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बीके सिविल अस्पताल में डॉक्टरों का अभाव : हड्डियों के ऑपरेशन की मशीन सालों से खराब, ओपीडी में नहीं कोई फिजिशियन, इमरजेंसी में भी कमी
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Lack of doctors in BK: Bone operation machine deteriorated for years, no physician in OPD
फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। सिविल अस्पताल बीके में डॉक्टरों का अभाव है। इमरजेंसी, ओपीडी और आईसीयू में डॉक्टरों की कमी होने के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को दिल्ली सफदरजंग रेफर कर दिया जाता है। इससे कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों को जान जाने का खतरा भी बना रहता है। सिविल अस्पताल बीके शहरी क्षेत्र के अलावा भारी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों में मरीज खांसी, बुखार, हृदय रोगी, दिमागी, हड्डी रोग सहित अन्य बीमारियों के इलाज के लिए लोग पहुंचते हैं। अस्पताल में 55 डॉक्टरों की पोस्ट है। इनमें से 48 कार्यरत है। इसके अलावा करीब 100 स्थायी नर्सिंग स्टाफ की जरूरत है, लेकिन 22 ही कार्यरत है। मजबूूर वश अस्पताल को छांयसा कॉलोनी की 80 नर्सिंग स्टाफ की मदद से काम चलाना पड़ रहा है।
ओपीडी की बात करें यहां चार फिजिशियन डॉक्टरों की जरूरत है लेकिन अस्पताल में एक भी फिजिशियन नहीं है। ऐसे में खांसी, जुखाम, बुखार के मरीजों का इलाज टीबी के डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है। वहीं, इमरजेंसी में कम से कम आठ डॉक्टर होने चाहिए। वहां कुल चार डॉक्टर कार्यरत है। इनमें से करीब एक डॉक्टर की ड्यूटी पोस्टमार्टम हाउस में रहती है। एक डॉक्टर छुट्टी पर रहता है। केवल दो डॉक्टरों के सहारे इमरजेंसी में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। ऐसे में यदि कोई सड़क दुर्घटना या अन्य किसी बीमारी का गंभीर मरीज इलाज के लिए आ जाता है तो उनको दिल्ली के अस्पताल एम्स, सफदरजंग या फिर रोहतक के पीजीआई में रेफर करना पड़ता है। वहीं, हड्डियों के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली सीआर्म सिविल अस्पताल बीके में कई साल से खराब है। ऐसे में हड्डियों के ऑपरेशन करने में डॉक्टरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मजबूरी वश कई बार डॉक्टरों को मरीजों को दूसरे अस्पताल में रेफर करना पड़ता है।
15 बेड के आईसीयू के लिए नहीं मिल रहे डॉक्टर
बीके अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर में 15 बेड का स्थायी आईसीयू बनाया गया था। अब इसमें आईसीयू बेड सहित वेंटीलेटर की संख्या बढ़ाकर करीब 42 कर दी गई है। लेकिन इन्हें चलाने के लिए उपयुक्त डॉक्टर और स्टाफ नहीं है। अस्पताल परिसर में करीब सौ बेड का अस्थाई अस्पताल बनाया गया है। इसे पूर्ण रूप से संचालित करने के लिए 10 वरिष्ठ डॉक्टर, 20 डीजीएमओ, 40 नर्सिंग स्टाफ, चार फार्मेसी और चार रेडियोलॉजिस्ट सहित 186 स्टाफ की स्वास्थ्य विभाग से मांग की गई है लेकिन यह भी नहीं मिले।
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ओपीडी की बात करें यहां चार फिजिशियन डॉक्टरों की जरूरत है लेकिन अस्पताल में एक भी फिजिशियन नहीं है। ऐसे में खांसी, जुखाम, बुखार के मरीजों का इलाज टीबी के डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है। वहीं, इमरजेंसी में कम से कम आठ डॉक्टर होने चाहिए। वहां कुल चार डॉक्टर कार्यरत है। इनमें से करीब एक डॉक्टर की ड्यूटी पोस्टमार्टम हाउस में रहती है। एक डॉक्टर छुट्टी पर रहता है। केवल दो डॉक्टरों के सहारे इमरजेंसी में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। ऐसे में यदि कोई सड़क दुर्घटना या अन्य किसी बीमारी का गंभीर मरीज इलाज के लिए आ जाता है तो उनको दिल्ली के अस्पताल एम्स, सफदरजंग या फिर रोहतक के पीजीआई में रेफर करना पड़ता है। वहीं, हड्डियों के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली सीआर्म सिविल अस्पताल बीके में कई साल से खराब है। ऐसे में हड्डियों के ऑपरेशन करने में डॉक्टरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मजबूरी वश कई बार डॉक्टरों को मरीजों को दूसरे अस्पताल में रेफर करना पड़ता है।
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15 बेड के आईसीयू के लिए नहीं मिल रहे डॉक्टर
बीके अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर में 15 बेड का स्थायी आईसीयू बनाया गया था। अब इसमें आईसीयू बेड सहित वेंटीलेटर की संख्या बढ़ाकर करीब 42 कर दी गई है। लेकिन इन्हें चलाने के लिए उपयुक्त डॉक्टर और स्टाफ नहीं है। अस्पताल परिसर में करीब सौ बेड का अस्थाई अस्पताल बनाया गया है। इसे पूर्ण रूप से संचालित करने के लिए 10 वरिष्ठ डॉक्टर, 20 डीजीएमओ, 40 नर्सिंग स्टाफ, चार फार्मेसी और चार रेडियोलॉजिस्ट सहित 186 स्टाफ की स्वास्थ्य विभाग से मांग की गई है लेकिन यह भी नहीं मिले।
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