{"_id":"6a1496250d55fc7e0f03c7e8","slug":"kyrgyzstan-girl-gets-relief-from-vns-therapy-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-70813-2026-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: किर्गिस्तान की बच्ची को वीएनएस थेरेपी से मिली राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: किर्गिस्तान की बच्ची को वीएनएस थेरेपी से मिली राहत
विज्ञापन
मिर्गी के दौरे 90 प्रतिशत कम हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। निजी अस्पताल में किर्गिस्तान की 12 वर्षीय बच्ची का सफल इलाज कर उसे नई जिंदगी दी गई। बच्ची पिछले 7 से 8 वर्षों से गंभीर मिर्गी (एपिलेप्सी) की समस्या से जूझ रही थी और उसे रोजाना 10 से 15 बार दौरे पड़ते थे। ज्यादातर दौरे रात में आने के कारण परिवार को पूरी रात उसकी निगरानी करनी पड़ती थी।
भारत आने के बाद बच्ची ने अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉयरेक्टर एवं एचओडी डॉ. मुकेश पाण्डेय से परामर्श लिया। जांच में पता चला कि उसके मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में गड़बड़ी थी, जिसके कारण बार-बार मिर्गी के दौरे पड़ रहे थे। पीईटी-सीटी और एमआरआई जांच में बीमारी की पुष्टि हुई। बच्ची पहले से कई तरह की एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं ले रही थी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हो रहा था। बीमारी के कारण उसकी पढ़ाई, खेलकूद और सामान्य जीवन भी प्रभावित हो गया था।
इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने वेगस नर्व स्टिमुलेशन थेरेपी के जरिये इलाज किया। इस प्रक्रिया में छाती की त्वचा के नीचे एक विशेष बैटरी आधारित उपकरण लगाया जाता है, जो नियंत्रित विद्युत संकेतों के माध्यम से मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
विज्ञापन
इलाज के एक सप्ताह के भीतर बच्ची के दौरे करीब 90 प्रतिशत तक कम हो गए। सफल उपचार के बाद बच्ची और उसके परिवार ने राहत महसूस की है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। निजी अस्पताल में किर्गिस्तान की 12 वर्षीय बच्ची का सफल इलाज कर उसे नई जिंदगी दी गई। बच्ची पिछले 7 से 8 वर्षों से गंभीर मिर्गी (एपिलेप्सी) की समस्या से जूझ रही थी और उसे रोजाना 10 से 15 बार दौरे पड़ते थे। ज्यादातर दौरे रात में आने के कारण परिवार को पूरी रात उसकी निगरानी करनी पड़ती थी।
भारत आने के बाद बच्ची ने अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉयरेक्टर एवं एचओडी डॉ. मुकेश पाण्डेय से परामर्श लिया। जांच में पता चला कि उसके मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में गड़बड़ी थी, जिसके कारण बार-बार मिर्गी के दौरे पड़ रहे थे। पीईटी-सीटी और एमआरआई जांच में बीमारी की पुष्टि हुई। बच्ची पहले से कई तरह की एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं ले रही थी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हो रहा था। बीमारी के कारण उसकी पढ़ाई, खेलकूद और सामान्य जीवन भी प्रभावित हो गया था।
विज्ञापन
इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने वेगस नर्व स्टिमुलेशन थेरेपी के जरिये इलाज किया। इस प्रक्रिया में छाती की त्वचा के नीचे एक विशेष बैटरी आधारित उपकरण लगाया जाता है, जो नियंत्रित विद्युत संकेतों के माध्यम से मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
विज्ञापन
इलाज के एक सप्ताह के भीतर बच्ची के दौरे करीब 90 प्रतिशत तक कम हो गए। सफल उपचार के बाद बच्ची और उसके परिवार ने राहत महसूस की है।