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किसान आंदोलन बॉर्डर पर पंहुच गए तो मानो दिल्ली फतेह
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फरीदाबाद में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए किसानों को कुछ समय बाद वापिस छोड़ा।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे पलवल के किसान बदरपुर बॉर्डर तक पहुंचने का ही लक्ष्य लेकर चले हैं। किसान नेता दिल्ली नहीं जाना चाहते। उनका उद्देश्य है कि वह बदरपुर बॉर्डर पर जाकर वहां धरने पर बैठ जाएं। इससे केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बन सके। अन्य राज्यों से आए किसान ज्यादातर बॉर्डर एरिया में ही धरना दे रहे हैं। पलवल के किसान भी यही चाहते हैं। पुलिस को कहीं न कहीं यह अंदेशा है कि वे बॉर्डर तक शांत हैं, लेकिन उसके बाद मामला बिगड़ सकता है। इसलिए पुलिस ने किसानों को बड़खल चौक पर स्थित एक आश्रम के सामने ही रोक दिया है।
जिला प्रशासन चाहता है कि जल्द से जल्द केंद्र और किसानों के बीच कोई समझौता हो जाए और किसान बिना किसी बवाल के वापस लौट जाएं। केंद्र ने किसानों से बातचीत के लिए 9 दिसंबर की तारीख रखी है। इधर, किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का एलान कर दिया है। ऐसे में पुलिस के लिए आगे आने वाले दो तीन दिन काफी संवेदनशील हैं। यदि किसान बॉर्डर पर पहुंच गए और 9 दिसंबर की वार्ता भी फेल हो गई तो किसान उग्र हो सकते हैं। हालांकि, किसानों ने पुलिस व प्रशासन को यह भरोसा दिला रखा है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण ही रहेगा, लेकिन फिर भी पुलिस कोई जोखिम नही लेना चाहती।
बदरपुर बॉर्डर का इलाका काफी संकरा तो है ही, साथ ही वहां से लाखों वाहन आते जाते हैं। यदि बॉर्डर पर कुछ घंटे के लिए भी मामला बिगड़ा तो शहर पूरी तरह से जाम हो जाएगा। दिल्ली तक जाने के लिए बॉर्डर के पास से दूसरा कोई विकल्प नहीं है अगर बॉर्डर पर समस्या होती है तो एनएचपीसी चौक और बड़खल चौक से वाहनों को डाइवर्ट करके सूरजकुंड रोड से दिल्ली तरफ भेजना होगा लेकिन यह लंबा रूट है और इस पर डंपर काफी चलते है। यह रूट ज्यादा देर तक वाहनों का दबाव झेल नहीं पाएगा। (संवाद)
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पैदल मार्च से सरकार की जड़ें हिलने लगी हैं : सौरोत
किसानों का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत का कहना है कि उनके पैदल मार्च से सरकार की जड़ें हिलने लगी हैं। ऐसे में सरकार यह पूरी कोशिश कर रही है कि उन्हें बॉर्डर पर न पहुंचने दिया जाए। इसके लिए जानबूझकर पुलिस उनके रास्ते रोकने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि वह 45 किलोमीटर से पैदल चलकर आए हैं, अब जब बॉर्डर कुछ ही दूर बचा है तो वह पीछे कैसे हट सकते हैं। वह हर हाल में बॉर्डर पर अपना झंडा गाड़ कर रहेंगे। इसके बाद जितने दिन तक किसानों की बात नही मानी जाती उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
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जिला प्रशासन चाहता है कि जल्द से जल्द केंद्र और किसानों के बीच कोई समझौता हो जाए और किसान बिना किसी बवाल के वापस लौट जाएं। केंद्र ने किसानों से बातचीत के लिए 9 दिसंबर की तारीख रखी है। इधर, किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का एलान कर दिया है। ऐसे में पुलिस के लिए आगे आने वाले दो तीन दिन काफी संवेदनशील हैं। यदि किसान बॉर्डर पर पहुंच गए और 9 दिसंबर की वार्ता भी फेल हो गई तो किसान उग्र हो सकते हैं। हालांकि, किसानों ने पुलिस व प्रशासन को यह भरोसा दिला रखा है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण ही रहेगा, लेकिन फिर भी पुलिस कोई जोखिम नही लेना चाहती।
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बदरपुर बॉर्डर का इलाका काफी संकरा तो है ही, साथ ही वहां से लाखों वाहन आते जाते हैं। यदि बॉर्डर पर कुछ घंटे के लिए भी मामला बिगड़ा तो शहर पूरी तरह से जाम हो जाएगा। दिल्ली तक जाने के लिए बॉर्डर के पास से दूसरा कोई विकल्प नहीं है अगर बॉर्डर पर समस्या होती है तो एनएचपीसी चौक और बड़खल चौक से वाहनों को डाइवर्ट करके सूरजकुंड रोड से दिल्ली तरफ भेजना होगा लेकिन यह लंबा रूट है और इस पर डंपर काफी चलते है। यह रूट ज्यादा देर तक वाहनों का दबाव झेल नहीं पाएगा। (संवाद)
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पैदल मार्च से सरकार की जड़ें हिलने लगी हैं : सौरोत
किसानों का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत का कहना है कि उनके पैदल मार्च से सरकार की जड़ें हिलने लगी हैं। ऐसे में सरकार यह पूरी कोशिश कर रही है कि उन्हें बॉर्डर पर न पहुंचने दिया जाए। इसके लिए जानबूझकर पुलिस उनके रास्ते रोकने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि वह 45 किलोमीटर से पैदल चलकर आए हैं, अब जब बॉर्डर कुछ ही दूर बचा है तो वह पीछे कैसे हट सकते हैं। वह हर हाल में बॉर्डर पर अपना झंडा गाड़ कर रहेंगे। इसके बाद जितने दिन तक किसानों की बात नही मानी जाती उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।