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Faridabad News: जापान के उद्योगों को उड़ान देंगे जेसी बोस विवि के छात्र
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-कुशल पेशेवरों को जापान के उद्योगों से विवि ने रखा तीन-चरणीय कार्ययोजना का प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व औद्योगिक सहयोग को एक नई और व्यावहारिक दिशा देने के उद्देश्य से जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए ने ऐतिहासिक पहल की है। भारत के महावाणिज्य दूतावास (फुकुओका) की अनुशंसा पर जापान के फुकुओका प्रीफेक्चर के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विश्वविद्यालय का दौरा किया। इस दौरान ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में फुकुओका के उद्योगों के लिए कुशल पेशेवरों की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
यह पहल जापान सरकार के उस व्यापक लक्ष्य से जुड़ी है, जिसके तहत आगामी पांच वर्षों में 50,000 कुशल भारतीय पेशेवरों को जापान में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाने हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सचिव जनरल मिसावा रेइइचिरो सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने विश्वविद्यालय के साथ अनुसंधान व संस्थागत साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की। संवाद सत्र के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की रणनीतिक स्थिति और पूर्व छात्रों के मजबूत नेटवर्क की सराहना की। साथ ही विद्यार्थियों के लिए जापानी भाषा पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।
सेतु प्रस्ताव और तीन-चरणीय मॉडल
चर्चा के दौरान जेसी बोस विश्वविद्यालय ने औपचारिक रूप से स्ट्रैटेजिक एक्सचेंज फॉर टैलेंट एंड यूनिवर्सिटी (सेतू) का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके तहत विश्वविद्यालय स्वयं को हरियाणा में जापान के सहयोग के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित करेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने एक सुव्यवस्थित तीन-चरणीय प्रतिभा विकास मॉडल भी पेश किया। पहले चरण में जापानी उद्योगों में भारतीय छात्रों के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था की जाएगी। दूसरे चरण में कॉरपोरेट नेटवर्किंग और सीधे भर्ती (प्लेसमेंट) की प्रक्रिया होगी। अंतिम और तीसरे चरण में चयनित युवाओं के लिए जापान में दीर्घकालिक रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा।
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साझा सांस्कृतिक मूल्य और वैश्विक पहचान
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि वर्ष 1969 में भारत-जर्मनी संयुक्त परियोजना के रूप में स्थापित यह संस्थान कौशल विकास और नवाचार में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का जापान के एहिमे विश्वविद्यालय के साथ पहले से ही शैक्षणिक समझौता है। वहीं, जापानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख नाकानो शिन्या ने बताया कि फुकुओका में लगभग 400 सेमीकंडक्टर उद्योग कार्यरत हैं और यह क्षेत्र स्टार्टअप का बड़ा केंद्र है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व औद्योगिक सहयोग को एक नई और व्यावहारिक दिशा देने के उद्देश्य से जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए ने ऐतिहासिक पहल की है। भारत के महावाणिज्य दूतावास (फुकुओका) की अनुशंसा पर जापान के फुकुओका प्रीफेक्चर के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विश्वविद्यालय का दौरा किया। इस दौरान ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में फुकुओका के उद्योगों के लिए कुशल पेशेवरों की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
यह पहल जापान सरकार के उस व्यापक लक्ष्य से जुड़ी है, जिसके तहत आगामी पांच वर्षों में 50,000 कुशल भारतीय पेशेवरों को जापान में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाने हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सचिव जनरल मिसावा रेइइचिरो सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने विश्वविद्यालय के साथ अनुसंधान व संस्थागत साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की। संवाद सत्र के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की रणनीतिक स्थिति और पूर्व छात्रों के मजबूत नेटवर्क की सराहना की। साथ ही विद्यार्थियों के लिए जापानी भाषा पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।
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सेतु प्रस्ताव और तीन-चरणीय मॉडल
चर्चा के दौरान जेसी बोस विश्वविद्यालय ने औपचारिक रूप से स्ट्रैटेजिक एक्सचेंज फॉर टैलेंट एंड यूनिवर्सिटी (सेतू) का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके तहत विश्वविद्यालय स्वयं को हरियाणा में जापान के सहयोग के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित करेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने एक सुव्यवस्थित तीन-चरणीय प्रतिभा विकास मॉडल भी पेश किया। पहले चरण में जापानी उद्योगों में भारतीय छात्रों के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था की जाएगी। दूसरे चरण में कॉरपोरेट नेटवर्किंग और सीधे भर्ती (प्लेसमेंट) की प्रक्रिया होगी। अंतिम और तीसरे चरण में चयनित युवाओं के लिए जापान में दीर्घकालिक रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा।
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साझा सांस्कृतिक मूल्य और वैश्विक पहचान
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि वर्ष 1969 में भारत-जर्मनी संयुक्त परियोजना के रूप में स्थापित यह संस्थान कौशल विकास और नवाचार में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का जापान के एहिमे विश्वविद्यालय के साथ पहले से ही शैक्षणिक समझौता है। वहीं, जापानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख नाकानो शिन्या ने बताया कि फुकुओका में लगभग 400 सेमीकंडक्टर उद्योग कार्यरत हैं और यह क्षेत्र स्टार्टअप का बड़ा केंद्र है।