{"_id":"621124a3539a38770f2ef130","slug":"mbbs-students-will-learn-the-nuances-of-operation-by-watching-the-ot-process-on-the-screen-faridabad-news-noi633160185","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्क्रीन पर ओटी प्रक्रिया देख ऑपरेशन की बारीकियां सीखेंगे एमबीबीएस छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्क्रीन पर ओटी प्रक्रिया देख ऑपरेशन की बारीकियां सीखेंगे एमबीबीएस छात्र
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एमबीबीएस के छात्र स्क्रीन पर ओटी प्रक्रिया देखकर ऑपरेशन की बारीकियां सीख सकेंगे। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन की ओर से कैथलैब के बाहर स्क्रीन लगाने की तैयारियां शुरू कर दी गई है। वहीं एक सप्ताह में 15 मरीजों को सफल स्टंट लगाए गए हैं।
एनआईटी-3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में करीब 500 एमबीबीएस के छात्र पढ़ते हैं। कॉलेज प्रबंधन की ओर से अस्पताल में लगातार सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में अस्पताल में ह्दय रोगियों के लिए विश्वस्तरीय कर्डियक कैथलैब की सुविधा शुरू की गई है। एक सप्ताह में 15 मरीजों के सफल ऑपरेशन किए गए। वहीं कैथलैब के बाहर बने कक्ष में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जिससे मरीज के तीमारदार लाइव ऑपरेशन को देख सकें। किसी भी अस्पताल में इस तरह की सुविधा पहली बाहर ईएसआईसी में शुरू की गई है।
छात्र लाइव देखेंगे ऑपरेशन
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल पांडे ने बताया कि कैथ लैब के बाहर बने वेटिंग एरिया (कक्ष) में स्क्रीन लगाने का उद्देश्य एमबीबीएस कर रहे छात्रों को प्रक्रिया के दौरान सीधे कैथ लैब में प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। ऐसे वह बाहर लगी स्क्रीन पर देखकर ऑपरेशन की बारीकियां सीखेंगे। इसके साथ ही मरीज के परिजन भी इन्हें देख सकेंगे। उन्हें अपने मरीज की हर स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
विज्ञापन
रेफरल में आई कमी
ईएसआईसी में कैथ लैब नहीं होने के कारण पहले ह्दय रोगियों को निजी अस्पताल रेफर कर दिया जाता था। इससे एक ओर जहां मरीजों को दो अस्पतालों के बीच काफी भागदौड़ करनी पड़ती थी। वहीं ईएसआईसी द्वारा निजी अस्पतालों को इलाज के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान करना पड़ता था। डॉक्टरों ने बताया कि यहां कैथ लैब शुरू होने से मरीजों के रेफरल में कमी आनी शुरू हो गई है।
अस्पताल में शुरू की गई कैथलैब का छात्रों के साथ मरीजों को भी लाभ मिलेगा। छात्र लाइव प्रक्रिय देख सकेंगे।
- प्रो. डॉ. अनिल पांडे, रजिस्ट्रार, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एंव अस्पताल
विज्ञापन
एनआईटी-3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में करीब 500 एमबीबीएस के छात्र पढ़ते हैं। कॉलेज प्रबंधन की ओर से अस्पताल में लगातार सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में अस्पताल में ह्दय रोगियों के लिए विश्वस्तरीय कर्डियक कैथलैब की सुविधा शुरू की गई है। एक सप्ताह में 15 मरीजों के सफल ऑपरेशन किए गए। वहीं कैथलैब के बाहर बने कक्ष में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जिससे मरीज के तीमारदार लाइव ऑपरेशन को देख सकें। किसी भी अस्पताल में इस तरह की सुविधा पहली बाहर ईएसआईसी में शुरू की गई है।
विज्ञापन
छात्र लाइव देखेंगे ऑपरेशन
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल पांडे ने बताया कि कैथ लैब के बाहर बने वेटिंग एरिया (कक्ष) में स्क्रीन लगाने का उद्देश्य एमबीबीएस कर रहे छात्रों को प्रक्रिया के दौरान सीधे कैथ लैब में प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। ऐसे वह बाहर लगी स्क्रीन पर देखकर ऑपरेशन की बारीकियां सीखेंगे। इसके साथ ही मरीज के परिजन भी इन्हें देख सकेंगे। उन्हें अपने मरीज की हर स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
विज्ञापन
रेफरल में आई कमी
ईएसआईसी में कैथ लैब नहीं होने के कारण पहले ह्दय रोगियों को निजी अस्पताल रेफर कर दिया जाता था। इससे एक ओर जहां मरीजों को दो अस्पतालों के बीच काफी भागदौड़ करनी पड़ती थी। वहीं ईएसआईसी द्वारा निजी अस्पतालों को इलाज के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान करना पड़ता था। डॉक्टरों ने बताया कि यहां कैथ लैब शुरू होने से मरीजों के रेफरल में कमी आनी शुरू हो गई है।
अस्पताल में शुरू की गई कैथलैब का छात्रों के साथ मरीजों को भी लाभ मिलेगा। छात्र लाइव प्रक्रिय देख सकेंगे।
- प्रो. डॉ. अनिल पांडे, रजिस्ट्रार, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एंव अस्पताल