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Faridabad News: एक बंदर को पकड़कर जंगल में छोड़ने पर मिलेंगे 1350 रुपये
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-,नगर पालिका ने बंदर पकड़वाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की
- शहर के लोगों को बंदरों के उत्पात से मिलेगी मुक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। पिछले दो दशकों से हथीन शहर के लोग बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके उत्पात से परेशान हैं। स्थिति यह बनी हुई है कि बंदरों का भय शहर के सभी 14 वार्डों में बना हुआ है। इस दाैरान एक दर्जन से अधिक घटनाएं घट चुकी हैं। बंदरों के भय से लोग अपने घरों की छतों तक पर नही चढ़ पाते हैं। बंदर मानवीय हाथों से फल ,सब्जियां एवं अन्य सामान छीन कर ले जाते हैं। इस कारण शहर एवं आसपास की 30 हजार से अधिक आबादी परेशान है।
बंदरों से मुक्ति के खर्च किए जांएगे 24 लाख 30 हजार रुपये
नगर पालिका ने नागरिकों को बंदरों से मुक्ति दिलाने के लिए अब कार्य योजना बनाई है। इसके तहत बंदरों को शहर से पकड़वा कर सरिस्का अलवर राजस्थान छुड़वाया जाएगा। नगर पालिका सचिव देवेंद्र कुमार ने बताया कि इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस योजना पर लगभग 24 लाख 30 हजार रुपये खर्च का अनुमान है। पालिका के जूनियर इंजीनियर अनीश खान ने बताया कि जो भी एजेंसी बंदर पकड़ने का ठेका लेगी उसको एक बंदर पकड़ने एवं उसको निर्धारित स्थान पर छोड़ने के लिए 1350 रुपये की धनराशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित एजेंसी को इस संबंध में सरकार द्वारा निर्धारित नियमों की भी पालना करनी होगी। नगर पालिका चेयरपर्सन रेणु लता के पति सुमित राजपूत ने बताया कि बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
दो साल पहले भी दिया गया था ठेका
उल्लेखनीय है कि दो साल पूर्व भी नगर पालिका ने जींद की एक एजेंसी को बंदर पकड़ने का ठेका दिया था। इसके तहत एक बंदर पकड़ने एवं कलेसर स्थित अभ्यारण्य में छोड़ने के लिए 1350 रुपये का भुगतान किया गया । इस अभियान के तहत एजेंसी ने शहर से लगभग 1200 बंदर पकड़कर कलेसर अभ्यारण्य में छोड़ा। इस पर नगर पालिका ने लगभग 15 लाख रुपये का बजट व्यय किया। इसके बावजूद बंदरों से मुक्ति नही मिल पाई। नगर पालिका सचिव देवेंद्र कुमार ने बताया कि इस बार नागरिकों को बंदरों के उत्पात से मुक्ति सुनश्चित कराई जाएगी।
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- शहर के लोगों को बंदरों के उत्पात से मिलेगी मुक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। पिछले दो दशकों से हथीन शहर के लोग बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके उत्पात से परेशान हैं। स्थिति यह बनी हुई है कि बंदरों का भय शहर के सभी 14 वार्डों में बना हुआ है। इस दाैरान एक दर्जन से अधिक घटनाएं घट चुकी हैं। बंदरों के भय से लोग अपने घरों की छतों तक पर नही चढ़ पाते हैं। बंदर मानवीय हाथों से फल ,सब्जियां एवं अन्य सामान छीन कर ले जाते हैं। इस कारण शहर एवं आसपास की 30 हजार से अधिक आबादी परेशान है।
बंदरों से मुक्ति के खर्च किए जांएगे 24 लाख 30 हजार रुपये
नगर पालिका ने नागरिकों को बंदरों से मुक्ति दिलाने के लिए अब कार्य योजना बनाई है। इसके तहत बंदरों को शहर से पकड़वा कर सरिस्का अलवर राजस्थान छुड़वाया जाएगा। नगर पालिका सचिव देवेंद्र कुमार ने बताया कि इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस योजना पर लगभग 24 लाख 30 हजार रुपये खर्च का अनुमान है। पालिका के जूनियर इंजीनियर अनीश खान ने बताया कि जो भी एजेंसी बंदर पकड़ने का ठेका लेगी उसको एक बंदर पकड़ने एवं उसको निर्धारित स्थान पर छोड़ने के लिए 1350 रुपये की धनराशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित एजेंसी को इस संबंध में सरकार द्वारा निर्धारित नियमों की भी पालना करनी होगी। नगर पालिका चेयरपर्सन रेणु लता के पति सुमित राजपूत ने बताया कि बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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दो साल पहले भी दिया गया था ठेका
उल्लेखनीय है कि दो साल पूर्व भी नगर पालिका ने जींद की एक एजेंसी को बंदर पकड़ने का ठेका दिया था। इसके तहत एक बंदर पकड़ने एवं कलेसर स्थित अभ्यारण्य में छोड़ने के लिए 1350 रुपये का भुगतान किया गया । इस अभियान के तहत एजेंसी ने शहर से लगभग 1200 बंदर पकड़कर कलेसर अभ्यारण्य में छोड़ा। इस पर नगर पालिका ने लगभग 15 लाख रुपये का बजट व्यय किया। इसके बावजूद बंदरों से मुक्ति नही मिल पाई। नगर पालिका सचिव देवेंद्र कुमार ने बताया कि इस बार नागरिकों को बंदरों के उत्पात से मुक्ति सुनश्चित कराई जाएगी।
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