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खोरी: पहले दस हजार का जुर्माना भरो, फिर मिलेगा बिजली कनेक्शन
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फरीदाबाद। खोरी गांव से विस्थापित पात्रों को डबुआ कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस फ्लैट दिए गए हैं। अब लोग यहां बिजली कनेक्शन लेकर रहना चाहता है लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एक पीड़ित ने बताया कि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। इसके बाद बिजली निगम से फोन आया कि उक्त फ्लैट पर करीब दस हजार रुपये बकाया हैं। पहले पैसे जमा कराना होगा, इसके बाद ही नया कनेक्शन मिलेगा।
नगर निगम मुख्यालय पर बृहस्पतिवार को पांच-छह खोरी विस्थापित अपनी समस्या लेकर मुख्य वास्तुकार के पास पहुंचे थे। हालांकि, अधिकारी के नहीं मिलने पर वापस चले गए। राजेश व अंकित ने बताया कि उन्हें टॉवर 16 के फ्लैट अलॉट हैं लेकिन उसमें बिजली, पानी और सीवर की समस्या है, इसलिए अभी वह उन फ्लैट में नहीं रह पा रहे हैं। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। उनका कहना है कि कई टॉवरों के फ्लैट में सही तरीके से काम नहीं हुआ है।
सीवर और पानी की लाइनें खराब पड़ी हैं। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। विस्थापित मो. वसीम हाशमी ने बताया कि टॉवर 16 में ग्राउंड फ्लोर अलॉट है। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। एक दिन पहले बिजली निगम से फोन आया कि उक्त फ्लैट पर करीब दस हजार रुपये बकाया हैं। ऐसे में पहले दस हजार रुपये जमा कराने होंगे, इसके बाद ही नया कनेक्शन मिलेगा। उनका कहना है कि फ्लैट तो निगम ने अलॉट किया है, ऐसे में पहले का बकाया वह क्यों दें। बताया जा रहा है कि पहले कुछ लोग अवैध रूप से बिजली कनेक्शन लेकर फ्लैट में रहते थे। जांच पर बिजली निगम ने जुर्माना लगाया हुआ है, जो पेडिंग है। इससे विस्थापितों को परेेशानी हो रही है।
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135 से जमा कराई राशि
फ्लैट में रहने के लिए विस्थापितों को पहले दस हजार रुपये जमा कराने हैं। अभी तक करीब 135 लोगों ने यह पैसे जमा कराए हैं। ऐसे में यह लोग बिजली का कनेक्शन लेकर फ्लैट में रह सकते हैं। सरकार ने एक फ्लैट की कीमत 3,77,500 रुपये रखी है। इसकी ईएमआई 1950 रुपये हर माह आएगी और बीस साल किश्त देनी है। आवंटी को पानी, सीवर व बिजली का बिल खुद देना होगा।
क्या है मामला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले साल जून में खोरी गांव में नगर निगम ने अवैैध निर्माणों पर कार्रवाई की थी। इस दौरान करीब 10 हजार मकानों को तोड़ दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव के विस्थापितों को पुनर्वास के तहत फ्लैट देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर हरियाणा सरकार ने पुनर्वास पॉलिसी बनाई। इसके तहत करीब पांच हजार से अधिक लोगों ने फ्लैट के लिए आवेदन किया था। पहले चरण में करीब 1009 लोगों को पात्र पाया गया। लोगों को डबुआ कॉलोनी में बने जर्जर ईडब्ल्यूएस फ्लैट ठीक कराकर दिए जा रहे हैं।
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खोरी विस्थापितों के लिए फ्लैट ठीक कराकर दिए जा रहे हैं। बिजली बिल बकाया होने की जानकारी नहीं है। इस समस्या को दूर कराया जाएगा।
सुरेंद्र खट्टर, एसडीओ नगर निगम
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नगर निगम मुख्यालय पर बृहस्पतिवार को पांच-छह खोरी विस्थापित अपनी समस्या लेकर मुख्य वास्तुकार के पास पहुंचे थे। हालांकि, अधिकारी के नहीं मिलने पर वापस चले गए। राजेश व अंकित ने बताया कि उन्हें टॉवर 16 के फ्लैट अलॉट हैं लेकिन उसमें बिजली, पानी और सीवर की समस्या है, इसलिए अभी वह उन फ्लैट में नहीं रह पा रहे हैं। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। उनका कहना है कि कई टॉवरों के फ्लैट में सही तरीके से काम नहीं हुआ है।
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सीवर और पानी की लाइनें खराब पड़ी हैं। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। विस्थापित मो. वसीम हाशमी ने बताया कि टॉवर 16 में ग्राउंड फ्लोर अलॉट है। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। एक दिन पहले बिजली निगम से फोन आया कि उक्त फ्लैट पर करीब दस हजार रुपये बकाया हैं। ऐसे में पहले दस हजार रुपये जमा कराने होंगे, इसके बाद ही नया कनेक्शन मिलेगा। उनका कहना है कि फ्लैट तो निगम ने अलॉट किया है, ऐसे में पहले का बकाया वह क्यों दें। बताया जा रहा है कि पहले कुछ लोग अवैध रूप से बिजली कनेक्शन लेकर फ्लैट में रहते थे। जांच पर बिजली निगम ने जुर्माना लगाया हुआ है, जो पेडिंग है। इससे विस्थापितों को परेेशानी हो रही है।
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135 से जमा कराई राशि
फ्लैट में रहने के लिए विस्थापितों को पहले दस हजार रुपये जमा कराने हैं। अभी तक करीब 135 लोगों ने यह पैसे जमा कराए हैं। ऐसे में यह लोग बिजली का कनेक्शन लेकर फ्लैट में रह सकते हैं। सरकार ने एक फ्लैट की कीमत 3,77,500 रुपये रखी है। इसकी ईएमआई 1950 रुपये हर माह आएगी और बीस साल किश्त देनी है। आवंटी को पानी, सीवर व बिजली का बिल खुद देना होगा।
क्या है मामला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले साल जून में खोरी गांव में नगर निगम ने अवैैध निर्माणों पर कार्रवाई की थी। इस दौरान करीब 10 हजार मकानों को तोड़ दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव के विस्थापितों को पुनर्वास के तहत फ्लैट देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर हरियाणा सरकार ने पुनर्वास पॉलिसी बनाई। इसके तहत करीब पांच हजार से अधिक लोगों ने फ्लैट के लिए आवेदन किया था। पहले चरण में करीब 1009 लोगों को पात्र पाया गया। लोगों को डबुआ कॉलोनी में बने जर्जर ईडब्ल्यूएस फ्लैट ठीक कराकर दिए जा रहे हैं।
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खोरी विस्थापितों के लिए फ्लैट ठीक कराकर दिए जा रहे हैं। बिजली बिल बकाया होने की जानकारी नहीं है। इस समस्या को दूर कराया जाएगा।
सुरेंद्र खट्टर, एसडीओ नगर निगम
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