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संकट में जान: लाखों गंवाने के बाद ठगा महसूस कर रहे डूब क्षेत्र के निवासी

Sat, 25 Nov 2023 12:08 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Nov 2023 12:08 AM IST
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Lives in trouble: Residents of Doob area feeling cheated after losing lakhs
-डूब क्षेत्र में अतिक्रमण-किसी ने पांच लाख तो किसी ने 15 लाख तक गवाएं
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-यमुना में बाढ़ का पानी आने पर रहता है जान का खतरा
संदीप वर्मा
फरीदाबाद। दिल्ली के वेलकम क्षेत्र में वर्ष परिवार सहित किराए पर फरीदा रहती थी। फरीदा का पति निजाम दिल्ली की एक कंपनी में कार चालक है। किराए से तंग आकर वह मकान ढूंढ रहे थे। एक दिन उनकी मुलाकात बसंतपुर के एक कालोनाइजर से हुई तो लगा कि उनका घर का सपना सच हो गया। फरीदा ने 2022 में बसंतपुर गांव के डूब क्षेत्र में 40 वर्ग गज की जमीन पर साढ़े पांच लाख रुपये में घर ले लिया।
कालोनाइजर ने उसे बताया था कि जल्द ही एक और पुश्ता बनने वाला है, जिससे यहां पर यमुना का पानी नहीं आएगा। बारिश का मौसम आया और रात में ही यमुना का पानी तेजी से घर में घुसने लगा। किसी तरह से वह अपने पति और चार बच्चों के साथ जान बचाकर भागे। बसंतपुर गांव के बने पुश्ते पर किसी तरह से उन्होंने रात गुजारी और बाद में एक राहत कैंप में लगभग डेढ़ महीने तक अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहे। डूब क्षेत्र में केवल फरीदा ही नहीं बसंतपुर डूब क्षेत्र की नन्हींवती, सबदार अली, दादसिया गांव के डूब क्षेत्र की परिमेश देवी, जीतेश श्रीवास्तव जैसे हजारों की संख्या में लोगों को कालोनाइजरों ने अपनी बातों के जाल में फसाकर मकान बेच दिए। बारिश के दौरान यमुना का विकराल रूप देखकर उनको अपनी गलती का अहसास होता है।
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25 हजार परिवार हो चुके शिकार
दिल्ली से होते हुए पलवल के अगवानपुर-मेघपुर तक यमुना का किनारा करीब 23 किलोमीटर है। इस दौरान करीब 23 से अधिक गांवों के डूब क्षेत्र में जमकर अवैध निर्माण हुआ है। इनमें से अधिकतर गांवों के डूब क्षेत्र में अवैध कालोनियां का निर्माण लगातार जारी है। लगभग 25 हजार से अधिक परिवारों को अब तक कालोनाइजर ठग कर इन डूब क्षेत्रों में बसा चुके हैं।
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दो महीने के लिए किराए पर रहने चले जाते हैं
मॉनसून के दौरान बाढ़ का खतरा बना रहता है। बसंतपुर के डूब क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यमुना का पानी अक्सर पांच से छह फुट तक ही आता है। इसी वर्ष 2023 में यह करीब डेढ़ मंजिल तक आ गया। ऐसे में लोगों ने किसी तरह से प्रशासन से गुहार लगाकर जान बचाई। डूब क्षेत्र के लोग अक्सर मॉनसून के दौरान पानी के आने के पहले ही घर छोड़ जाते हैं। इस दौरान दो माह के लिए कहीं किराए पर घर लेकर रहते हैं।
स्वयं घरों को बनाने का लेते हैं ठेका
कालोनाइजर लोगों को किश्तों में पैसा भरने का लालच देते हैं। शुरूआत में 5100 रुपये से 10000 रुपये देने पर भी कालोनी में मकान दे देते हैं। एक बार पैसा फस जाने पर वापस नहीं मिलता। कालोनाइजर यमुना का पानी रोकने के लिए तरह-तरह की सरकार की ओर से झूठी योजनाओं का जाल फैलाकर उनसे पैसा वसूल लेते हैं। घर मिलने का सब्जबाग दिखाकर लोगों को अपने जाल में फसा लेते हैं।

भयावह हो जाती है यमुना
डूब क्षेत्र में बाढ़ आने पर यमुना अपने रौद्र रूप में दिखती है। ऐसे में यदि पहले से लोग अपने घरों से नहीं निकलते तो पानी भरने से घरों का राशन और सामान बर्बाद हो जाता है। लोगों का कहना है कि जान बच जाए तो वही बड़ी बात होती है।
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