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Faridabad News: बड़ी परियोजनाएं तैयार, संचालन का इंतजार
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बड़खल झील, दयालपुर-अरुआ का नर्सिंग कॉलेज और मोहना बस अड्डा बनने के बाद भी नहीं मिल रही सुविधा
कहीं निर्माण पूरा होने के बाद भी हस्तांतरण नहीं हुआ तो कहीं संचालन की जिम्मेदारी और शुल्क तय नहीं हो सका
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई शहर की बड़ी परियोजनाएं सुविधाओं के बजाय शोपीस बनकर रह गई हैं। कहीं निर्माण पूरा होने के बाद भी हस्तांतरण नहीं हुआ तो कहीं संचालन की जिम्मेदारी और शुल्क तय नहीं हो सका। करीब 100 करोड़ रुपये से विकसित बड़खल झील, 93 करोड़ से तैयार दयालपुर-अरुआ के नर्सिंग कॉलेज और 3.16 करोड़ रुपये से बना मोहना बस अड्डा इसका उदाहरण हैं। वहीं ओल्ड फरीदाबाद की बहुमंजिला पार्किंग भी तैयार होने के बावजूद नियमित संचालन का इंतजार कर रही है।
पर्यटन विभाग ने अब तक बड़खल झील नहीं ली अपने अधीन
सरकार ने बड़खल झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद परियोजना का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। स्मार्ट सिटी की ओर से झील के पुनर्जीवन, विकास और सौंदर्यीकरण का काम पूरा कर दिया गया है, लेकिन पर्यटन विभाग ने अब तक इसका हस्तांतरण नहीं लिया है। ऐसे में तैयार सुविधाएं नियमित इस्तेमाल से बाहर हैं। गौरतलब है कि अरावली की तलहटी में 42 एकड़ में फैली झील को पुनर्जीवित करने का काम वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। स्मार्ट सिटी मिशन के प्रबंधक वीर सिंह ने बताया कि पर्यटन विभाग को कई बार पत्राचार किया है। अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
उद्घाटन के बाद भी नर्सिंग कॉलेज में कक्षाएं नहीं हुईं शुरू
दयालपुर और अरुआ में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सरकारी नर्सिंग कॉलेज भवन तैयार होने के बावजूद विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं हो सके हैं। दयालपुर कॉलेज के निर्माण पर करीब 45 करोड़ और अरुआ कॉलेज पर करीब 47.44 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। दोनों संस्थानों का वर्ष 2025 में उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन हस्तांतरण की प्रक्रिया अटकी होने के कारण अब तक कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के अधीक्षण अभियंता संदीप दहिया ने बताया कि हस्तांतरण के लिए स्वास्थ्य विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है, अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।
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बस अड्डा बना, सुविधा नहीं मिली
ग्रामीणों और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देने के लिए 3.16 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया मोहना बस अड्डा तैयार होने के बावजूद उपयोग में नहीं आ रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने बस अड्डे का निर्माण पूरा कर दिया है, लेकिन हरियाणा रोडवेज ने अब तक इसे अपने नियंत्रण में नहीं लिया है। इसके चलते करीब 20 गांवों के यात्रियों को अभी भी सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। बस अड्डा बनने के बाद यात्रियों को धूप, बारिश और सर्दी से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हस्तांतरण नहीं होने से यह सुविधा शुरू नहीं हो सकी। विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ रविंद्र ने बताया कि हरियाणा रोडवेज को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। रोडवेज के अधिकारी कई बार दौरा भी कर चुके है लेकिन हस्तांतरण नहीं हो सका है।
पार्किंग तैयार शुल्क तय नहीं होने से संचालन अधूरा
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत ओल्ड फरीदाबाद में करीब 60 करोड़ की लागत से बनी चार मंजिला पार्किंग तैयार है और इसे एचएसवीपी को हस्तांतरित किया जा चुका है। पार्किंग में करीब 100 कार खड़ी हो सकती हैं। छह कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है, लेकिन पार्किंग शुल्क तय नहीं होने के कारण इसका विधिवत संचालन शुरू नहीं हो सका है। वर्ष 2024 में इसका उद्घाटन किया गया था। स्मार्ट सिटी मिशन के प्रबंधक वीर सिंह ने बताया कि अब पार्किंग स्थल पर वाहनों को खड़ा करने के लिए शुल्क एचएसवीपी की ओर से तय किया जाएगा। शुल्क निर्धारित होने और संचालन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्किंग को विधिवत रूप से लोगों के लिए शुरू किया जाएगा।
