर इन बड़े कचरा उत्पादकों की व्यवस्था सुधर गई तो पूरे शहर की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव दिखेगा। फरीदाबाद से रोजाना करीब 900 टन कचरा निकलता है लेकिन फिलहाल केवल लगभग 250 टन का ही जिले में निस्तारण हो पा रहा है। बाकी कचरा जिले से बाहर बंधवाडी में भिजवाना पड़ रहा है। खासकर एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और ग्रेटर फरीदाबाद के कई इलाकों में सड़क किनारे कूड़े के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं। यही वजह है कि निगम ने अब घरों के साथ-साथ संस्थानों पर भी सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है।
निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा के निर्देश पर फिलहाल 22 से अधिक बड़ी सोसाइटियों में सोसाइटी परिसर के भीतर ही कूड़ा निस्तारण का काम शुरू किया जा चुका है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुसार जो भी संस्थान रोजाना 100 किलो से ज्यादा कचरा पैदा करते हैं वे बल्क वेस्ट जनरेटर माने जाते हैं। इनमें अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, होटल, बड़े बाजार, फैक्ट्रियां, सरकारी दफ्तर और हाउसिंग सोसाइटियां शामिल हैं। अब तक इनमें से ज्यादातर जगहों पर कचरा अलग-अलग नहीं किया जाता था जिससे पूरा कचरा मिलकर डंपिंग साइट तक पहुंचता था। नई व्यवस्था में यह तस्वीर बदलेगी।
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घर से लेकर संस्थान तक, अलग-अलग कचरा
नई योजना के तहत सूचीबद्ध एजेंसियां तय समय पर संस्थानों से कचरा उठाएंगी। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि कचरा वहीं अलग-अलग किया जाएगा गीला अलग, सूखा अलग और घरेलू खतरनाक कचरा अलग। इसके लिए अलग-अलग गाड़ियों का इस्तेमाल होगा। हर वाहन में जीपीएस लगाया जाएगा ताकि निगम यह देख सके कि गाड़ी कहां है और कचरा सही जगह जा रहा है या नहीं। इससे मनमानी और लापरवाही पर लगाम लगेगी।
कचरे से बनेगी खाद और गैस
निगम की योजना सिर्फ कचरा उठाने तक सीमित नहीं है। जिन सोसाइटियों और संस्थानों के पास जगह होगी, वहां कम्पोस्टिंग यूनिट या बायोगैस प्लांट लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी, जिसका इस्तेमाल पार्कों और बागवानी में हो सकेगा। कुछ जगहों पर बायोगैस से ऊर्जा भी पैदा की जा सकेगी। यह पहल पर्यावरण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।
खुले में कचरा जलाने पर रोक
नए नियमों के तहत कचरा ले जाने वाले वाहनों को पूरी तरह ढककर चलाना होगा ताकि रास्ते में कूड़ा न गिरे और बदबू न फैले। खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। नियम तोड़ने वाली एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इससे शहर की हवा और मिट्टी दोनों को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी। इस व्यवस्था से सोसाइटियों के लोगों को बड़ा फायदा होगा। उन्हें कचरा उठवाने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निगम द्वारा प्रमाणित एजेंसियां ही यह काम करेंगी। जीपीएस निगरानी के कारण पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। इसके साथ ही सफाई कर्मियों को पीपीई किट, दस्ताने और मास्क दिए जाएंगे ताकि उनकी सेहत सुरक्षित रहे। आम लोगों के लिए इसका सीधा फायदा यह होगा कि शहर में खुले कूड़े के ढेर कम होंगे बदबू घटेगी और बीमारियों का खतरा भी कम होगा।
सख्त निगरानी, गलती पर होगी कार्रवाई
नगर निगम के अधिकारी किसी भी समय एजेंसियों के वाहनों, प्लांट और कामकाज की जांच कर सकेंगे। अगर कोई एजेंसी तय मानकों पर खरी नहीं उतरती है तो उसका अनुबंध तुरंत रद्द किया जा सकता है। निगम का कहना है कि यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जमीन पर भी दिखेगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू हुई तो फरीदाबाद सच में साफ और व्यवस्थित शहर बन सकता है।
वर्जन
लोगों की सुविधाओं के लिए निगम हर स्तर पर काम कर रहा है। जल्द ही इस परियोजना को भी शुरू कर दिया जाएगा। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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निगम ने 22 से अधिक सोसाइटियों में शुरू करवा दिया है कचरा निस्तारण
बंधवाड़ी लैंडफिल से कम होगा कचरा का बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर को साफ-सुथरा बनाने और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए नगर निगम अब कूड़ा प्रबंधन का नया मॉडल लागू करने जा रहा है। निगम ने अपना फोकस अब बल्क वेस्ट जनरेटर्स यानी बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों पर कर दिया है।
