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Faridabad News: अल्ट्रासाउंड के लिए समय कम...भीड़ ज्यादा
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जिला नागरिक अस्पताल में लंबी कतारों में बीत रहा है मरीजों का दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा सुविधा शुरू किए जाने के बाद उम्मीद थी कि मरीजों को निजी केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, लेकिन मौजूदा हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। सीमित समय, लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या और अव्यवस्थित प्रबंधन के चलते मरीजों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सुबह से ही अस्पताल परिसर में लंबी कतारें लग जाती हैं, जो दोपहर तक भी खत्म नहीं होतीं।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए निर्धारित समय 9 से 3 बजे का है, जोकि मरीजों की संख्या को देखते हुए काफी कम है। इसके कारण सभी मरीजों की जांच एक ही दिन में नहीं हो पाती। इससे खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अधिक परेशानी होती है। कई मरीजों ने बताया कि वे सुबह जल्दी अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी उनका नंबर नहीं आता। ऐसे में उन्हें अगले दिन फिर से लाइन में लगना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।
दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। कई मरीजों को किराया खर्च करके बार-बार अस्पताल आना पड़ता है। इसके अलावा, अस्पताल में मशीनों की सीमित संख्या और डॉक्टरों की उपलब्धता में कमी भी समस्या को बढ़ा रही है। कई बार तकनीकी कारणों या स्टाफ की कमी के चलते जांच प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे कतारें और लंबी हो जाती हैं।
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मरीजों का कहना है कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कोई स्पष्ट प्रणाली लागू नहीं है। टोकन सिस्टम या डिजिटल डिस्प्ले जैसी सुविधाओं का अभाव होने के कारण मरीजों को यह तक जानकारी नहीं मिल पाती कि उनका नंबर कब आएगा। इससे लाइन में खड़े लोगों के बीच असमंजस और नाराजगी का माहौल बना रहता है। कई मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट नियम के कुछ लोगों को प्राथमिकता दे दी जाती है।
मैं सुबह 9 बजे से लाइन में लगी हूं, लेकिन दोपहर तक भी नंबर नहीं आया। अब कहा जा रहा है कि कल आना पड़ेगा।-निशा, गाजीपुर कॉलोनी
इतनी गर्मी में घंटों खड़े रहना पड़ता है, फिर भी जांच नहीं हो पाती, इससे बहुत परेशानी हो रही है।-रतना, सेक्टर-4
गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन यहां सबको एक ही लाइन में खड़ा किया जाता है।-नीलम, एसी नगर
गौंछी से आया हूं, लेकिन बिना जांच कराए ही लौटना पड़ रहा है, यह बहुत निराशाजनक है।-प्रमोद, गौंछी
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे दबाव बन रहा है। हम व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही समय बढ़ाने तथा अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा सुविधा शुरू किए जाने के बाद उम्मीद थी कि मरीजों को निजी केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, लेकिन मौजूदा हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। सीमित समय, लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या और अव्यवस्थित प्रबंधन के चलते मरीजों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सुबह से ही अस्पताल परिसर में लंबी कतारें लग जाती हैं, जो दोपहर तक भी खत्म नहीं होतीं।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए निर्धारित समय 9 से 3 बजे का है, जोकि मरीजों की संख्या को देखते हुए काफी कम है। इसके कारण सभी मरीजों की जांच एक ही दिन में नहीं हो पाती। इससे खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अधिक परेशानी होती है। कई मरीजों ने बताया कि वे सुबह जल्दी अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी उनका नंबर नहीं आता। ऐसे में उन्हें अगले दिन फिर से लाइन में लगना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।
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दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। कई मरीजों को किराया खर्च करके बार-बार अस्पताल आना पड़ता है। इसके अलावा, अस्पताल में मशीनों की सीमित संख्या और डॉक्टरों की उपलब्धता में कमी भी समस्या को बढ़ा रही है। कई बार तकनीकी कारणों या स्टाफ की कमी के चलते जांच प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे कतारें और लंबी हो जाती हैं।
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मरीजों का कहना है कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कोई स्पष्ट प्रणाली लागू नहीं है। टोकन सिस्टम या डिजिटल डिस्प्ले जैसी सुविधाओं का अभाव होने के कारण मरीजों को यह तक जानकारी नहीं मिल पाती कि उनका नंबर कब आएगा। इससे लाइन में खड़े लोगों के बीच असमंजस और नाराजगी का माहौल बना रहता है। कई मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट नियम के कुछ लोगों को प्राथमिकता दे दी जाती है।
मैं सुबह 9 बजे से लाइन में लगी हूं, लेकिन दोपहर तक भी नंबर नहीं आया। अब कहा जा रहा है कि कल आना पड़ेगा।-निशा, गाजीपुर कॉलोनी
इतनी गर्मी में घंटों खड़े रहना पड़ता है, फिर भी जांच नहीं हो पाती, इससे बहुत परेशानी हो रही है।-रतना, सेक्टर-4
गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन यहां सबको एक ही लाइन में खड़ा किया जाता है।-नीलम, एसी नगर
गौंछी से आया हूं, लेकिन बिना जांच कराए ही लौटना पड़ रहा है, यह बहुत निराशाजनक है।-प्रमोद, गौंछी
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे दबाव बन रहा है। हम व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही समय बढ़ाने तथा अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी