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Faridabad News: प्रशस्त एप 2.0 से मानसिक और शारीरिक दिव्यांग बच्चों की होगी पहचान

Thu, 24 Jul 2025 07:23 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jul 2025 07:23 PM IST
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Mentally and physically handicapped children will be identified through Prashast App 2.0
एससीईआरटी की ओर से 40 प्रश्नों की चेक लिस्ट की गई तैयार
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संवाद न्यूज एजेंसी


फरीदाबाद। मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चों का पता लगाने के लिए एससीईआरटी ने 40 प्रश्नों का एक प्रशस्त एप 2.0 (चेक लिस्ट) तैयार किया गया है। ष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से तैयार किए गए एप के माध्यम से शिक्षक यह पता लगा सकेंगे कि कक्षा में पढ़ रहा विद्यार्थी दिव्यांग है या नहीं।
अभी तक स्पेशल योग्यता वाले शिक्षक ही विद्यार्थी की काउंसिलिंग कर दिव्यांग का पता लगा पाते थे। अभी तक ऐसे विद्यार्थियों को पकड़ पाना मुश्किल होता था। इससे वह पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में पिछड़ जाते थे। इससे उन्हें मानसिक यातनाएं भी सहनी पड़ती हैं। इसके कारण विद्यार्थी गुस्सैल व सुनपन जैसी शिकायतों का शिकार हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि चेक लिस्ट के माध्यम से ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर उनका प्राथमिक उपचार किया जा सकता है।
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प्रशस्त एप 2.0 (चेक लिस्ट) को तीन चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षक नजर रखेंगे, जो चेक लिस्ट की मदद से प्राथमिक चरण में विद्यार्थी की दिव्यांगता की पहचान करेगा। दूसरे चरण में इसे स्कूल के प्राचार्य को भेजा जाएगा। इसकी समीक्षा करने के बाद बीआरसी के पास भेजा जाएगा। वह अपने स्तर पर समीक्षा कर बच्चे की रिपोर्ट तैयार कर विशेषज्ञ के पास भेजेंगे। इसके आधार पर विशेषज्ञ योग्यता के पहचान करने वाले शिक्षक के पास भेजा जाएगा, जो विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कर उनका काउंसिलिंग करेंगे।
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मास्टर ट्रेनर किया जाएगा तैयार
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से पहले प्रशस्त एप 2.0 को चलाने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किया जाएगा। जो खंड और जिला स्तर के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।


वर्जन
विभाग की ओर से शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए कई योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इसी क्रम में यह एप शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की क्षमता को पहचानना है। अगर वह किसी प्रकार के दबाव में हैं तो उसे पहचान कर उसे दूर करना है। - अशोक कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी।


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