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कहीं निर्माण पूरा होने के बाद भी हस्तांतरण नहीं हुआ तो कहीं संचालन की जिम्मेदारी और शुल्क तय नहीं हो सका
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई शहर की बड़ी परियोजनाएं सुविधाओं के बजाय शोपीस बनकर रह गई हैं। कहीं निर्माण पूरा होने के बाद भी हस्तांतरण नहीं हुआ तो कहीं संचालन की जिम्मेदारी और शुल्क तय नहीं हो सका। करीब 100 करोड़ रुपये से विकसित बड़खल झील, 93 करोड़ से तैयार दयालपुर-अरुआ के नर्सिंग कॉलेज और 3.16 करोड़ रुपये से बना मोहना बस अड्डा इसका उदाहरण हैं। वहीं ओल्ड फरीदाबाद की बहुमंजिला पार्किंग भी तैयार होने के बावजूद नियमित संचालन का इंतजार कर रही है।
पर्यटन विभाग ने अब तक बड़खल झील नहीं ली अपने अधीन
सरकार ने बड़खल झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद परियोजना का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। स्मार्ट सिटी की ओर से झील के पुनर्जीवन, विकास और सौंदर्यीकरण का काम पूरा कर दिया गया है, लेकिन पर्यटन विभाग ने अब तक इसका हस्तांतरण नहीं लिया है। ऐसे में तैयार सुविधाएं नियमित इस्तेमाल से बाहर हैं। गौरतलब है कि अरावली की तलहटी में 42 एकड़ में फैली झील को पुनर्जीवित करने का काम वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। स्मार्ट सिटी मिशन के प्रबंधक वीर सिंह ने बताया कि पर्यटन विभाग को कई बार पत्राचार किया है। अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
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उद्घाटन के बाद भी नर्सिंग कॉलेज में कक्षाएं नहीं हुईं शुरू
दयालपुर और अरुआ में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सरकारी नर्सिंग कॉलेज भवन तैयार होने के बावजूद विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं हो सके हैं। दयालपुर कॉलेज के निर्माण पर करीब 45 करोड़ और अरुआ कॉलेज पर करीब 47.44 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। दोनों संस्थानों का वर्ष 2025 में उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन हस्तांतरण की प्रक्रिया अटकी होने के कारण अब तक कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के अधीक्षण अभियंता संदीप दहिया ने बताया कि हस्तांतरण के लिए स्वास्थ्य विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है, अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।
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बस अड्डा बना, सुविधा नहीं मिली
ग्रामीणों और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देने के लिए 3.16 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया मोहना बस अड्डा तैयार होने के बावजूद उपयोग में नहीं आ रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने बस अड्डे का निर्माण पूरा कर दिया है, लेकिन हरियाणा रोडवेज ने अब तक इसे अपने नियंत्रण में नहीं लिया है। इसके चलते करीब 20 गांवों के यात्रियों को अभी भी सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। बस अड्डा बनने के बाद यात्रियों को धूप, बारिश और सर्दी से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हस्तांतरण नहीं होने से यह सुविधा शुरू नहीं हो सकी। विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ रविंद्र ने बताया कि हरियाणा रोडवेज को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। रोडवेज के अधिकारी कई बार दौरा भी कर चुके है लेकिन हस्तांतरण नहीं हो सका है।
पार्किंग तैयार शुल्क तय नहीं होने से संचालन अधूरा
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत ओल्ड फरीदाबाद में करीब 60 करोड़ की लागत से बनी चार मंजिला पार्किंग तैयार है और इसे एचएसवीपी को हस्तांतरित किया जा चुका है। पार्किंग में करीब 100 कार खड़ी हो सकती हैं। छह कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है, लेकिन पार्किंग शुल्क तय नहीं होने के कारण इसका विधिवत संचालन शुरू नहीं हो सका है। वर्ष 2024 में इसका उद्घाटन किया गया था। स्मार्ट सिटी मिशन के प्रबंधक वीर सिंह ने बताया कि अब पार्किंग स्थल पर वाहनों को खड़ा करने के लिए शुल्क एचएसवीपी की ओर से तय किया जाएगा। शुल्क निर्धारित होने और संचालन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्किंग को विधिवत रूप से लोगों के लिए शुरू किया जाएगा।