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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवसः इंटरव्यू फेज में मां के देहांत से टूटा मनोबल, खुद को संभाल बनीं आईएएस
Sat, 06 Mar 2021 06:48 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद (बल्लभगढ़)
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद (बल्लभगढ़)
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 06 Mar 2021 06:48 PM IST
सार
- माता पिता की इकलौती संतान हैं बल्लभगढ़ की एसडीएम अपराजिता
- बीआईटी मेश्रा से केमिकल इंजीनियर की
- यूपी के टिकारिया प्लांट में काम करने वाली वह एकमात्र महिला थी
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एसडीएम अपराजिता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सकारात्मकता के साथ जो भी काम करो, प्रकृति आपको मनोबल देगी। ये मानना है बल्लभगढ़ की एसडीएम अपराजिता का। अपराजिता ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा को तीसरे प्रयास में पास किया। मां बाप की इकलौती लाडली एक ओर अंतिम पड़ाव पार कर अधिकारी बनने के लिए जुटी हुई थीं कि मां का देहांत हो गया। तब अपराजिता इंटरव्यू फेज में थी।
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मां के देहांत से वे टूट गईं। सामर्थ्य मानो खत्म हो गया, लेकिन यह परीक्षा वह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए दे रही थीं। ऐसे में परिवार के लोगों सहित उनके पति ने उनके हौसलों को बढ़ाया। वे आगे बढ़ीं और अधिकारी बन गई।
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मूलरूप से बनारस निवासी अपराजिता ने कृष्णा मूर्ति फाउंडेशन से स्नातक की शिक्षा ली। बीआईटी मेश्रा से केमिकल इंजीनियर की। यहीं से सीमेंट निर्माता कंपनी एसीसी में कैंपस प्लेमेंट के दौरान चयन हुआ। इस दौरान यूपी के टिकारिया प्लांट में काम करने वाली वह एकमात्र महिला थीं।
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इस दौरान उन्होंने अपने बचपन के सपने को फिर से जीने का मन बनाया। नौकरी छोड़ आईएएस परीक्षा की तैयारी शुरू की। इतिहास विषय के साथ तैयारी शुरू की। चार माह कोचिंग ली। तीसरे प्रयास में परीक्षा पास कर ली। पहली पोस्टिंग फाइन आर्ट फाउंडेशन की सचिव के रूप में हुई।
कोरोना काल में शुरू किया हेल्पलाइन नंबर 1950, अपने तरह की अनोखी पहल
ट्रेनिंग के दौरान पर्यावरण, सौंदर्यीकरण, जल संरक्षण पर काम करने का मौका मिला। कोरोना काल में प्रकृति की ओर से दी गई चुनौती को कोविड-19 हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी कर सीधे संभाला। इससे हर दिन चार से पांच हजार मजदूरों ने मदद की गुहार लगाई। एनसीआर में यह अपने तरह की पहल थी। इसकी सराहना भारत सरकार के गृह सचिव ने भी की।
महिलाएं सामुदायिक भागीदारी से जीतें अपनी जंग
आईएएस अपराजिता ने महिला दिवस पर महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे सामुदायिक भागीदारी से अपनी जंग जीतने की तैयारी करें। इससे छोटी सी मुहिम भी जन आंदोलन बन जाती है। वह महिला होने के नाते अन्य महिलाओं की चुनौतियों को भांप भी सकती हैं और समझ भी सकती हैं, अपराजिता मानती हैं कि महिलाओं में अथाह साहस है। वह आगे बढ़ें। इससे बाकी महिलाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। आपकी प्रेरणा कब किसकी जिंदगी बदल देगी यह आपको पता भी नहीं चलेगा। महिलाएं वर्ग विशेष की नहीं समाज की प्रेरणा हैं। उनका साहस कई लोगों को मुख्य धारा से जोड़ता है।
महिलाएं सामुदायिक भागीदारी से जीतें अपनी जंग
आईएएस अपराजिता ने महिला दिवस पर महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे सामुदायिक भागीदारी से अपनी जंग जीतने की तैयारी करें। इससे छोटी सी मुहिम भी जन आंदोलन बन जाती है। वह महिला होने के नाते अन्य महिलाओं की चुनौतियों को भांप भी सकती हैं और समझ भी सकती हैं, अपराजिता मानती हैं कि महिलाओं में अथाह साहस है। वह आगे बढ़ें। इससे बाकी महिलाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। आपकी प्रेरणा कब किसकी जिंदगी बदल देगी यह आपको पता भी नहीं चलेगा। महिलाएं वर्ग विशेष की नहीं समाज की प्रेरणा हैं। उनका साहस कई लोगों को मुख्य धारा से जोड़ता है।