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आपकी कुर्सी सलामत है साहब.. हमारी खिसक रही है

Mon, 01 Mar 2021 11:02 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 11:02 PM IST
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nagar nigam budget pass in faridabad
फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। नगर निगम की बजट बैठक में पार्षद अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में दिखे। पार्षद बोले, चार साल से विकास कार्य नहीं हुए हैं। अगले साल निगम के चुनाव हैं, लोगों को क्या मुंह दिखाएंगे।
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निगम का बजट पास करने के लिए प्रत्येक वार्ड के विकास के लिए दो करोड़ रुपये का प्रावधान कराने की शर्त रखी गई। चार साल तो बिना काम के भी कुर्सी बची रही। अब अगर वार्ड विकास के लिए दो करोड़ नहीं मिले तो जनता को मुंह दिखाना भारी पड़ा जाएगा। इस पर वरिष्ठ उपमहापौर देवेंद्र चौधरी ने कहा कि जनाब दो करोड़ का प्रावधान करना पड़ेगा। जनता पिछले दुखड़े भूल जाएगी लेकिन यह साल चुनाव तय करेगा। इस दौरान पार्षदों ने अधिकारियों से क्रॉस प्रश्न करने शुरू किए तो निगमायुक्त ने झड़का दिया। निगमायुक्त यशपाल यादव बोले, मीडिया को देख कर कुछ भी न बोलें, कुर्सी और नौकरी रहे न रहे बेइज्जती बर्दाश्त नहीं होगी।
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अधिकारियों की इज्जत पहले है। इस पर पार्षद बोले, अगले साल चुनाव है। इसका ध्यान रखते हुए निगम का बजट बनाएं। ऐसे तो बजट पास नहीं होने देंगे। पार्षदों का कहना था कि जब भी कोई विकास कार्य की फाइल देते हैं तो पूछा जाता है किस आर्थिक मद में यह काम होगा। इसके साथ ही फाइल अटका दी जाती है। चार साल से 40 में से 39 पार्षद के वार्ड में विकास कार्य नहीं हुए हैं। पार्षद असंतुष्ट हैं।
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निगम की आमदनी 100 रुपये, अपना खर्च 52 रुपये
एनआईटी विधायक ने नगर निगम में बिंदुवार कई खामी निकाली। बोले आप चार साल से इस छोटी सरकार का बजट पेश कर रहे हैं। आप बेहतर समझते हैं लेकिन मेरे जैसा आम नागरिक यह बढ़े तो कुछ समझ नहीं आता। आपका बजट 100 रुपये है, इसमें अपना ही खर्च 52 रुपये है। महज 48 रुपये में क्या विकास करेंगे। उन्होंने कहा पूरे साल के बजट में कहीं नहीं लिखा कि कितना कर्ज आपके सिर पर है। सीएम अनाउंसमेंट का पैसा नपा तुला होता है। 10 फीसदी प्रोजेक्ट अभी लंबित है, इसका पैसा खर्च कर दिया और निगम के बजट में प्रावधान करते हो, आप फंड का सीधे-सीधे डायवर्जन कर रहे हो जबकि इसका बजट सरकार पहले ही दे चुकी है। सीवरेज ढक्कन मेंटेनेंस राइट टू सर्विस में आता है, पवित्र जैसे बालक की मौत के बावजूद निगम के बजट में इसका कोई जिक्र नहीं। शर्म आती है कि शहर का ओडीएफ सर्टिफिकेट तक छिन गया। इसकी जवाबदेही तय करें।

24 गांव निगम में शामिल फिर भी उन्हें कुछ नहीं दिया
पार्षदों ने कहा कि कैसा बजट है, निगम की आय बढ़ाने के लिए 24 गांव मिले हैं। इनके विकास के लिए एक रुपये का प्रावधान नहीं। जबकि निगम उन गांवों के बैंक अकाउंट तक सीज कर चुका है। यही कारण है कि निगम में शामिल होने से गांव कतरा रहे हैं। भय में है। वरिष्ठ उपमहापौर देवेंद्र चौधरी ने कहा कि निगम यह तय करे कि जब तक इन गांवों को विकास नहीं मिलेगा तब तक गांवों के धन को हाथ न लगाया जाए।
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