इसके तहत निगम विशेषज्ञ निजी एजेंसियों को सूचीबद्ध करेगा जो सीधे संस्थानों से कचरा उठाएंगी उसे अलग-अलग करेंगी और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करेंगी। अधिकारियों का मानना है कि अगर इन बड़े कचरा उत्पादकों की व्यवस्था सुधर गई तो पूरे शहर की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव दिखेगा। फरीदाबाद से रोजाना करीब 900 टन कचरा निकलता है लेकिन फिलहाल केवल लगभग 250 टन का ही जिले में निस्तारण हो पा रहा है। बाकी कचरा जिले से बाहर बंधवाडी में भिजवाना पड़ रहा है। खासकर एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और ग्रेटर फरीदाबाद के कई इलाकों में सड़क किनारे कूड़े के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं। यही वजह है कि निगम ने अब घरों के साथ-साथ संस्थानों पर भी सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है।
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निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा के निर्देश पर फिलहाल 22 से अधिक बड़ी सोसाइटियों में सोसाइटी परिसर के भीतर ही कूड़ा निस्तारण का काम शुरू किया जा चुका है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुसार जो भी संस्थान रोजाना 100 किलो से ज्यादा कचरा पैदा करते हैं वे बल्क वेस्ट जनरेटर माने जाते हैं। इनमें अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, होटल, बड़े बाजार, फैक्ट्रियां, सरकारी दफ्तर और हाउसिंग सोसाइटियां शामिल हैं। अब तक इनमें से ज्यादातर जगहों पर कचरा अलग-अलग नहीं किया जाता था जिससे पूरा कचरा मिलकर डंपिंग साइट तक पहुंचता था। नई व्यवस्था में यह तस्वीर बदलेगी।
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घर से लेकर संस्थान तक, अलग-अलग कचरा
नई योजना के तहत सूचीबद्ध एजेंसियां तय समय पर संस्थानों से कचरा उठाएंगी। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि कचरा वहीं अलग-अलग किया जाएगा गीला अलग, सूखा अलग और घरेलू खतरनाक कचरा अलग। इसके लिए अलग-अलग गाड़ियों का इस्तेमाल होगा। हर वाहन में जीपीएस लगाया जाएगा ताकि निगम यह देख सके कि गाड़ी कहां है और कचरा सही जगह जा रहा है या नहीं। इससे मनमानी और लापरवाही पर लगाम लगेगी।
कचरे से बनेगी खाद और गैस
निगम की योजना सिर्फ कचरा उठाने तक सीमित नहीं है। जिन सोसाइटियों और संस्थानों के पास जगह होगी, वहां कम्पोस्टिंग यूनिट या बायोगैस प्लांट लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी, जिसका इस्तेमाल पार्कों और बागवानी में हो सकेगा। कुछ जगहों पर बायोगैस से ऊर्जा भी पैदा की जा सकेगी। यह पहल पर्यावरण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।
खुले में कचरा जलाने पर रोक
नए नियमों के तहत कचरा ले जाने वाले वाहनों को पूरी तरह ढककर चलाना होगा ताकि रास्ते में कूड़ा न गिरे और बदबू न फैले। खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। नियम तोड़ने वाली एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इससे शहर की हवा और मिट्टी दोनों को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी। इस व्यवस्था से सोसाइटियों के लोगों को बड़ा फायदा होगा। उन्हें कचरा उठवाने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निगम द्वारा प्रमाणित एजेंसियां ही यह काम करेंगी। जीपीएस निगरानी के कारण पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। इसके साथ ही सफाई कर्मियों को पीपीई किट, दस्ताने और मास्क दिए जाएंगे ताकि उनकी सेहत सुरक्षित रहे। आम लोगों के लिए इसका सीधा फायदा यह होगा कि शहर में खुले कूड़े के ढेर कम होंगे बदबू घटेगी और बीमारियों का खतरा भी कम होगा।
सख्त निगरानी, गलती पर होगी कार्रवाई
नगर निगम के अधिकारी किसी भी समय एजेंसियों के वाहनों, प्लांट और कामकाज की जांच कर सकेंगे। अगर कोई एजेंसी तय मानकों पर खरी नहीं उतरती है तो उसका अनुबंध तुरंत रद्द किया जा सकता है। निगम का कहना है कि यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जमीन पर भी दिखेगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू हुई तो फरीदाबाद सच में साफ और व्यवस्थित शहर बन सकता है।
वर्जन
लोगों की सुविधाओं के लिए निगम हर स्तर पर काम कर रहा है। जल्द ही इस परियोजना को भी शुरू कर दिया जाएगा। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त