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बेघर हुए काफी लोगों को नहीं मिल रहा भोजन-पानी
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फरीदाबाद। नगर निगम द्वारा सुप्रीम कोर्ट के गांव खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही बेघर हुए लोगों के लिए राधास्वामी सतसंग आश्रम में अस्थायी जगह दी गई है। प्रशासन का दावा लोगों को आश्रम में भोजन के साथ उनके ठहरने तक की पूरी व्यवस्था है। लेकिन हकीकत इससे परे है। कई लोगों को मुख्य द्वार से सुरक्षाकर्मियों द्वारा वापस लौटा दिया जा रहा है। खोरी गांव में इससे लोग खाने तक के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
नगर निगम की ओर खोरी गांव में तीन दिन से तोड़फोड़ की जा रही है। अब तक करीब 1500 मकानों को ढहाया जा चुका है। इस दौरान कई लोग आशियाना टूटने के बाद किराये के मकान में चले गए। वहीं अनेक लोग अभी भी अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। लोग अपने जमीन पर तंबू लगाकर किसी प्रकार रह रहे हैं। हालांकि निगम की ओर से बेघर हुए लोगों के लिए सूरजकुंड चौक स्थित राधास्वामी सत्संग आश्रम में जगह दी गई है। उपायुक्त यशपाल यादव का कहना है कि लोग अस्थायी तौर पर यहां पांच से 10 दिन के लिए रह सकते हैं। उनके लिए खाने-पीने का पूरा प्रबंधक आश्रम में किया गया है।
शनिवार को जब अमर उजाला की टीम मौका पर पहुंची तो स्थिति कुछ और देखने को मिली। आश्रम में शरण लेने पहुंचे लोगों को मुख्य द्वारा पर से ही सुरक्षा कर्मी आश्रम के मुख्य द्वार से ही वापस लौटा रहे थे। सुरक्षा कर्मियों को जब यह बताया कि मीडिया से हैं और प्रशासन द्वारा आश्रम में लोगों को दी जा रही सुविधाओं को देखना है तो सुरक्षा कर्मी ने कहा मीडिया का आश्रम में प्रवेश वर्जित है। कुछ लोगों ने कहा कि आश्रम में रखने के लिए इंतजाम देखने आए थे। लेकिन, अंदर रहने के लिए इंतजाम नहीं है।
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लोगों से बातचीत
मजदूरी कर के किसी तरह बच्चों का पेट भर रहे थे। वह काम भी कोरोना महामारी की वजह से काफी समय से बंद था। रहने के लिए एक छत थी। वह भी सरकार से छीन ली।, लेकिन हम अपनी जमीन छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। - रामनाथ, स्थानीय निवासी
घर टूटने के साथ ही खाने पीने की बड़ी समस्या हो गई है। पानी की सबसे ज्यादा समस्या है। प्रशासन द्वारा गांव में पानी भेजा जाता है। लेकिन जब तक टैंकर पर पहुंचते हैं। वह चला जाता है। भीषण गर्मी में पानी तक के लिए तरसना पड़ रहा है। - मनोज सिंह, स्थानीय निवासी
आश्रम में प्रशासन द्वारा सुविधाओं नाम की दी जा रही है। रुकने के लिए अंदर न ठीक से व्यवस्था है और न पंखे है। गर्मी में लोग परेशान है।
- आरजू खातून, स्थानीय निवासी
पुनर्वास योजना के तहत दिए जा रहे फ्लैट के आवेदन करनी आई हूं। सुरक्षा कर्मी ने फॉर्म नहीं भरे जाने की बात बोल कर वापस लौटा दिया। - रिजवाना बेगम, स्थानीय निवासी
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नगर निगम की ओर खोरी गांव में तीन दिन से तोड़फोड़ की जा रही है। अब तक करीब 1500 मकानों को ढहाया जा चुका है। इस दौरान कई लोग आशियाना टूटने के बाद किराये के मकान में चले गए। वहीं अनेक लोग अभी भी अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। लोग अपने जमीन पर तंबू लगाकर किसी प्रकार रह रहे हैं। हालांकि निगम की ओर से बेघर हुए लोगों के लिए सूरजकुंड चौक स्थित राधास्वामी सत्संग आश्रम में जगह दी गई है। उपायुक्त यशपाल यादव का कहना है कि लोग अस्थायी तौर पर यहां पांच से 10 दिन के लिए रह सकते हैं। उनके लिए खाने-पीने का पूरा प्रबंधक आश्रम में किया गया है।
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शनिवार को जब अमर उजाला की टीम मौका पर पहुंची तो स्थिति कुछ और देखने को मिली। आश्रम में शरण लेने पहुंचे लोगों को मुख्य द्वारा पर से ही सुरक्षा कर्मी आश्रम के मुख्य द्वार से ही वापस लौटा रहे थे। सुरक्षा कर्मियों को जब यह बताया कि मीडिया से हैं और प्रशासन द्वारा आश्रम में लोगों को दी जा रही सुविधाओं को देखना है तो सुरक्षा कर्मी ने कहा मीडिया का आश्रम में प्रवेश वर्जित है। कुछ लोगों ने कहा कि आश्रम में रखने के लिए इंतजाम देखने आए थे। लेकिन, अंदर रहने के लिए इंतजाम नहीं है।
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लोगों से बातचीत
मजदूरी कर के किसी तरह बच्चों का पेट भर रहे थे। वह काम भी कोरोना महामारी की वजह से काफी समय से बंद था। रहने के लिए एक छत थी। वह भी सरकार से छीन ली।, लेकिन हम अपनी जमीन छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। - रामनाथ, स्थानीय निवासी
घर टूटने के साथ ही खाने पीने की बड़ी समस्या हो गई है। पानी की सबसे ज्यादा समस्या है। प्रशासन द्वारा गांव में पानी भेजा जाता है। लेकिन जब तक टैंकर पर पहुंचते हैं। वह चला जाता है। भीषण गर्मी में पानी तक के लिए तरसना पड़ रहा है। - मनोज सिंह, स्थानीय निवासी
आश्रम में प्रशासन द्वारा सुविधाओं नाम की दी जा रही है। रुकने के लिए अंदर न ठीक से व्यवस्था है और न पंखे है। गर्मी में लोग परेशान है।
- आरजू खातून, स्थानीय निवासी
पुनर्वास योजना के तहत दिए जा रहे फ्लैट के आवेदन करनी आई हूं। सुरक्षा कर्मी ने फॉर्म नहीं भरे जाने की बात बोल कर वापस लौटा दिया। - रिजवाना बेगम, स्थानीय निवासी